गर्मियों में कब करें मक्के की बुवाई, देरी की तो बढ़ जाएगी लागत, उपज कम होगी अलग, कृषि एक्सपर्ट से जानें
Last Updated:
मक्के की खेती का रकबा बढ़ता जा रहा है. ज्यादा पैदावार और अच्छी कीमत मिलने से किसान इसकी खेती तेजी से अपना रहे हैं. इत्र नगरी कन्नौज में भी बड़े पैमाने मक्का की खेती होने लगी है. सौरिख, छिबरामऊ, तिर्वा और उमर्दा ब्लॉक क्षेत्र में किसान व्यापक स्तर पर मक्का उगाते हैं. मक्का बुवाई का समय निकट आ रहा है. लोकल 18 से बात करते हुए कन्नौज के कृषि एक्सपर्ट संतोष कुमार कहते हैं कि किसान भाई 4 मार्च से पहले मक्के की बुवाई जरूर कर लें. समय से बोई गई फसल में पानी की खपत अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे सिंचाई का खर्च घटता है.
कन्नौज. मक्के की खेती किसानों के लिए बड़ा सहारा बनकर सामने आई है. यूपी कन्नौज में भी किसान बड़े पैमाने पर मक्का उगाने लगे हैं. इत्र नगरी कन्नौज में जहां एक ओर इत्र उद्योग की खास पहचान है, दूसरी तरफ खेती भी यहां की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ रही है. खासतौर पर मक्के की खेती जिले में बड़े पैमाने पर की जाती है. सौरिख, छिबरामऊ, तिर्वा और उमर्दा ब्लॉक क्षेत्र में किसान व्यापक स्तर पर मक्का की बुवाई करते हैं. मक्का यहां की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है, जिससे पशु आहार उद्योग और बाजार दोनों में अच्छी मांग बनी रहती है. बदलते मौसम के बीच इस बार कृषि विभाग ने किसानों को समय से पहले बुवाई करने की सलाह दी है.
देरी से क्या दिक्कत
लोकल 18 से बात करते हुए कन्नौज के डिप्टी डायरेक्टर (कृषि) संतोष कुमार कहते हैं कि किसान भाई 4 मार्च से पहले मक्के की बुवाई अवश्य कर लें. फरवरी के अंत से ही तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. यदि किसान देर से बुवाई करेंगे तो फसल के विकास के समय अधिक गर्मी पड़ेगी, जिससे सिंचाई की लागत बढ़ सकती है. अधिक तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम होती है और बार-बार पानी देना पड़ता है. इससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ता है. समय रहते बुवाई से लागत कम आएगी.
इन बातों का भी रखें ध्यान
डिप्टी डायरेक्टर (कृषि) संतोष कुमार के मुताबिक, यदि 4 मार्च से पहले मक्के की बुवाई कर दी जाती है तो फसल को शुरुआती बढ़वार के दौरान अनुकूल तापमान मिलेगा. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होंगी और दाना भराव की प्रक्रिया भी बेहतर होगी. समय से बोई गई फसल में पानी की खपत अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे सिंचाई का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि की संभावना रहती है. किसान भाई प्रमाणित बीज, संतुलित उर्वरक और उचित दूरी पर बुवाई करें. बढ़ते तापमान को देखते हुए समय पर बुवाई ही फायदे का सौदा है.
About the Author
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें