क्या होते हैं ‘लक्खी मेले’? बनारस की सदियों पुरानी परंपरा की रोचक कहानी

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क्या होते हैं ‘लक्खी मेले’? बनारस की सदियों पुरानी परंपरा की रोचक कहानी


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धर्म और अध्यात्म की नगरी वाराणसी अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. यहां आयोजित होने वाले ‘लक्खी मेले’ सदियों पुरानी विरासत का हिस्सा हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु बिना किसी निमंत्रण के शामिल होते हैं. रथयात्रा से शुरू होकर देव दीपावली तक चलने वाले ये मेले काशी की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखते हैं.

वाराणसी: धर्म अध्यात्म का शहर बनारस अपनी परंपराओं के लिए दुनियाभर में फेमस है. इसी बनारस शहर में अलग-अलग मेले होते हैं. इनमें कुछ मेला ‘लक्खी मेले’ में शुमार है. इनमें कई मेले ऐसे हैं, जिसमें राजशाही ठाट-बाट भी देखने को मिलता है. इन मेलों की शुरुआत काशी के रथयात्रा मेले से होती है. इसी मेले से काशी में त्योहारों का आगाज होता है.

डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री ऑफ आर्ट बीएचयू की प्रोफेसर ज्योति रोहिल्ला राणा ने बताया कि काशी में कुल 5 लक्खी मेला होता है. रथयात्रा मेले से इसकी शुरुआत होती है. इसके अलावा नाग नथैया, नाटी इमली का भरत मिलाप, चेतगंज की नक्कटैया, लोटा भंटा मेला और देव दीपावली शामिल हैं.

प्रोफेसर ज्योति रोहिल्ला राणा ने बताया कि पुराने समय में जब एक मेले में लाखों लोगों की भीड़ होती है, तो उसे लक्खा या लक्खी मेला कहा जाता है. इनमें कई मेले ऐसे हैं, जो सैकड़ो साल पुराने हैं. इसमें रथयात्रा मेला भी है जो जगन्नाथ पुरी के तर्ज पर होता है.

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जगन्नाथ रथयात्रा में तीन दिनों के मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ होती है. 17वीं शताब्दी के अंत में इसकी शुरुआत हुई थी. हालांकि उस वक्त उसका स्वरूप छोटा था, लेकिन कुछ साल बाद इसमें लाखों की भीड़ होने लगी.

हालांकि वर्तमान समय में अब इसका स्वरूप फिर बदल गया है, लेकिन फिर भी यहां 3 दिनों के मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जरूर होती है.

इसके अलावा नाटी इमली के भरत मिलाप और अस्सी के नाग नथैया भी लक्खा मेले में शुमार है. 5 मिनट की इस लीला को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु बिना किसी आमंत्रण के यहां जुट जाते हैं.

बड़ी बात ये भी है कि काशी नरेश भी आज भी मेले में शामिल होते हैं, वो भी पूरे शाही ठाट बाट में. इसके अलावा देव दीपावली भी बीते कुछ दशक पहले लक्खी मेले में शामिल हो चुका है. आज देव दीपावली को देखने के लिए न सिर्फ देश, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों से लोग यहां आते हैं.

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