‘जैसे सिर से पिता का साया उठ गया’, खामेनेई की मौत को लेकर शिया समुदाय का दर्द
सहारनपुर: ईरान के सुप्रीम अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की मौत के विरोध में भारत देश के विभिन्न हिस्सों सहित सहारनपुर में भी प्रदर्शन हुआ. यहां शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए, जिसमें शिया समुदाय के लोगों के लिए खामेनेई कितने अहम थे और चल रहे वॉर को लेकर सहारनपुर के शिया समुदाय के लोगों की क्या प्रतिक्रिया है, इसको लेकर समुदाय के लोगों ने लोकल 18 से बातचीत की.
उन्होंने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत बढ़-चढ़कर चल रही इस वॉर के बीच में मध्यस्थता करे और इस युद्ध को रुकवाने की कोशिश करे. ईरान से भारत के शुरू से ही रिश्ते अच्छे रहे हैं. वह इस दुख को बयां नहीं कर पा रहे हैं. कुछ लोग भावुक होकर बोले कि खामेनेई की मौत हमेशा शहादत के रूप में याद रखी जाएगी. उसको कभी भुलाया नहीं जा सकता है.
सिर से उठा पिता का साया
वहीं ईरान साथ-साथ अन्य मुस्लिम देशों के लिए भी सच्चे और सभी को जोड़कर चलने वाले व्यक्ति थे. पूरी दुनिया में जितने शिया हैं, वह उनकी बातों को माना करते थे और उनका चला जाना एक इस तरीके से हो गया है, जैसे उनके सिर से पिता का साया उठ गया हो.
शिया समुदाय के लोगों के लिए बड़ा नुकसान
शिया समुदाय के लोगों ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि ईरान के सुप्रीम अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की मौत की खबर से शिया, सुन्नी और तमाम मुस्लिम धर्म के लोगों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वह ईरान के सुप्रीम ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के शिया और मुस्लिम लोगों के लिए उनके रहनुमा थे.
शिया समुदाय के लोगों ने कहा कि उनका जाना हम लोगों के लिए बहुत बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस तरीके से इजराइल और अमेरिका नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, उसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बीच में आकर मध्यस्थता करनी चाहिए और जारी इस युद्ध को रोकने पर चर्चा करनी चाहिए.
मुस्लिम समाज के लोगों से समुदाय की अपील
शिया समाज के लोगों ने खामेनेई को अपने पिता से भी बढ़कर बताया है. उनके ऊपर धोखे से हमला किया गया है. अगर लड़ाई लड़नी ही थी, तो ईरान की फौज से लड़ते. धोखे से उनको और वहां के मासूम लोगों को मारा जा रहा है. भारत के शिया समाज के लोग गुस्से के साथ-साथ गमगीन हैं और उन्होंने पूरे मुस्लिम समाज के लोगों से ईरान के साथ खड़े होने की अपील भी की है.