अयोध्या में कहीं राजा तो कहीं स्त्री रूप में पूजे जाते हैं हनुमान जी, जानिए सच
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अयोध्या केवल भगवान राम की नगरी ही नहीं, बल्कि हनुमान जी के अद्भुत और दुर्लभ स्वरूपों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां काले राम मंदिर में हनुमान जी स्त्री रूप में विराजमान हैं, जबकि हनुमानगढ़ी में उन्हें राजा स्वरूप में पूजा जाता है. इन अनोखी मान्यताओं और कथाओं के कारण देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं.
देशभर में बेहद दुर्लभ माने जाने वाले इस मंदिर में भक्त हनुमान जी का श्रृंगार ठीक वैसे ही करते हैं, जैसे किसी देवी का किया जाता है. मान्यता है कि इस रूप में हनुमान जी के दर्शन करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर हो जाती हैं. यही वजह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी समस्याओं के समाधान और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं.

अयोध्या में हनुमान जी के इन विभिन्न रूपों के पीछे गहरी धार्मिक मान्यताएं और कथाएं जुड़ी हुई हैं. स्त्री रूप में विराजमान हनुमान जी को शक्ति और करुणा का प्रतीक माना जाता है, वहीं राजा स्वरूप में वे सुरक्षा, बल और संरक्षण का संदेश देते हैं. यही कारण है कि उनके हर रूप की पूजा का अलग महत्व है और भक्त मानते हैं कि प्रत्येक स्वरूप अलग-अलग मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है.

अयोध्या में हनुमान जी कहीं राजा के रूप में पूजे जाते हैं, तो कहीं स्त्री स्वरूप में उनकी आराधना की जाती है. यही धार्मिक विविधता अयोध्या को आस्था के दृष्टिकोण से और भी खास बनाती है. अयोध्या स्थित काले राम मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां हनुमान जी स्त्री रूप में विराजमान हैं.
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मंदिर के महंत के अनुसार धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि अहिरावण वध के समय हनुमान जी ने स्त्री रूप धारण किया था. कथा के मुताबिक, अहिरावण भगवान राम और लक्ष्मण का हरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया था, जहां वह उनकी बलि देवी के सामने देने वाला था. ऐसे संकट में हनुमान जी ही एकमात्र देवता थे जो पाताल लोक तक पहुंचे. वहां उन्होंने देवी का रूप धारण कर अहिरावण का वध किया और भगवान राम-लक्ष्मण को सुरक्षित वापस लेकर आए. यही वजह है कि इस मंदिर में हनुमान जी की पूजा स्त्री स्वरूप में की जाती है.

हनुमानगढ़ी में दर्शन करने वाले भक्तों का विश्वास है कि मात्र एक झलक से ही उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. यहां रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंचकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं. मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आरती का आयोजन किया जाता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से भर देता है.

अगर आप परिवार के साथ अयोध्या नहीं जा पा रहे हैं, तो भी इन पवित्र स्थलों का श्रद्धा और स्मरण के साथ ध्यान करना आध्यात्मिक शांति प्रदान कर सकता है. मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए दर्शन और भक्ति, चाहे घर बैठे ही क्यों न हो, भगवान तक अवश्य पहुंचती है.

इतना ही नहीं, इस मंदिर में हनुमान जी महाराज के विराजमान होने की कथा भी विशेष मानी जाती है. करीब 2000 वर्ष पुरानी मानी जाने वाली हनुमान जी की यह अद्भुत प्रतिमा अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां हनुमान जी को साड़ी पहनाई जाती है और उनका श्रृंगार स्त्री स्वरूप में किया जाता है, जो भक्तों की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

दूसरी ओर, अयोध्या का प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर हनुमान जी के राजा स्वरूप के लिए जाना जाता है. यहां बजरंगबली को अयोध्या का रक्षक माना जाता है. मान्यता है कि हनुमान जी की अनुमति के बिना कोई भी भगवान राम के दर्शन नहीं कर सकता. इस मंदिर में हनुमान जी राजसी ठाठ-बाट के साथ विराजमान हैं और उनकी पूजा भी उसी भाव और श्रद्धा के साथ की जाती है.