टेराकोटा कला की पुश्तैनी परंपरा को नई पहचान देने वाले पन्नेलाल प्रजापति, राज्य स्तर पर दिलाई पहचान!

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टेराकोटा कला की पुश्तैनी परंपरा को नई पहचान देने वाले पन्नेलाल प्रजापति, राज्य स्तर पर दिलाई पहचान!


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पन्नेलाल प्रजापति, एक पारंपरिक टेराकोटा कारीगर, अपने परिवार की पुश्तैनी मिट्टी कला को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं. सदियों पुरानी इस कला को आज वे न केवल डेकोरेटिव आइटम्स के रूप में पेश कर रहे हैं, बल्कि इसे आधुनिक ज़माने के अनुरूप भी ढाल रहे हैं. उनकी मेहनत और समर्पण से टेराकोटा उत्पादों को राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है. पन्नेलाल की कला, मिट्टी से बनी मूर्तियों से लेकर दीवार पर लटकने वाले छोटे उत्पादों तक, आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है.

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महराजगंज. हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में कई पारंपरिक चीजें देखने को मिलती हैं, जो हमें उस क्षेत्र की संस्कृति और कला के बारे में जानने का मौका देती हैं. यह कला और संस्कृति न केवल उनके इतिहास, बल्कि जन जीवन को भी उजागर करती है. सदियों से चली आ रही टेराकोटा की परंपरा हमारे देश की संस्कृति का अहम हिस्सा रही है, और आज भी यह उतनी ही लोकप्रिय है। पहले लोग इसे दैनिक जीवन में उपयोग करने के लिए खरीदते और बनाते थे, लेकिन समय के साथ अब यह व्यवसायिक रूप में डेकोरेटिव आइटम्स के रूप में भी बिकने लगा है. इन आइटम्स का उपयोग घर की सजावट और सुंदर डिजाइन के लिए किया जाता है. ऐसे ही एक टेराकोटा व्यवसायी हैं पन्नेलाल प्रजापति, जो अपने परिवार की पुश्तैनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने मिट्टी कला को अपनी परंपरा माना है, और साथ ही इसे एक नई पहचान भी दिलाई है.

टेराकोटा: पन्नेलाल प्रजापति की पुश्तैनी परंपरा

पन्नेलाल प्रजापति ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि उनका परिवार इस व्यवसाय से लंबे समय से जुड़ा हुआ है. मिट्टी से विभिन्न टेराकोटा उत्पाद बनाने की यह परंपरा उनके परिवार का अहम हिस्सा रही है. उन्होंने बताया कि टेराकोटा उनके लिए नया नहीं है, बल्कि यह उनकी पुश्तैनी परंपरा का हिस्सा है, और उनकी यह पांचवीं पीढ़ी है जो आज भी मिट्टी कला से जुड़ी हुई है. हाल ही में एक प्रदर्शनी के दौरान, उन्होंने अपने बनाए हुए मिट्टी के उत्पाद पेश किए, जिन्हें लोगों ने बहुत पसंद किया. पन्नेलाल प्रजापति ने यह भी बताया कि उन्हें टेराकोटा उत्पाद के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. प्रदर्शनी में उन्होंने भगवान गणेश की मिट्टी से बनी मूर्तियां, पौधे लगाने के लिए मटके (जो किसी भी कोण पर खड़े किए जा सकते हैं), और छोटे सामान रखने के लिए दीवार पर लटकने वाले उत्पाद भी दिखाए, इन सभी उत्पादों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया.

लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं टेराकोटा उत्पाद

पन्नेलाल प्रजापति के पास मिट्टी से बने अनेक प्रकार के सुंदर और आकर्षक उत्पाद हैं, जिन्हें घर में सजाने और प्रयोग करने के लिए खरीदा जा सकता है. उनकी कला हमें पुरानी चीजों की याद दिलाती है, और यह दिखाती है कि इन्हें कैसे आधुनिक बनाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि उनके पास सबसे सस्ता उत्पाद मिट्टी का दीपक है, और सबसे महंगा उत्पाद भगवान गणेश की मूर्ति है, जिसकी कीमत ₹2500 है. उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शनी में वह पांच गणेश मूर्तियां लेकर आए थे, लेकिन अब उनके पास सिर्फ एक ही बची है. यह दर्शाता है कि आज के समय में भी मिट्टी से बने उत्पाद लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं.

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Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें



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