एक-दो बार नहीं… गोंडा के ‘रक्त पुरुष’ कर चुके हैं 66 बार रक्तदान
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Gonda News: गोंडा के एक शख्स को आज लोग ‘रक्त पुरुष’ के नाम से जानते हैं. दरअसल इस शख्स ने 66 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर एक मिसाल पेश की है. उनके इस सराहनीय कार्य को देखते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें ‘रक्त पुरुष’ की उपाधि देकर सम्मानित किया.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित विकासखंड झंझरी के ग्राम सभा जमदरा के रहने वाले दयाप्रकाश शुक्ला समाज सेवा की ऐसी मिसाल बन चुके हैं, जिस पर पूरा जिला गर्व कर रहा है. उन्होंने अब तक 66 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर कई जरूरतमंद लोगों की जान बचाने में योगदान दिया है. उनके इस सराहनीय कार्य को देखते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें ‘रक्त पुरुष’ की उपाधि देकर सम्मानित किया.
लोकल 18 से बातचीत में दयाप्रकाश शुक्ला ने बताया कि वह कई वर्षों से नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं. उनका मानना है कि रक्तदान सबसे बड़ा मानव सेवा का कार्य है, क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद मरीज को नया जीवन मिल सकता है. यही सोच उन्हें बार-बार रक्तदान करने के लिए प्रेरित करती है.
कैसे हुई शुरुआत?
दया प्रकाश शुक्ला बताते हैं कि साल 2009 में हमारी बहन की डिलीवरी होनी थी और उन्हें खून की जरूरत थी, तो हमने उनको खून दिया, तब से हम रक्तदान करते आ रहे हैं. दिल्ली में भी हमने कई बार रक्तदान किया है और 66 बार रक्तदान कर चुके हैं. दयाप्रकाश ने बताया कि जब भी किसी मरीज को खून की जरूरत होती है और उनसे संपर्क किया जाता है, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के मदद के लिए पहुंच जाते हैं. चाहे दिन हो या रात, वे हमेशा जरूरतमंदों की सहायता के लिए तैयार रहते हैं.
स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर करें रक्तदान
दयाप्रकाश ने लोगों से भी अपील की है कि स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान जरूर करना चाहिए. इससे किसी की जान बचाई जा सकती है और रक्तदान करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता. जैसे 3 महीना पूरा होता है, उसके बाद हम स्वयं जाकर अपना रक्तदान कर देते हैं. वह नियमित रूप से साल में चार बार रक्तदान करते हैं.
दयाप्रकाश शुक्ला की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है. उनका कहना है कि यदि अधिक से अधिक लोग स्वैच्छिक रक्तदान करेंगे, तो अस्पतालों में खून की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा. उनके इस सेवा भाव और समर्पण ने उन्हें जिले में एक अलग पहचान दिलाई है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.