कांग्रेस का बिहार के बाद यूपी चुनाव में सीट शेयरिंग पर बखेड़ा शुरू

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कांग्रेस का बिहार के बाद यूपी चुनाव में सीट शेयरिंग पर बखेड़ा शुरू


लखनऊ: उत्तर विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस ने गठबंधन सहयोगी के साथ सीट शेयरिंग के मसले पर बखेड़ा खड़ा करना शुरू कर दिया है. चुनाव को लेकर अभी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन का औपचारिक ऐलान भी नहीं हुआ है, उससे पहले ही दोनों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर सिर फुटव्वल चालू है. हमेशा की तरह कांग्रेस ने गठबंधन में ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए सहयोगी दलों पर प्रेशर पॉलिटिक्स की नीति पर चल पड़े हैं.

यूपी चुनाव 2027 में कांग्रेस ने सपा से कहा- ‘हम हैं बड़ी पार्टी’

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की तरफ से प्रभारी बनाए गए राजेंद्र गौतम ने सोमवार को आगामी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर सवाल पूछे गए. इसपर उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है. कांग्रेस के नेतृत्व में ही आजादी मिली, फिर देश का निर्माण हुआ. मौजूदा वक्त में कांग्रेस ही इकलौती ऐसी पार्टी के जो बीजेपी का मुकाबला कर सकती है. क्षेत्रीय पार्टियों में कांग्रेस का मुकाबला करने की ताकत नहीं है. राजेंद्र गौतम ने कांग्रेस को बड़ा भाई बताते हुए कहा कि यूपी में सीटों में बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रीय पार्टी हैं, हम यूपी में बराबर के साझेदार हैं. इसलिए हिस्सेदारी और सम्मान बराबर का होना चाहिए.

बसपा के बहाने मायावती का नाम लेकर सपा पर प्रेशर बनाने की नीति

इतना ही नहीं, राजेंद्र गौतम ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर दबाव बनाने के लिए मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ गठबंधन के भी संकेत दिए. मायावती के साथ गठबंधन के सवाल पर उन्होंने साफ तौर से कहा कि वह हर किसी से मिलेंगे. साथ ही यह भी कहा कि जो भी देश का संविधान बचाना चाहते हैं तो उन्हें एक मंच पर आना चाहिए. गौर करने वाली बात यह है कि राजेंद्र गौतम वो नेता हैं जो पिछले ही महीने बिना किसी पूर्व सूचना के सांसद तनुज पुनिया के साथ मायावती के घर उनसे मिलने पहुंचे थे. हालांकि मायावती ने उन्हें मिलने नहीं दिया था, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था. उस दौरान भी चर्चा उड़ी थी कि राजेंद्र और तनुज गठबंधन का प्रस्ताव लेकर मायावती के पास पहुंचे थे. अब राजेंद्र गौतम को ही यूपी का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया है.
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट कर कहा था कि इस बार के यूपी चुनाव में वह ज्यादा से ज्यादा ब्राह्मणों को टिकट दे रही हैं. उनके इस फैसले से समाजवादी पार्टी परेशान होगी. अक्सर कांग्रेस पर आक्रामक रहने वाली मायावती पिछले कुछ समय से चुप्पी साधे हुए हैं. वह केवल समाजवादी पार्टी को ही निशाने पर ले रही हैं.

सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग में खटपट करना कांग्रेस की पुरानी आदत

2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस भले ही देशभर में सिमटती जा रही है, लेकिन राज्यों या केंद्र के चुनावों में सीट शेयरिंग के समय बखेड़ा खड़ा करना इस पार्टी की आदत बन गई है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की ओर से बिहार में एसआईआर के मुद्दे पर निकाली गई यात्रा में सहयोगी आरजेडी और तेजस्वी यादव ने उनका पूरा सहयोग दिया था. दोनों नेता की जुगलबंदी देखने को मिल रही थी. लेकिन जब चुनाव नजदीक आया तो कांग्रेस की ओर से बिहार प्रभारी बनाए गए कृष्णा अल्लावरु नॉमिनेशन के डेट निकलने तक आरजेडी और इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं कर पाए. कांग्रेस की राजनीतिक हैसियत को देखते हुए आरजेडी उन्हें 45-50 से ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं थी. दूसरी तरफ कृष्णा अल्लावरु कांग्रेस को 71 से ज्यादा सीटें दिलाने पर अड़े रहे. हालांकि अंत में कांग्रेस 61 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार पाई, जिसमें सात सीटों पर गठबंधन के सहयोगियों के साथ फ्रेंडली फाइट करती दिखी.

