कानपुर की विकसित सरसों! अब अरुणाचल, सिक्किम, त्रिपुरा और मणिपुर में करेगी कमाल
कानपुर की विकसित सरसों! अब अरुणाचल, सिक्किम, त्रिपुरा और मणिपुर में करेगी कमाल
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Kanpur developed mustard: हाल ही में डॉ. महक सिंह ने मणिपुर और त्रिपुरा के खेतों का दौरा किया. उन्होंने वहां खड़ी सरसों की फसल का निरीक्षण किया और किसानों को उन्नत खेती के तरीके समझाए. उन्होंने बताया कि समय पर बुवाई, संतुलित खाद, कीट नियंत्रण और उन्नत बीजों का उपयोग पैदावार बढ़ाने में महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सीएसए विवि में तैयार किए जा रहे जनक बीज इस साल के अंत तक इन राज्यों के किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे. जिससे आने वाले वर्षों में सरसों की उपज में निश्चित ही सुधार होगा.
कानपुरः कानपुर शहर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) की सरसों अब अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा और मणिपुर के खेतों में नई पहचान बनाने जा रही है. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य मिशन के तहत इन चारों राज्यों में सरसों की पैदावार बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है. इसी के तहत सीएसए विवि के शोध निदेशक और सरसों के विशेषज्ञ डॉ. महक सिंह को पूर्वोत्तर के इन राज्यों में भेजा गया है.
डॉ. महक सिंह किसानों और कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर रहे है. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में सरसों की पैदावार कई राज्यों से बेहतर है, लेकिन पूर्वोत्तर में अभी उत्पादन की काफी संभावनाएं है. यदि सही बीज और वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं, तो यहां भी अच्छी पैदावार संभव है.
हाल ही में डॉ. महक सिंह ने मणिपुर और त्रिपुरा के खेतों का दौरा किया. उन्होंने वहां खड़ी सरसों की फसल का निरीक्षण किया और किसानों को उन्नत खेती के तरीके समझाए. उन्होंने बताया कि समय पर बुवाई, संतुलित खाद, कीट नियंत्रण और उन्नत बीजों का उपयोग पैदावार बढ़ाने में महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सीएसए विवि में तैयार किए जा रहे जनक बीज इस साल के अंत तक इन राज्यों के किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे. जिससे आने वाले वर्षों में सरसों की उपज में निश्चित ही सुधार होगा.
सीएसए विवि ने अब तक सरसों की कई उन्नत प्रजातियां विकसित की है. जिनमें उर्वशी, बसंती, कांती, माया, आर्शीवाद, पीतांबरी, तपेश्वरी, आजाद चेतना, आजाद महक, सुरेखा, गोवर्धन और आजाद गौरव शामिल है. इन किस्मों की खासियत है कि इनमें अच्छी उपज के साथ 40 प्रतिशत या उससे अधिक तेल की मात्रा होती है.
कुछ प्रजातियां कम समय में तैयार हो जाती हैं, जिससे किसानों को जल्दी उत्पादन मिल जाता है, जबकि कई किस्में अधिक उपज देने में सक्षम है. कृषि मंत्रालय का मानना है कि अगर इन उन्नत प्रजातियों को अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा और मणिपुर में सही तरीके से अपनाया गया तो न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि देश की खाद्य तेल जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी. सीएसए की सरसों अब पूर्वोत्तर भारत के खेतों में नई उम्मीद की फसल बनने जा रही है. आने वाले समय में इन चारों राज्यों के खेतों में सुनहरी सरसों की लहर साफ नजर आ सकती है.