सिस्टम से हारे लोगों का सहारा: पीलीभीत में भगवान खुद करते हैं फाइलों का निपटारा

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सिस्टम से हारे लोगों का सहारा: पीलीभीत में भगवान खुद करते हैं फाइलों का निपटारा


Golu Devta Temple Pilibhit: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक ऐसा दरबार सजता है, जहां न तो कोई जज बैठता है और न ही कोई वकील जिरह करता है, फिर भी यहां न्याय की शत-प्रतिशत गारंटी है. शांत वादियों के बीच स्थित यह मंदिर आज आस्था और ‘लिखित फरियाद’ का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है. यहां भक्त भगवान के सामने हाथ जोड़ने के बजाय, कागज और कलम लेकर अपनी किस्मत का फैसला लिखवाने आते हैं. पीलीभीत के ‘गोलू देवता’ मंदिर की कहानी आज हर उस शख्स के लिए उम्मीद की किरण है, जो दुनिया के सिस्टम से थक चुका है.

आस्था की वो अदालत जहां कागज पर लिखी जाती है फरियाद
उत्तर प्रदेश के एक शांत इलाके में एक ऐसा स्थान है, जिसकी चर्चा आजकल हर तरफ है. यहां लोग घंटों लाइन में लगकर हाथ नहीं जोड़ते, बल्कि अपने हाथों में सफेद कागज और कलम थामे नजर आते हैं. पहली नजर में यह कोई सरकारी दफ्तर या कचहरी जैसा लग सकता है, लेकिन असल में यह आस्था का वो केंद्र है जहाँ फरियादें सीधे ईश्वर की अदालत में पेश की जाती हैं.

पीलीभीत में स्थापित ‘न्याय के देवता’ का दरबार
यह अनोखा मंदिर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में स्थित है, जिसे गोलू देवता के मंदिर के नाम से जाना जाता है. उत्तराखंड के अल्मोड़ा और नैनीताल की तर्ज पर बने इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की अर्जी प्रथा है. यहाँ आने वाला हर भक्त अपनी व्यथा, दुख या कानूनी उलझन को एक सादे कागज पर ‘प्रार्थना पत्र’ की तरह लिखता है.

जमीन का झगड़ा हो या पुलिस केस, यहाँ लगती है अर्जी
चाहे जमीन-जायदाद का पुराना झगड़ा हो, पुलिस-कचहरी के मामले हों या घर की कोई बड़ी परेशानी लोग अपनी पूरी कहानी उस कागज पर उतारकर मंदिर परिसर में बांध देते हैं. भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहां का ‘न्यायाधीश’ कभी गलत फैसला नहीं करता.

हजारों घंटियां हैं न्याय की गवाह
जैसे ही आप मंदिर के भीतर कदम रखेंगे, आपको चारों तरफ हजारों पीतल की घंटियां लटकी हुई दिखाई देंगी. ये घंटियां इस बात का सबूत हैं कि यहाँ न्याय मिलता है. परंपरा यह है कि जब किसी भक्त की मुराद पूरी हो जाती है या उसे अपनी समस्या से छुटकारा मिल जाता है, तो वह आभार जताने के लिए यहां घंटी चढ़ाता है.

न वकील, न तारीख: सीधे मिलता है समाधान
हजारों की संख्या में ये घंटियां बताती हैं कि कितने लोगों की अर्जी यहाँ स्वीकार की जा चुकी है. यहाँ न तो किसी वकील की जरूरत पड़ती है और न ही लंबी तारीखों का इंतजार करना पड़ता है. यहाँ बस भक्त का सच्चा विश्वास और उसकी लिखित पुकार ही काफी होती है. गोलू देवता को मूल रूप से शिव का अवतार और न्याय का देवता माना जाता है.

सिस्टम से थके लोगों की आखिरी उम्मीद
पीलीभीत का यह मंदिर अब केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर-दराज के जिलों से भी लोग अपनी फाइलें और कागज लेकर यहाँ पहुँचते हैं. आज के भागदौड़ भरे समय में, जहाँ लोग सिस्टम से थक जाते हैं, वहाँ यह दरबार उन्हें एक नई उम्मीद और मानसिक शांति प्रदान करता है.



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