चित्रकूट की दीवारों पर दिखेगी बुंदेलखंड की संस्कृति, पर्यटक होंगे आकर्षित
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Chitrakoot News: धर्म नगरी चित्रकूट को अब पेंटिंग के जरिए सजाया जा रहा है. शहर की प्रमुख दीवारों और फ्लाईओवरों को बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान से सजाया जा रहा है. इस परियोजना के तहत लगभग 10 लाख रुपये की लागत से शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बुंदेली लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, लोक जीवन और क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को पेंटिंग्स के माध्यम से उकेरा जा रहा है.
चित्रकूट: धर्म नगरी चित्रकूट प्रभु श्रीराम की तपोस्थली के रूप में देशभर में प्रसिद्ध है. यहां हर दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन और धार्मिक पर्यटन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन एक समय अपनी सांस्कृतिक विरासत और लोक कलाओं के लिए पहचान रखने वाला बुंदेलखंड अब धीरे-धीरे अपनी पारंपरिक कलाओं को खोता जा रहा है. बदलते समय के साथ बुंदेली लोक संस्कृति, लोक नृत्य और पारंपरिक चित्रकला का दायरा सीमित होता जा रहा था. ऐसे में अब चित्रकूट प्रशासन ने इन लोक कलाओं को फिर से जीवित करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू की है.
बता दें कि चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की पहल पर शहर की प्रमुख दीवारों और फ्लाईओवरों को बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान से सजाया जा रहा है. इस परियोजना के तहत लगभग 10 लाख रुपये की लागत से शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बुंदेली लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, लोक जीवन और क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को पेंटिंग्स के माध्यम से उकेरा जा रहा है. इसका मकसद न सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ाना है, बल्कि आने वाले पर्यटकों को बुंदेलखंड की समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराना है. शहर के ट्रैफिक चौराहे के ब्रिज, शंख चौराहा और अन्य प्रमुख स्थानों की दीवारों पर कलाकारों की ओर से रंग-बिरंगी थीम आधारित पेंटिंग बनाई जा रही है.
पर्यटन के लिहाज से नई पहचान
इस संबंध में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि चित्रकूट विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से इस परियोजना को कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शहर की दीवारों को केवल रंगने का उद्देश्य नहीं है, बल्कि इसके जरिए बुंदेलखंड की खोती हुई सांस्कृतिक विरासत को नया मंच देना है. उन्होंने बताया कि कर्वी-पहाड़ी मार्ग पर स्थित फ्लाईओवर को विशेष थीम आधारित पेंटिंग्स से नया रूप दिया गया है, जिस पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. वहीं पर्यटन के लिहाज से भी यह पहल चित्रकूट को एक नई पहचान देने का काम करेगी.
इन लोगों पर होगी कार्रवाई
उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि चित्रकूट आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक केवल धार्मिक स्थलों के ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की जीवंत कला और संस्कृति के भी दर्शन कर सकेंगे. उनका मानना है कि इस पहल से बुंदेली लोक कलाओं को देश और विदेश तक नई पहचान फिर से मिल सकती है. जो कलाकार इनको बना रहे हैं, उनको भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा. उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति इन पेंटिंग को गुटखा खाकर गंदा करने का प्रयास करेगा तो उस पर कार्रवाई होगी.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.