इस सीजन चाहिए शहद जैसे मीठे और रसीले आम? तो अभी से शुरू करें पेड़ों की ये खास देखभाल
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Increase Mango Sweetness: इन दिनों आम में बौर का सीजन है. अगर आप चाहते हैं कि आपके बगीचे के आम बड़े, चमकदार और मिठास से भरपूर हों, तो बौर आने से लेकर फल बनने तक के सफर में आपको कुछ ऐसे खास वैज्ञानिक तरीके अपनाने होंगे. जिससे आपकी फसल अच्छी होगी. जानिए पोटाश का सही इस्तेमाल, कीटों से बचाव और फलों की छंटाई जैसे छोटे-छोटे कदम कैसे आपके साधारण से आम को खास बना सकते हैं. जानिए रसीले आमों की पैदावार बढ़ाने के वो सीक्रेट्स जो हर बागवान के काम आएंगे.
आम के बाग की अच्छी सेहत के लिए पेड़ों के चारों ओर साफ-सफाई सबसे पहला कदम है. पेड़ के तने के पास मिट्टी की गुड़ाई करके एक घेरा बनाएं. इससे न केवल खरपतवार खत्म होते हैं, बल्कि सिंचाई के समय पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है. जमीन को हवा मिलने से जड़ों का विकास बेहतर होता है और मिट्टी में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि रसीले आमों के लिए पेड़ों को बेहतर ‘डाइट’ की जरूरत होती है. इस समय सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का मिश्रण दें. पोटाश फलों की चमक और मिठास बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है. खाद डालने के बाद मिट्टी को अच्छी तरह मिला दें ताकि पोषक तत्व सीधे पेड़ की नसों तक पहुंच सकें.

जब आम के पेड़ पर बौर आ रहे हों, तो सिंचाई थोड़ी कम कर देनी चाहिए, लेकिन जैसे ही फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, नियमित सिंचाई बहुत जरूरी है. नमी की कमी से फल समय से पहले गिर सकते हैं. सही अंतराल पर पानी देने से फल का गूदा नरम और रसीला बनता है, जिससे उसका आकार भी बढ़ता है.
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मंजरियों और छोटे फलों को ‘मधुआ’ यानि हॉपर और ‘गुजिया’ जैसे कीटों से बचाना जरूरी है. ये कीट फलों का रस चूस लेते हैं, जिससे वे काले पड़कर गिर जाते हैं. इसके बचाव के लिए नीम के तेल का छिड़काव करें. स्वस्थ पेड़ ही रसीले और उत्तम गुणवत्ता वाले फल पैदा कर सकता है.

केवल मुख्य खाद ही काफी नहीं होती है, कभी-कभी पेड़ों को ‘मल्टी-विटामिन’ की भी जरूरत पड़ती है. जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने से फलों का फटना रुकता है और उनकी मिठास बढ़ती है. बोरॉन विशेष रूप से फलों के आंतरिक स्वास्थ्य और शर्करा की मात्रा को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे आम अधिक रसीला होता है.

एक ही टहनी पर बहुत अधिक फल होने से उनका आकार छोटा रह जाता है और रस की कमी हो जाती है. अगर किसी गुच्छे में बहुत ज्यादा आम लगे हैं, तो कमजोर फलों को हटा दें. इससे पेड़ की ऊर्जा सीमित फलों पर केंद्रित होती है, जिससे बचे हुए आम बड़े और रस से भरपूर तैयार होते हैं.

पेड़ के अंदरूनी हिस्सों तक धूप पहुंचना बहुत जरूरी है. घनी और सूखी टहनियों की हल्की छंटाई करें ताकि हवा का संचार बना रहे. पर्याप्त धूप मिलने से फलों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे उनमें प्राकृतिक मिठास आती है. सही वेंटिलेशन बीमारी फैलने के खतरे को भी कम करता है.