ऊर्जा मंत्री एके शर्मा UPPCL चेयरमैन के बीच अनबन चल रही? इन 4 सवालों से समझिए
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AK Sharma vs UPPCL Chairman Ashish Goel : यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के UPPCL चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल को लिखे पत्र में बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. कर्मचारियों पर एक्शन, तूफान के दौरान प्रबंधन और 10% सरचार्ज जैसे मुद्दों पर मंत्री ने उनसे जवाब मांगा है. शर्मा सरकार के सीनियर मंत्रियों में गिने जाते हैं और ऊर्जा विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, ऐसे में मामला और चर्चा का विषय बन गया है. आने वाले दिनों में UPPCL की ओर से दिए जाने वाले जवाब और सरकार की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है.
मंत्री एके शर्मा के पत्र से क्यों उठे यूपीपीसीएल में अनबन के सवाल?
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा द्वारा UPPCL चेयरमैन वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष कुमार गोयल को लिखा गया एक पत्र अब चर्चा का विषय बन गया है. 2 जून 2026 को लिखे गए इस पत्र में मंत्री ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई, तूफान के दौरान प्रबंधन और ग्राहकों उपभोक्ताओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत सरचार्ज को लेकर कई कड़े सवाल उठाए हैं. इस पत्र की भाषा और उसमें उठाए गए मुद्दों पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या ऊर्जा मंत्री और UPPCL के के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा? क्योंकि ऊर्जा मंत्री की तरफ से पूछे गए सवाल बिजली विभाग के भीतर चल रही उठापटक की तरफ इशारा तो जरूर करते हैं.
सवाल नंबर 1 : क्या कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा कार्रवाई हो रही है?
मंत्री ने पत्र में लिखा है कि मेरे पिछले 7 पत्रों को परखिए, जो विद्युत तंत्र में अनुभवी कुशल कर्मचारियों को निकालकर जाति/धर्म आधारित अथवा भ्रष्टाचार के तहत अन्य कर्मियों की नियुक्ति पर कार्यवाही को लेकर था. साथ ही यह भी संज्ञान में लाया गया था कि लंबे समय से काम कर रहे कुशल लोगों को हटाकर मनमाने ढंग से मनचाहे एवं अकुशल लोगों को भर्ती की जा रही है. मेरे बार-बार पत्र लिखने एवं मना करने के बाद भी कुशल कर्मचारियो को छटनी बंद नहीं हुई, जिसके परिणाम आज भुगतने पड़ रहे हैं. इस संबंध में हाल में अंकुर सैनी, मंडल उपाध्यक्ष सहारनपुर के पत्र दिनांक 1 मई 2026 द्वारा भी संज्ञान में लाया गया है कि सहारनपुर जनपद के बेहट डिविजन में 15 साल से काम कर रहे लाइनमैन सुन्दर सैनी को हटाकर नए लाईनमैन को रख लिया गया है. इसकी जांच कराकर उचित कार्यवाही की जाए. मेरे पुराने पत्रों समेत इस पत्र की मूल भावना यह है कि गैर जरूरी और एक अभियान के तहत हजारों कुशल कर्मियों को निकाल देना किसी व्यवस्था के लिए तकनीकी प्रशासनिक या राजनीतिक रूप से समस्या का कारण बनेगा और शायद बन चुका है.
सवाल नंबर 2 : अच्छे कर्मचारियों पर भी कार्रवाई क्यों?
अपने लैटर में मंत्री ने अगला सवाल उठाते हुए लिखा है कि गर्मी के चैलेंजिंग टाइम में बहुत विद्युत कर्मियों ने पूरी निष्ठा से काम किया है, लेकिन कुछ कर्मियों ने जानबूझकर या लापरवाह होकर कार्य करते हुए सरकार को बदनाम किया है. ऐसे कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाय एवं मौजूदा ट्रांसफर सीजन में इनका योग्यतानुसार तबादला किया जाए.
सवाल नंबर 3: तूफान के दौरान समीक्षा बैठक क्यों नहीं हुई?
उन्होंने आगे लिखा है कि मई में आए भीषण तूफान से प्रदेश के कई जिलों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई थी. 30 मई को समीक्षा बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन उन्हें जानकारी मिली कि कुछ सीनियर अधिकारी मुख्यालय से बाहर थे. मंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि संकट के हालात में वरिष्ठ अधिकारियों की गैरहाजिरी कैसे स्वीकार्य हो सकती है.
सवाल नंबर 4 : 10% सरचार्ज लगाने से पहले मंत्री को जानकारी क्यों नहीं दी गई?
पत्र का सबसे चर्चित हिस्सा Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) से जुड़ा है. UPPCL ने जून 2026 के बिलों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज वसूलने का निर्णय लिया था. मंत्री ने लिखा कि उन्हें इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली और सरकार के खिलाफ नेगेटिव बाढ़ सी आ गई. उन्होंने सवाल उठाया कि इतना अहम फैसला लेने से पहले विभागीय मंत्री को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया. मंत्री ने पूछा कि क्या ऐसी जानकारी पहले साझा करना जरूरी नहीं था?
कुल मिलाकर पत्र में उठाए गए लगभग सभी मुद्दे सीधे तौर पर बिजली ग्राहकों से जुड़े हैं. अगर बड़ी संख्या में कर्मचारियों को हटाया जाता है तो फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की कमी से फॉल्ट सुधारने और बिजली आपूर्ति बहाल करने में देरी हो सकती है. वहीं एक्स्ट्रा सरचार्ज का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है. यही वजह है कि मंत्री ने प्रशासनिक फैसलों, सरकार की छवि खराब होने के साथ-साथ ग्राहकों के हितों को केंद्र में रखते हुए ये सवाल उठाए.
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I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…और पढ़ें