अयोध्या में पहले हनुमानगढ़ी फिर रामलला के दर्शन, क्या है इसके पीछे धार्मिक मान्यता

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अयोध्या में पहले हनुमानगढ़ी फिर रामलला के दर्शन, क्या है इसके पीछे धार्मिक मान्यता


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अयोध्या में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार रामलला के दर्शन से पहले भक्त हनुमानगढ़ी जाकर बजरंगबली का आशीर्वाद लेते हैं. मान्यता है कि हनुमान जी अयोध्या के रक्षक और श्रीराम के द्वारपाल हैं, इसलिए उनकी अनुमति के बिना प्रभु राम के दर्शन पूर्ण नहीं माने जाते.

अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में सदियों पुरानी एक ऐसी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जाती है, जिसके अनुसार भगवान श्रीराम के दर्शन से पहले भक्तों को हनुमानगढ़ी पहुंचकर बजरंगबली का दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है. मान्यता है कि हनुमान जी की अनुमति और कृपा के बिना प्रभु श्रीराम के दर्शन पूर्ण फल नहीं देते. यही कारण है कि अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालु सबसे पहले हनुमानगढ़ी जाकर माथा टेकते हैं और उसके बाद रामलला के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं. धार्मिक विद्वान वरुण दास बताते हैं कि हनुमान जी केवल भगवान राम के परम भक्त ही नहीं बल्कि अयोध्या के रक्षक भी माने जाते हैं. शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जहां भी प्रभु श्रीराम का स्मरण होता है, वहां हनुमान जी अवश्य उपस्थित रहते हैं. यही वजह है कि अयोध्या में पहले हनुमान जी के दर्शन की परंपरा बनाई गई. यह केवल धार्मिक नियम नहीं बल्कि भक्त और भगवान के बीच प्रेम, समर्पण और सेवा का प्रतीक भी है. हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध चौपाई “राम द्वारे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे” भी इसी परंपरा को स्पष्ट करती है. इसका अर्थ है कि हनुमान जी स्वयं श्रीराम के द्वार के रक्षक हैं और उनकी आज्ञा के बिना कोई भी प्रभु तक नहीं पहुंच सकता, इसलिए भक्त पहले बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं फिर रामलला के दर्शन करते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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