खेत से मंडी तक बिल्कुल हरी और ताजा रहेगी तोरई! किसान अपनाएं ये ट्रिक, मिलेंगे अच्छे दाम
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Tori Farming Tips in Summer: यूपी में पड़ रही भीषण गर्मी अब किसानों की मेहनत पर भारी पड़ने लगी है. तेज धूप और लू की वजह से तोरई जैसी बेल वाली सब्जियां खेत से मंडी पहुंचने से पहले ही मुरझाने लगती हैं, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. लेकिन कुछ आसान उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल को लंबे समय तक ताजा रख सकते हैं और बाजार में अच्छे दाम भी पा सकते हैं. आइए जानते हैं क्या है वो जरूरी टिप्स.
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. इस चिलचिलाती धूप और लू का सीधा असर खेतों में खड़ी सब्जियों पर पड़ रहा है. विशेष रूप से तोरई जैसी संवेदनशील बेलों वाली फसलों में नमी बहुत तेजी से कम होती है. अगर इस मौसम में फसलों की सही देखभाल और प्रबंधन न किया जाए, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि तोरई की तुड़ाई के लिए समय का चयन सबसे महत्वपूर्ण कदम है. दोपहर के समय तापमान अत्यधिक होता है, जिससे पौधों में पानी का वाष्पीकरण बढ़ जाता है. अगर इस समय तुड़ाई की जाएगी तो तोरई तुरंत मुरझा जाएगी. किसानों को चाहिए कि हमेशा सुबह सूर्योदय से पहले या फिर शाम को सूर्यास्त के समय ही फसलों की तुड़ाई करें. इस ठंडे समय में सब्जियां पूरी तरह ताजा और रसीली बनी रहती हैं.

खेत से तोरई तोड़ने के बाद अक्सर किसान उन्हें खुले आसमान के नीचे ही छोड़ देते हैं. यह लापरवाही तोरई की गुणवत्ता को पूरी तरह नष्ट कर देती है. तेज धूप के संपर्क में आते ही तोरई का छिलका कड़ा होने लगता है और उसका आंतरिक जल सूख जाता है. तुड़ाई के तुरंत बाद सभी तोरई को किसी पेड़ की घनी छाया या अस्थाई छप्पर के नीचे इकट्ठा करना चाहिए ताकि उनका तापमान सामान्य रहे.
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सब्जियों को बाजार ले जाने से पहले उनका सही भंडारण बेहद जरूरी है. इसके लिए किसानों को अपने खेत या घर के पास एक ठंडे और हवादार छायादार स्थान का चयन करना चाहिए. इस स्थान पर सीधी धूप या गर्म हवाओं का प्रवेश नहीं होना चाहिए. छाया में रखने से सब्जियों की ताजगी लंबे समय तक बरकरार रहती है और वे सड़ने से बची रहती हैं.

तोरई में लगभग 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जो गर्मी में तेजी से उड़ता है. इसे रोकने के लिए पारंपरिक और सबसे प्रभावी तरीका है जूट की बोरियों का उपयोग करना चाहिए. किसान जूट की बोरियों को साफ पानी में भिगोकर तोरई के ढेरों को अच्छी तरह ढक दें. यह बोरियां एक प्राकृतिक कूलर की तरह काम करती हैं और आसपास के वातावरण में नमी बनाए रखती हैं.

खेत से मंडी तक का सफर सब्जियों की किस्मत तय करता है. अक्सर देखा जाता है कि परिवहन के दौरान गर्म हवाओं के थपेड़ों से तोरई पूरी तरह सूख जाती है. बाजार ले जाते समय ट्रैक्टर या पिकअप में तोरई को लोड करने के बाद ऊपर से गीली बोरियों की मोटी परत जरूर लगानी चाहिए. इससे रास्ते की धूल-मिट्टी और गर्म लू से फसल पूरी तरह सुरक्षित और फ्रेश बनी रहती है.

मंडी में व्यापारी और ग्राहक सबसे पहले सब्जी के रंग-रूप और ताजगी को देखते हैं. जो तोरई हरी, चमकदार और कड़क दिखती है, उसकी मांग सबसे ज्यादा होती है. इसके विपरीत, मुरझाई और पीली पड़ी तोरई को कोई खरीदना नहीं चाहता है. सही रख-रखाव के कारण जब किसान अपनी हरी-भरी तोरई लेकर बाजार पहुंचते हैं, तो खरीदार बिना किसी मोलभाव के उन्हें हाथों-हाथ ऊंचे दामों पर खरीद लेते हैं.

सब्जी की खेती में केवल बंपर उत्पादन ही काफी नहीं है, बल्कि उसका सही मार्केटिंग भी जरूरी है. गर्मी के इस मौसम में यदि किसान इन छोटी-छोटी बातों जैसे सही समय पर तुड़ाई, छाया में भंडारण और गीली बोरियों के उपयोग का ध्यान रखते हैं, तो उनकी फसल की बर्बादी शून्य हो जाएगी. बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में उन्हें अपनी फसल के बेहतरीन दाम मिलेंगे, जिससे उनकी आमदनी में सीधे तौर पर इजाफा होगा.