खस के तेल का कारोबार मुनाफे का सुपरहिट फॉर्मूला, जानें डिस्टिलेशन प्लांट से कमाई का गणित
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छोटे या मध्यम स्तर का खस तेल डिस्टिलेशन प्लांट लगाने के लिए लगभग 1,000 से 1,500 वर्ग फीट जगह पर्याप्त होती है. इस स्थान पर मशीनों की स्थापना के साथ-साथ कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण का कार्य आसानी से किया जा सकता है.
सीतामढ़ी: खस (वेटिवर) की खेती के बाद अब उसकी जड़ों से सुगंधित और कीमती तेल निकालने का कारोबार किसानों और उद्यमियों के लिए आय का नया और लाभदायक जरिया बनता जा रहा है. खस के तेल की देश और विदेश में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए अब कई लोग डिस्टिलेशन प्लांट लगाकर इस व्यवसाय से अच्छी कमाई कर रहे हैं. खास बात यह है कि इस प्लांट को लगाने के लिए बहुत अधिक जमीन की आवश्यकता नहीं होती और सीमित जगह में भी इसे आसानी से स्थापित किया जा सकता है. जानकारों के अनुसार, छोटे या मध्यम स्तर का खस तेल डिस्टिलेशन प्लांट लगाने के लिए लगभग 1,000 से 1,500 वर्ग फीट जगह पर्याप्त होती है. इस स्थान पर मशीनों की स्थापना के साथ-साथ कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण का कार्य आसानी से किया जा सकता है.
प्लांट लगाने में कितना आता है खर्च?
खस तेल डिस्टिलेशन प्लांट की लागत समय के साथ बढ़ी है. वर्ष 2015 के आसपास इस प्लांट को कैरिज और अन्य जरूरी उपकरणों सहित स्थापित करने में करीब 8 लाख रुपये का खर्च आता था. लेकिन बढ़ती महंगाई, मशीनों की कीमत और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण अब इस प्लांट को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 12 लाख रुपये तक का निवेश करना पड़ता है. इस प्लांट में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश मशीनें उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में तैयार की जाती हैं. ऑर्डर मिलने के बाद इन मशीनों का निर्माण किया जाता है और फिर कन्नौज सहित अन्य स्थानों के जरिए इन्हें देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया जाता है.
लंबी प्रक्रिया के बाद निकलता है कीमती तेल
खस की जड़ों से तेल निकालने की प्रक्रिया काफी तकनीकी और समय लेने वाली होती है. यह ऐसा काम नहीं है जो कुछ घंटों में पूरा हो जाए. प्लांट की क्षमता के अनुसार मशीन को लगातार करीब 100 घंटे तक चलाना पड़ता है. इस दौरान भाप और डिस्टिलेशन तकनीक की मदद से खस की जड़ों से धीरे-धीरे तेल निकाला जाता है.
शुद्ध और सुगंधित खस का तेल
जब एक चरण की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तब मशीन को लगभग 10 घंटे तक ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है. इसके बाद नई खस की जड़ों को मशीन में भरने और अगली प्रक्रिया शुरू करने में करीब 10 घंटे का समय और लगता है. इस तरह एक चक्र पूरा होने और दूसरा चक्र शुरू होने के बीच कुल मिलाकर लगभग 150 घंटे का समय लग जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के बाद एक बार में लगभग 8 से 10 किलोग्राम शुद्ध और सुगंधित खस का तेल प्राप्त होता है.
बाजार में रहती है भारी मांग
खस का तेल अपनी प्राकृतिक सुगंध और औषधीय गुणों के कारण बाजार में काफी महंगा बिकता है. इसका उपयोग इत्र, परफ्यूम, कॉस्मेटिक उत्पाद, अरोमा थेरेपी, आयुर्वेदिक दवाओं और कई अन्य उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है. यही वजह है कि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान खस की खेती के साथ डिस्टिलेशन यूनिट भी स्थापित करें, तो वे कच्चा माल बेचने के बजाय तैयार उत्पाद बेचकर कई गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. इससे खेती के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
किसानों बनेंगे आत्मनिर्भर
खस तेल डिस्टिलेशन प्लांट आज किसानों और उद्यमियों के लिए एक ऐसा व्यवसाय बनकर उभर रहा है. इसमें शुरुआती निवेश के बाद लंबे समय तक बेहतर आय की संभावना है. बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य को देखते हुए यह कारोबार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें