घूंघट ओढ़कर पुजारी क्यों करते हैं राम की पूजा? अयोध्या का ये तरीका कर देगा हैरान
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Ram Sakhi Tradition : भगवान राम और हनुमान के भक्त अपने नाम के आगे “दास” लगाते हैं, जबकि माता जानकी के उपासक “शरण” शब्द का प्रयोग करते हैं. माता जानकी के उपासक स्वयं को उनकी “सखी” मानते हैं. पुजारी घूंघट ओढ़कर सखी स्वरूप में भगवान की सेवा करते हैं. भगवान का स्नान, श्रृंगार, भोग और आरती सब कुछ विधिपूर्वक और स्नेहपूर्वक किया जाता है. राम कचहरी चारों धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास लोकल 18 से बताते हैं कि अयोध्या में ठाकुर जी को रिझाने के लिए कई परंपराएं प्रचलित हैं, ये उनमें से एक है.
अयोध्या. रामनगरी अयोध्या की पावन भूमि केवल भगवान श्रीराम की जन्मस्थली ही नहीं बल्कि अनोखी संत परंपराओं और गहरी भक्ति भावनाओं का जीवंत केंद्र भी है. यहां की एक ऐसी अद्भुत परंपरा है जो भक्त और भगवान के बीच प्रेम, समर्पण और अपनत्व की उस ऊंचाई को दर्शाती है, जिसकी कल्पना करना भी कठिन है. अयोध्या में सदियों पुरानी संत परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाई जाती है. यहां अलग-अलग मठों और मंदिरों में भक्ति के विविध स्वरूप देखने को मिलते हैं. कहीं रामलला की उपासना प्रमुख है तो कहीं माता माता जानकी की आराधना को विशेष स्थान दिया जाता है.
दामाद जैसा सत्कार
भगवान राम और हनुमान के भक्त अपने नाम के आगे “दास” लगाते हैं, जबकि माता जानकी के उपासक “शरण” शब्द का प्रयोग करते हैं. इस परंपरा की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि माता जानकी के उपासक स्वयं को उनकी “सखी” मानते हैं और भगवान राम को “दूल्हा सरकार” यानी बहनोई के रूप में पूजते हैं. वे माता जानकी को अपनी बहन, बेटी और माता के रूप में स्वीकार करते हुए भगवान राम की सेवा उसी भाव से करते हैं, जैसे किसी दामाद की सेवा उसके ससुराल में की जाती है.
इस भक्ति में भावनाओं की गहराई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुजारी घूंघट ओढ़कर सखी स्वरूप में भगवान की सेवा करते हैं. भगवान का स्नान, श्रृंगार, भोग और आरती सब कुछ बेहद विधिपूर्वक और स्नेहपूर्वक संपन्न किया जाता है. भगवान को इत्र से स्नान कराया जाता है. 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं और दिनभर अलग-अलग भोग लगाए जाते हैं. सुबह 4 बजे होने वाली मंगला आरती में भगवान को मधुर गीत सुनाए जाते हैं स्नान के समय सखियों के रूप में पुजारी भक्ति गीत गाते हुए सेवा करते हैं. गर्मी के दिनों में भगवान की आरती फूलों से की जाती है, ताकि उनकी कोमलता का विशेष ध्यान रखा जा सके.
दोनों में क्या अलग
राम कचहरी चारों धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास लोकल 18 से बताते हैं कि अयोध्या में ठाकुर जी को रिझाने के लिए कई परंपराएं प्रचलित हैं. भगवान के साथ संतों के अपने-अपने भाव होते हैं. अयोध्या में शरण संप्रदाय और दास संप्रदाय के संत हैं. शरण संप्रदाय के संत माता जानकी के उपासक होते हैं. दास संप्रदाय के संत प्रभु राम के उपासक. अयोध्या में शरण संप्रदाय में पुजारी और संत प्रभु राम की सखी के रूप में पूजा आराधना करते हैं और यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. अयोध्या के लगभग दर्जनों मठ मंदिर में ऐसी परंपरा का निर्वाह आज भी किया जाता है, जैसे रंग महल मंदिर और झुंकी घाट पर कई सारे मठ मंदिर इस परंपरा का निर्वहन करते आए हैं .
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें