मक्के की बुवाई का ये आखिरी मौका, 10 दिनों में अपनाएं सही तकनीक, पाएं बेहतर पैदावार

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मक्के की बुवाई का ये आखिरी मौका, 10 दिनों में अपनाएं सही तकनीक, पाएं बेहतर पैदावार


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सुल्तानपुर में मक्के की बुवाई का अंतिम समय चल रहा है. जिन किसानों ने अभी तक बुवाई नहीं की है, वे अगले 10 दिनों में उन्नत किस्मों का चयन, बीज उपचार और सही दूरी व विधि अपनाकर अच्छी पैदावार ले सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार संतुलित उर्वरक और सही खेत तैयारी से उत्पादन में बढ़ोतरी संभव है.

सुल्तानपुर. इस समय मक्के की बुवाई हो रही है, कुछ किसानों ने इसकी बुवाई कर भी ली है लेकिन कुछ किसान अभी नहीं कर पाए हैं. ऐसे में अभी भी उनके पास यह 10 दिन का समय है लेकिन इसकी बुवाई करने के लिए उनको कुछ अलग से मक्के की प्रजातियां का चयन करना होगा और उसके खेतों की तैयारी भी करनी होगी. जिसको कृषि वैज्ञानिक बेहतर और आधुनिक तरीके से बताते हैं. ऐसे में आज हम जानेंगे कि यदि आप भी अभी तक मक्के की बुवाई नहीं कर पाए हैं तो यह अंतिम मौका है. आप मौके की बुवाई कर सकते हैं.

इस तरह करें बुआई
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत मुख्य कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर जे बी सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि मक्के की बुवाई वैसे तो फरवरी महीने के अंतिम सप्ताह और मार्च महीने तक होती है. लेकिन कुछ लोग यदि मक्के की बुवाई नहीं कर पाए हैं तो अभी भी उनके पास 10 दिन का समय है वे मक्के की बुवाई कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें सबसे पहले दिन का उपचार कर लेना है इसके लिए दो से तीन ग्राम प्रति किलो मकई के बीच को थायरम और कार्बेन्डाजिम से उपचारित करना चाहिए और इसकी बुवाई हाथ से या ड्रिलिंग विधि द्वारा की जानी चाहिए.  मक्के की बुवाई के पहले खेत की सही तैयारी जरूरी है. मक्का की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सबसे जरूरी होती है. सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए, जिससे मिट्टी में मौजूद कीटों के अंडे और रोगों के कारक खत्म हो जाते हैं. इसके बाद खेत में पाटा लगाकर उसे समतल करना चाहिए, ताकि सिंचाई के समय पानी पूरे खेत में समान रूप से फैल सके और बीजों का अंकुरण भी बेहतर हो. इसके साथ ही मकई के बीजों के बीच उचित दूरी भी होना चाहिए. बीज दर 8-10 किलो प्रति एकड़ रखें, लाइनों के बीच 60-70 सेमी और पौधों के बीच 20-25 सेमी की दूरी रखते हुए 3-5 सेमी की गहराई में बुवाई करें.

उर्वरकों का करें प्रयोग 
मक्का की फसल को बढ़ाने के लिए पोषण की आवश्यकता होती है, इसलिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना जरूरी है. कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही किया जाए, ताकि फसल को सही मात्रा में पोषक तत्व मिल सकें और उत्पादन बेहतर हो. यदि इन सबका प्रयोग सही तरीके से किया जाए तो मक्के की पैदावार में अच्छा मुनाफा होगा और आप कम समय में अच्छी फसल हासिल कर सकते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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