बिना बेटी वालों को पुत्री विवाह स्कीम के 55 हजार, उधर नि:संतान उठा रहे मातृत्व योजना का लाभ, मिर्जापुर में ये कैसा खेल!

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बिना बेटी वालों को पुत्री विवाह स्कीम के 55 हजार, उधर नि:संतान उठा रहे मातृत्व योजना का लाभ, मिर्जापुर में ये कैसा खेल!


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मिर्जापुर का ये फर्जीवाड़ा सुर्खियों में है. जांच में पुत्री विवाह योजना के 12 लाभार्थियों में पहली बार छह फर्जी पाए गए, लेकिन दोबारा जांच हुई तो सभी 12 फर्जी पाए गए. मातृत्व शिशु योजना के 1072 लाभर्थियों की शिकायत की गई. 105 लाभर्थियों की रैंडम जांच हुई तो करीब 85 प्रतिशत फर्जी मिले. निर्माण श्रमिकों को पुत्री विवाह योजना के तहत 55 हजार रुपये का लाभ दिया जाता है. इसमें पुरुष और महिला दोनों श्रमिक शामिल हैं. मातृत्व शिशु योजना के तहत संतान होने पर पुरुष को 25 हजार रुपये और महिला श्रमिक को लड़का होने 52 से 55 हजार रुपये मिलता है.

मिर्जापुर. यूपी के मिर्जापुर जिले में अंधे को चश्मा देने का मामला सामने आया है. श्रम विभाग ने निःसंतान दंपति को मातृत्व शिशु योजना और बिना लड़की के कन्या विवाह योजना का लाभ दे दिया गया. पूरे फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद जब शिकायत की गई तो मूल शिकायत की जगह रैंडम लाभार्थियों की जांच की गई. रैंडम जांच में गजबे घोटाला सामने आया. 100 लाभार्थियों की जांच में 85 फर्जी पाए गए. मामले में श्रम विभाग ने मुकदमा दर्ज कराया है, जहां फर्जीवाड़े की जांच हो रही है.

मिर्जापुर जिले के छानबे के गोपालपुर गांव की रहने वाली ममता देवी और निलेश प्रजापति ने निर्माण श्रमिकों को मिलने वाले मातृत्व शिशु लाभ योजना और पुत्री विवाह योजना में फर्जी लाभ लेने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई. शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. जांच में पुत्री विवाह योजना के 12 लाभार्थियों में पहली बार छह फर्जी पाए गए, लेकिन दोबारा जांच हुई तो 12 फर्जी पाए गए. हालांकि, सिर्फ 11 के खाते में ही पैसा गया था. मातृत्व शिशु योजना 1072 लाभर्थियों की शिकायत की गई. शिकायत के बाद 105 लाभर्थियों का रैंडम जांच किया गया. 105 लाभर्थियों में करीब 85 प्रतिशत फर्जी पाए. गए जांच रिपोर्ट में आया कि जिनको बच्चे नहीं थे, उन्होंने योजना का लाभ लिया है.

गजब है जांच रिपोर्ट

पुत्री विवाह योजना में लाभार्थी रामा की जांच की गई तो पता चला कि इनको पुत्री ही नहीं है. यानि बिना लड़की के ही पुत्री विवाह योजना का लाभ दिया गया. जबकि, श्रम प्रवर्तन अधिकारी की 9 अप्रैल 2023 की रिपोर्ट में पात्र बताया गया है. लाभार्थी पखंडू की पुत्री की शादी 8 साल पहले हो गई थी, लेकिन कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से योजना का लाभ ले लिया गया. मातृत्व शिशु योजना में बेबी की जांच की गई तो पता चला कि इन्हें भी संतान नहीं है. हालांकि, इन्होंने आवेदन किया. जांच हुई. पात्र मिली और पैसे भी खाते में चले गए. फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 11 नामजद और एक अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है.

कौन बचा रहा

श्रमिक संगठन से जुड़े व शिकायतकर्ता मंगल तिवारी ने बताया कि जिन लाभर्थियों की शिकायत हुई थी, उनकी जांच नहीं हुई. बावजूद हुए जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है. सबसे बड़ा सवाल है कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और दस्तावेज कैसे तैयार हुए. जांच करने वाले अधिकारियों ने कैसे रिपोर्ट लगा दी. मॉनिटर करने वाले अधिकारी पहले मामले को फर्जी बता रहे थे, लेकिन बाद में उनकी ही जांच रिपोर्ट मामला फर्जी निकला. आखिर श्रम विभाग के अधिकारियों को कौन बचा रहा है. यह सबसे बड़ा सवाल है.

क्या होगा आगे

सहायक श्रमायुक्त सतीश ने बताया कि पुत्री विवाह योजना में फर्जी तरीके से लाभ लेने का मामला सामने आया था, जिसमें 11 अपात्र मिले थे. सभी से धनराशि की वसूली की गई है. जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की ओर से इस मामले में मुकदमा को लेकर निर्देश दिए गए थे, जिसमें विंध्याचल कोतवाली में तहरीर दिया गया है. तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. श्रम विभाग से जुड़े हुए जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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