इस वजह से बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन या महागठबंधन के बीच सात सीटों पर फ्रेंडली मुकाबला देखने को मिला. एनडीए गठबंधन ने इसी बात को पूरे चुनाव के दौरान प्रचारित किया और कहा कि ये लोग सीट शेयरिंग तक तो कर नहीं पाए, तो भला सरकार में आ गए तो हर रोज झगड़ा करेंगे.

बिहार चुनाव 2025 में इन सात सीटों पर इंडिया अलायंस के बीच फ्रेंडली फाइट

  • वैशाली : यहां आरजेडी ने अजय कुमार कुशवाहा को उतारा था, जबकि कांग्रेस की तरफ से संजीव कुमार मैदान में थे.
  • लालगंज: आरजेडी ने शिवानी शुक्ला को टिकट दिया, तो वहीं कांग्रेस ने आदित्य कुमार राजा को अपना उम्मीदवार बनाया.
  • बचवाड़ा : इस सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के अवधेश कुमार राय और कांग्रेस के शिव प्रकाश गरीब दास के बीच मुकाबला था.
  • राजपाकर : यहां भी कांग्रेस की प्रतिमा कुमारी और सीपीआई के मोहित पासवान आमने-सामने थे.
  • रोसड़ा : कांग्रेस के ब्रज किशोर के. रवि और सीपीआई के लक्ष्मण पासवान के बीच सीधी टक्कर थी.
  • गौरा-बौरम: इस सीट पर मुकेश सहनी की वीआईपी से संतोष सहनी मैदान में थे, लेकिन आरजेडी के अफजल अली खान ने सिंबल वापस लेने से इनकार कर दिया और आरजेडी के टिकट पर ही चुनाव लड़ा.
  • तारापुर : आरजेडी के अरुण शाह का मुकाबला वीआईपी के सकलदेव बिंद से था.

सीट शेयरिंग के सिर फुटव्वल में तमाशबीन दिखते हैं राहुल गांधी

गौर करने वाली बात यह है कि राज्यों के चुनाव में जब कभी गठबंधन के सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग पर सिर फुटव्वल के हालात बनते हैं तो कांग्रेस के सबसे बड़ा चेहरा राहुल गांधी मूकदर्शक नजर आते हैं. यूं तो बिहार चुनाव के दौरान भी तेजस्वी यादव के साथ राहुल गांधी की बढ़िया केमेस्ट्री नजर आई, लेकिन जब असली चुनाव प्रचार शुरू हुआ तो ज्यादातर समय राहुल गांधी विदेश यात्रा पर दिखे और तेजस्वी यादव अकेले ही जुझते रहे.

इससे पहले हरियाणा में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं हो पाने के चलते कांग्रेस जीत के नजदीक पहुंचकर हार गई. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी ने तीन-पांच सीटों की डिमांड की थी, लेकिन उस वक्त के नेता कमलनाथ ने सीट शेयरिंग के मसले पर सपा अध्यक्ष के लिए अभद्र शब्द तक प्रयोग कर दिए थे. झारखंड चुनाव समेत कई ऐसे उदाहरण हैं जब कांग्रेस सीट शेयरिंग के वक्त झमेला खड़ा करती है और पार्टी के नेता राहुल गांधी पूरी तरह से गौन नजर आते हैं. ऐसे में यह भी माना जाता है कि सारी खींचतान उन्हीं की सह पर होती है.

इसी बार देख लीजिए, इंडिया गठबंधन की बैठक हो चाहे लोकसभा की कार्यवाही हर जगह अखिलेश यादव के साथ राहुल गांधी जुगलबंदी दर्शाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यूपी चुनाव में सीट शेयरिंग की बात आई तो अभी से उनके प्रभारी राजेंद्र गौतम पार्टी को बड़ा भाई बताने और बराबर सीटों की डिमांड करने लगे हैं.



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