द्वापर युग से जुड़ा रहस्यमयी मां परमेश्वरी मंदिर, ईंट चढ़ाने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं!
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गोंडा के मेहनौन में स्थित मां परमेश्वरी देवी मंदिर आस्था और रहस्य का प्राचीन केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि द्वापर युग से जुड़े इस स्वयंभू धाम में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. यहां मन्नत के लिए ईंट चढ़ाने की अनोखी परंपरा है, जबकि सोमवार-शुक्रवार और नवरात्रि में विशेष मेले का आयोजन होता है, जहां दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.
गोंडा. उत्तर प्रदेश गोंडा जिले विकासखंड इटियाथोक के मेहनौन में स्थित मां परमेश्वरी देवी मंदिर आस्था और रहस्य का एक प्राचीन केंद्र माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि यहां सदियों से मां परमेश्वरी की पूजा होती आ रही है और उनकी कृपा से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के पुजारी देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि यह स्थान द्वापर युग से जुड़ा हुआ है. भगवान श्री कृष्ण ने जब कालवन का वध किया तो उसके सारे सेनन ने अलग-अलग स्थान पर जाकर रहने लगे उन्हें में से एक म्लेच्छ राजा इस घने जंगल में रहता था. माना जाता है कि इस जंगल से यदि किसी लड़की की डोली गुजरती थी तो वह उस लड़की का अपहरण कर लेता था, और एक रात के लिए डोली को रोकता था. माना जाता है कि एक रात माता स्वयं दुल्हन के रूप में प्रकट हुई और माता रानी राजा को आवाज दिया और राजा बाहर निकाला तो माता रानी ने राजा का वध कर दिया. फिर माता रानी अंतर्ध्यान हो गई तब से लेकर आज तक इस स्थान को स्वयंभू माता रानी भी कहा जाता है. लोग जलीय वाली माता कहते थे, इस समय इस स्थान का नाम परमेश्वरी माता रानी के नाम से प्रसिद्ध है.
क्या है मान्यता
देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि परमेश्वरी माता मंदिर का मान्यता यह है कि यहां पर ईंट चढ़ाया जाता है और मन्नत पूरी हो जाने के बाद उसी के बराबर इच्छा अनुसार प्रसाद माता रानी को चढ़ाया जाता है. उन्होंने बताया कि यहां पर विशेष रूप से माता रानी की पूजा की जाती है और यहां एक परंपरा सदियों से चला आ रही है. यहां पर आसपास के बेटियों की विदाई होती है तो उसके बाद यहां पर सूअर के बच्चे की बलि दी जाती है. यह परंपरा सदियों पुरानी है और ऐसा न करने पर कुछ ना कुछ गलत हो जाता है.
कितना ऊंचा रहेगा मंदिर का शिखर
देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि पहले यहां पर कुछ नहीं था फिर माता रानी की कुछ कृपा हुई और हम यहां पर आने लगे. फिर लोगों के सहयोग से यहां पर मंदिर का निर्माण हो रहा है और इस मंदिर का शिखर 51 फीट ऊंची रहेगा. देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि परमेश्वरी माता मंदिर में गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या, हैदराबाद समेत पूरे भारत से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं.
कब-कब लगता है मेला
देवेंद्र मिश्रा बताते हैं की मां परमेश्वरी माता मंदिर पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को मेले का आयोजन होता है. साथ ही नवरात्रि में यहां पर विशेष मेले का आयोजन किया जाता है. नवरात्रि में मां परमेश्वरी माता मंदिर पर दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं और माता रानी की सारी मनोकामना पूरी करती हैं. उन्होंने बताया कि मां परमेश्वरी माता मंदिर पर सच्चे मन से प्रार्थना करने पर माता रानी सारे मुरादे पूरी करती हैं. माना जाता है कि यहां पर दर्शन मात्र से ही सारी मनोकामना पूरी होती है. श्रद्धालु अभिमन्यु सोनकर बताते हैं कि मां परमेश्वरी माता मंदिर पर हम आते रहते हैं यहां पर मेरी सिस्टर ने मन्नत मानी थी कि उसकी सरकारी नौकरी लग जाए और मन्नत पूरी हुई और हमारी बहन सरकारी नौकरी कर रही हैं. आज हम फिर एक मन्नत मांगने आए हैं और हमको पूरा विश्वास है की माता रानी हमारी मन्नत पूरी करेगी.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें