पापा आप जीत गए, मेरी लाश को हाथ मत… 25 साल के ट्रेनी वकील का लेटर, फिर…
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ट्रेनी अधिवक्ता प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में बचपन की कड़वी यादों और वर्तमान की बंदिशों का विस्तार से जिक्र किया है. वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और व्हाट्सएप स्टेटस को भी अपनी जांच का मुख्य आधार बनाया है.
कानपुर में ट्रेनी अधिवक्ता ने की खुदकुशी.
कानपुरः उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की कचहरी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक ट्रेनी अधिवक्ता ने कचहरी की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली. मृतक ट्रेनी अधिवक्ता की पहचान प्रियांशु श्रीवास्तव के रूप में हुई है. पुलिस ने प्रियांशु के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जो बहुत भावुक कर देने वाला है. सुसाइड लेटर में प्रियांशु का वो दर्द झलकता है, जो वह वर्षों से झेल रहे थे. शायद यही वजह है कि उन्होंने लेटर में लिखा है कि उनकी लाश को उनके पिता हाथ ना लगाएं. अपने पिता की डांट, ताना और निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल देने की धमकी प्रियांशु को जिंदगी भर सताती रही. प्रियांशु ने यह भी लिखा कि पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक.
सुसाइड लेटर में बचपन की कड़वी यादों को किया शेयर
प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में बचपन की कड़वी यादों और वर्तमान की बंदिशों का विस्तार से जिक्र किया है. वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और व्हाट्सएप स्टेटस को भी अपनी जांच का मुख्य आधार बनाया है. प्रियांशु ने लेटर में यह भी लिखा कि उसके पिता उसपर हमेशा नजर रखते थे, जिससे मोहल्ले में उसको बेइज्जती फील होती थी. भगवान मेरे पिता जैसे पिता किसी का न दे और साथ में यह भी इच्छा जताई कि उनके पिता उनके शव को हाथ नहीं लगाए.
‘एक बार पापा ने निर्वस्त्र कर भगाया था’
इसके अलावा प्रियांशु ने सुसाइड नोट में अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाया है. प्रियांशु ने लिखा कि बचपन में फ्रिज से आम का जूस पीने पर पिता ने उन्हें निर्वस्त्र करके घर से निकाल दिया था. साथ ही जब हाईस्कूल में कम नंबर आए थे तब भी ऐसा ही व्यवहार करने की धमकी दी थी. 25 वर्षीय प्रियांशु खुद भी वकील थे और अपने पिता के चैंबर में ही काम करते थे.
ना मेरा कोई चैंबर, ना मेरा कोई ऑफिस
नोट में उन्होंने अपनी पहचान न होने का दर्द बयां किया. उन्होंने लिखा कि उनका न कोई अपना चैंबर है और ना ही कोई ऑफिस, वे दिन भर पिता के लिए ही काम करते रहते हैं, उन्हें लगता ता कि उनकी कोई अहमियत नहीं है, प्रियांशु ने यह भी लिखा कि वह किसी गलत संगत में नहीं थे, फिर भी पापा की बेवजह की सख्ती ने उन्हें मौत के रास्ते पर ढकेल दिया.
नोट:- (अगर आपके या आपके किसी परिचित के मन में खुदकुशी का ख्याल आता है तो ये बेहद गंभीर मेडिकल एमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.)
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Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें