जो कपड़े पहने थे बस वही बचा है… फ्लैट का बीमा ना कराना कितना पड़ा महंगा? राघव की कहानी

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जो कपड़े पहने थे बस वही बचा है… फ्लैट का बीमा ना कराना कितना पड़ा महंगा? राघव की कहानी


गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम के गौर ग्रीन एवेन्यू स्थित टॉवर डी में आग की घटना ने सबको चिंता में डाल दिया है. जिस तरह से फ्लैट में आग लगी, उस हिसाब से कुछ भी नहीं बचा. कई लोगों की कहानियां भी सामने आईं, जिनका सबकुछ जलकर खाक हो गया. हालांकि इस आग की घटना से उन लोगों की गलतफहमी दूर हो गई, जिन्हें यह लगता था कि सोसाइटी के इंश्योरेंस में उनके फ्लैट्स भी कवर होते हैं. ऐसी ही कहानी है एक परिवार की. पीड़ित राघव ने बताया कि वह बस इस आग की घटना में अपना पर्स और फोन ही बचा पाए. राघव फिलहाल साहिबाबाद के कंट्री इन होटल में ठहरे हुए हैं. राघव ने कहा कि सब कुछ खत्म हो गया. घर से निकलते समय हमने जो कपड़े पहने थे, सिर्फ वही बचे हैं.”

‘घर में नकद 25 लाख और 30 लाख के गहने जल गए’
उन्होंने आगे कहा, “मेरे बच्चों की किताबें, लैपटॉप और खिलौने, हमारी डिग्रियां, संपत्ति के दस्तावेज और घरेलू उपकरण सब नष्ट हो गए. घर में करीब 25 लाख रुपये नकद और 30 लाख रुपये के गहने थे. सब कुछ जलकर राख हो गया.” टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस आग ने एक बड़ी खामी को उजागर कर दिया है. करोड़ों रुपये की इस आवासीय परिसर में लगभग किसी ने भी फ्लैटों का बीमा नहीं कराया था. प्रभावित परिवारों में से सिर्फ एक मकान मालिक, जो कि एक सरकारी अधिकारी हैं, उन्हीं के पास ही आग से होने वाले नुकसान को कवर करने वाला इंश्योरेंस था.

सोसायटी के पास 300 करोड़ रुपये का बीमा कवर
आरडब्ल्यूए प्रभावित परिवारों के लिए धन जुटा रहा है. हालांकि, इस घटना ने अपार्टमेंट मालिकों के बीच फैली इस गलत धारणा को उजागर कर दिया है कि सोसायटी का इंश्योरेंस व्यक्तिगत घरों की सुरक्षा करता है. आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राजीव वाधवान ने बताया कि सोसायटी के पास 300 करोड़ रुपये का बीमा कवर है, जो भूकंप, बाढ़ या किसी अन्य ऐसी आपदा की स्थिति में बिल्डिंग के स्ट्रक्चर में होने वाले नुकसान को कवर करता है.उन्होंने कहा, “आग लगने से इमारत को संरचनात्मक क्षति नहीं होती, इसलिए यह इस बीमा के अंतर्गत नहीं आता.”

एक साल पहले ढाई करोड़ में खरीदा था फ्लैट
इसके अलावा, सोसायटी बीमा केवल पब्लिक एरिया को कवर करता है. व्यक्तिगत फ्लैट, इंटीरियर डिजाइनिंग और निजी सामान की जिम्मेदारी मकान मालिकों की ही रहती है. यह अंतर अक्सर किसी आपदा के बाद ही स्पष्ट होता है. राघव ने लगभग एक साल पहले ही लगभग 2.5 करोड़ रुपये में फ्लैट खरीदा था और उसमें रहने आया था. आज, वह घर और कीमती सामान को हुए कुल नुकसान का अनुमान 1.5 करोड़ रुपये से अधिक लगाता है. जब उनसे होम इंश्योरेंस न कराने का कारण पूछा गया, तो राघव ने जवाब दिया, “कौन सोचता है कि एक दिन उसका घर जल जाएगा?”

भारत गृह रक्षा पॉलिसी में क्या-क्या होता है कवर
आपको बता दें कि भारत गृह रक्षा पॉलिसी सबसे आम प्रोडक्ट है, जो हर बीमा कंपनी देती है. इस इंश्योरेंस में आग और संबंधित आपदाओं से होने वाले घरों के नुकसान को कवर मिलता है. यह पॉलिसी घर के स्ट्रक्चर, घरेलू सामान या दोनों का बीमा कराया जा सकता है. यह घर की दीवारों, फर्श, बिजली के तारों, प्लंबिंग और संलग्न फिटिंग की सुरक्षा करता है.

मेन रेजीडेंस के अलावा क्या होते हैं कवर
मुख्य आवासीय इकाई के अलावा, इसे गैरेज, बरामदे, चारदीवारी, रिटेनिंग दीवार, पार्किंग क्षेत्र, सौर पैनल, पानी की टंकी, आंतरिक सड़कों और संपत्ति के भीतर लगे स्थायी फिटिंग तक बढ़ाया जा सकता है. आग, विस्फोट, बिजली गिरने, भूकंप, तूफान, बाढ़, भूस्खलन, दंगा, जानबूझकर की गई क्षति, आतंकवाद, पानी की टंकी का ओवरफ्लो होना, स्प्रिंकलर लीकेज और चोरी से होने वाले नुकसान इस पॉलिसी के अंतर्गत आते हैं. यदि ऊपर बताए गए किसी भी कारण से घर अस्थायी रूप से रहने योग्य नहीं रह जाता है, तो पॉलिसी किराये की आय के नुकसान की भरपाई कर सकती है या वैकल्पिक आवास के लिए किराया कवर कर सकती है.



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