किसानों के लिए हरा खजाना है कटहल, ये शानदार प्रजाति बना देगी मालामाल, जानें तरीका
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Best Jackfruit Varieties: प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार कटहल की अलग-अलग प्रजातियों का उपयोग भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है. कुछ किस्में खास तौर पर सब्जी के लिए उपयुक्त होती है, जबकि कुछ की पकी फलियां खाने में बेहद स्वादिष्ट मानी जाती है. उन्होंने बताया कि कलमी पौधे आमतौर पर 3 से 4 वर्ष में फल देना शुरू कर देते है, जबकि बीज से तैयार पौधों में फल आने में 5 से 6 वर्ष लग सकते है.
Jackfruit cultivation: बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच अब किसान ऐसे फलों और पेड़ों की तलाश में है जो कम खर्च में लंबे समय तक बेहतर आमदनी दे सके. कटहल का पेड़ ऐसा ही बहुउपयोगी पेड़ है, जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हरा खजाना कहा जाता है. कच्चे कटहल से स्वादिष्ट सब्जी बनती है, पका फल बेहद मीठा होता है और इसके बीज भी बेहद उपयोगी है. बीजों की सब्जी और अन्य व्यंजन खूब पसंद किए जाते है, जबकि गांवों में लोग इसके बीज को भूनकर भी खाते है. यही कारण है कि इसे गरीबों का बादाम कहा जाता है. कटहल की सालभर बनी रहने वाली मांग किसानों को अच्छी आमदनी देती है.
श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार कटहल की अलग-अलग प्रजातियों का उपयोग भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है. कुछ किस्में खास तौर पर सब्जी के लिए उपयुक्त होती है, जबकि कुछ की पकी फलियां खाने में बेहद स्वादिष्ट मानी जाती है. उन्होंने बताया कि कलमी पौधे आमतौर पर 3 से 4 वर्ष में फल देना शुरू कर देते है, जबकि बीज से तैयार पौधों में फल आने में 5 से 6 वर्ष लग सकते है.
कई किसान शिकायत करते है कि पेड़ तो अच्छा बढ़ गया है, लेकिन फल बहुत कम लग रहे है या बिल्कुल नहीं आ रहे. प्रो. सिंह के अनुसार इसका मुख्य कारण पौधों में पोषक तत्वों की कमी है. इसे दूर करने के लिए पहली बारिश के बाद पेड़ के चारों ओर अच्छी तरह निराई-गुड़ाई करनी चाहिए. यदि पौधा लगभग 5 वर्ष का हो चुका है, तो उसमें कम से कम 2 टोकरी गोबर की सड़ी खाद या कंपोस्ट अवश्य डालनी चाहिए.
इसके साथ ही लगभग 500 ग्राम अमोनियम फास्फेट 200 ग्राम यूरिया और उपलब्ध होने पर 4 से 5 किलोग्राम मछली या हड्डी का चूर्ण मिट्टी में मिलाया जा सकता है. इसके बाद सिंचाई करने से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है और फलन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है. जिन पेड़ों पर फल नहीं लग रहे हैं, उनमें भी ये उपाय अपनाने से अगले सीजन में फूल और फल आने की संभावना काफी बढ़ जाती है. इसके अलावा, नवंबर माह के आसपास 2% बोरिक एसिड घोल का छिड़काव करने से फल झड़ने और खराब होने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है.
प्रो. सिंह का कहना है कि सही पोषण, समय पर देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान कटहल की खेती को स्थायी आय का मजबूत साधन बना सकते है. एक बार लगाया गया कटहल का पेड़ कई वर्षों तक लगातार फल देता रहता है. यानी एक बार पौधा लगाइए और सालों तक आमदनी पाइए.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें