गाजीपुर की गलियों से उठती तंदूर की खुशबू: जहां शाही जायके के साथ शाहिद भाई की रोटी बन गई है शहर का स्वाद!
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गाजीपुर शहर के एमएच इंटर कॉलेज के पास से गुजरते ही तंदूर में सिकती ताज़ी रोटियों की सोंधी खुशबू अपने-आप कदम रोक लेती है. पिछले दो दशकों से शाहिद भाई का तंदूर यहां सिर्फ रोटियां नहीं, बल्कि स्वाद, मेहनत और ईमानदारी की कहानी सेंक रहा है. श्रीमाल से लेकर बर्खानी तक, हर रोटी में ऐसा जायका है जिसने ताज रोटी कॉर्नर को गाजीपुर के फूड मैप पर एक खास मुकाम दिला दिया है.
गाजीपुर. शहर के एमएच इंटर कॉलेज के पास से गुजरते हुए अगर ताज़ी रोटियों की सोंधी खुशबू आपके कदम रोक ले, तो समझ जाइए कि आप ‘ताज रोटी कॉर्नर’ की सरहद में हैं. यहां पिछले दो दशकों से शाहिद भाई का तंदूर सिर्फ रोटियां नहीं सेंक रहा, बल्कि गाजीपुर के जायके की एक नई इबारत लिख रहा है. ताज रोटी कॉर्नर की सबसे बड़ी खूबी यहां मिलने वाली रोटियों की विविधता है. यहां सादी रोटी के अलावा कुछ ऐसी खास वैरायटी भी हैं, जिनके लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. श्रीमाल रोटी: दुकान की सबसे ज़्यादा बिकने वाली आइटम मात्र ₹12 में मिलने वाली इस रोटी की रोज़ाना डिमांड 600 से 700 के पार रहती है. ऐसे ही 35 रूपए की बर्खानी रोटी, इस रोटी को ‘शाही’ दर्जा प्राप्त है. इसमें घी की भरपूर मात्रा और तंदूर की सोंधी आंच का ऐसा मेल होता है कि खाने वाला बस देखता ही रह जाए. मीठी (मिसरी) और रुमाली, हल्की मिठास वाली मिसरी रोटी और मखमल जैसी मुलायम रुमाली रोटी का स्वाद यहां के हुनर की तस्दीक करता है.
यहां शुद्धता का भी खास ख्याल रखा जाता है
आज के दौर में जहां मिलावट एक बड़ी चिंता बन चुकी है, शाहिद भाई ने शुद्धता से कभी समझौता नहीं किया. वे बताते हैं कि रोटियों के लिए आटा गूंथने में सिर्फ RO पानी का ही इस्तेमाल किया जाता है. हर दिन करीब 2 कुंतल आटा तैयार करना और चिलचिलाती गर्मी में तंदूर की आंच के सामने घंटों खड़े रहना किसी तपस्या से कम नहीं. लेकिन जब ग्राहक स्वाद की तारीफ करता है, तो तंदूर की तपिश भी महसूस नहीं होती—ऐसा शाहिद भाई का कहना है.
ढाबों से लेकर होटलों तक का सप्लाई हब
ताज रोटी कॉर्नर की साख का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के बड़े-बड़े होटल और ढाबे अपनी रसोइयों के लिए रोटियों की सप्लाई यहीं से लेते हैं. 20 साल पहले एक छोटे से स्तर पर शुरू हुआ यह सफर आज गाजीपुर के ‘फूड मैप’ का एक ज़रूरी हिस्सा बन चुका है.
जायका जो दिलों को जोड़ता है
रेडीमेड और फास्ट फूड के इस युग में भी शाहिद भाई की दुकान यह साबित कर रही है कि अगर हाथ में हुनर और नीयत में ईमानदारी हो, तो पारंपरिक स्वाद कभी फीका नहीं पड़ता. ताज रोटी कॉर्नर आज गाजीपुर के उन चुनिंदा ठिकानों में से एक है, जहां का रास्ता सीधा लोगों के दिल (और पेट) तक जाता है.
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