‘राम मंदिर ट्रस्ट सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं, उसे खुद फैसले लेने का हक’, RTI से खुला राज

0
‘राम मंदिर ट्रस्ट सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं, उसे खुद फैसले लेने का हक’, RTI से खुला राज


Last Updated:

Ayodhya Ram Mandir News: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज में सरकार की कोई भूमिका है या नहीं है? इसका जवाब मिल गया है. जी हां, सरकार ने कहा कि यह ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और अपने फैसले खुद लेने के लिए अधिकृत है. राम मंदिर ट्रस्ट यूपी सरकार या केंद्र सरकार के प्रति सीधे जवाबदेह नहीं है.

Zoom

राम मंदिर दान विवाद: क्या ट्रस्ट सरकार को जवाबदेह है? MHA के पुराने जवाब से साफ हुई तस्वीर

Ram Mandir Daan Chori News: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. अब इसे लेकर एक नई बात सामने आई है. वह यह कि राम मंदिर ट्रस्ट सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है. जी हां, राम मंदिर परिसर का प्रबंधन करने वाला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट न तो केंद्र सरकार और न ही यूपी सरकार के प्रति जवाबदेह है. गृह मंत्रालय ने पिछले साल 20 फरवरी को केंद्रीय सूचना आयोग को बताया था कि सभी फैसले ट्रस्ट की ओर से आंतरिक रूप से लिए जाते हैं और इसका अधिकार पूरी तरह से इसके स्थायी ट्रस्टियों के पास होता है. यह बात आरटीआई के जवाब से सामने आई है.

दरअसल, सीआईसी यानी केंद्रीय सूचना आयोग के सामने गृह मंत्रालय की तरफ़ से दी गई जानकारी के अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर परिसर का प्रबंधन करने वाला ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ न तो केंद्र सरकार और न ही उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति जवाबदेह है और उसे अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है. यह स्पष्टीकरण राम मंदिर से कथित तौर पर दान की चोरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच अहम हो गया है. इस मामले में ट्रस्ट के कुछ अधिकारियों को अरेस्ट किया गया है और दूसरों से पूछताछ की जा रही है.

MHA ने CIC से क्या कहा?
पिछले साल फरवरी में केंद्रीय सूचना आयोग के सामने अपनी बात रखते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ एक स्वतंत्र ट्रस्ट है, जिसका मालिकाना हक, नियंत्रण या वित्तपोषण केंद्र या राज्य सरकारों के पास नहीं है. मंत्रालय के अनुसार, इस ट्रस्ट का गठन केवल सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर, 2019 के अयोध्या फ़ैसले का पालन करने के लिए किया गया था. मंत्रालय ने बताया कि केंद्र की भूमिका केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ट्रस्ट बनाने तक ही सीमित थी. मंत्रालय ने कहा कि न तो केंद्र सरकार और न ही उत्तर प्रदेश सरकार का ट्रस्ट पर कोई वित्तीय, प्रशासनिक या परिचालन संबंधी नियंत्रण है. वे ट्रस्ट को कोई फंड भी नहीं देते हैं और ट्रस्ट को अपने कामकाज और गतिविधियों के बारे में स्वतंत्र फ़ैसले लेने का पूरा अधिकार है.

यह मामला CIC के सामने क्यों आया?

यह मामला तब केंद्रीय सूचना आयोग के पास पहुंचा जब एक आरटीआई आवेदक ने राम मंदिर ट्रस्ट से संबंधित जानकारी मांगी.  आरटीआई डालने वाले आवेदक का तर्क था कि ट्रस्ट को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण यानी पब्लिक अथॉरिटी माना जाना चाहिए क्योंकि इसका गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत सरकार द्वारा किया गया था और इसके शुरुआती ज़्यादातर ट्रस्टियों को सरकार द्वारा मंज़ूर योजना के तहत नामित किया गया था. लगभग 70 एकड़ अधिग्रहित जमीन भी ट्रस्ट को ट्रांसफर की गई थी. हालांकि, गृह मंत्रालय और ट्रस्ट ने तर्क दिया कि इन बातों से सरकारी मालिकाना हक या नियंत्रण साबित नहीं होता है.

क्या था CIC का फ़ैसला
जानकारी की समीक्षा करने के बाद, केंद्रीय सूचना आयोग ने माना कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ RTI अधिनियम की धारा 2(h) के तहत पब्लिक अथॉरिटी की श्रेणी में नहीं आता है. आयोग ने पाया कि ट्रस्ट संसद या राज्य विधानसभा द्वारा बनाए गए कानून के बजाय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत बनाया गया था. ट्रस्ट पर सरकार का कोई खास या व्यापक नियंत्रण नहीं है और न ही इसे सरकार से कोई बड़ी फंडिंग मिलती है. नतीजतन, CIC ने फैसला सुनाया कि ट्रस्ट RTI एक्ट के तहत जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं है.

कहानी कहां से शुरू हुई?

  • 2024 की शुरुआत में की बात है. आरटीआई आवेदक नीरज शर्मा ने केंद्र सरकार से राम मंदिर ट्रस्ट के लिए पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर्स के नाम मांगे थे. मगर गृह मंत्रालय ने उनकी अपील खारिज कर दी.
  • इसके बाद नीरज ने फरवरी 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया. इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग को निर्देश दिया गया कि वह गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया लेने और उसका मूल्यांकन करने के बाद यह तय करे कि राम मंदिर ट्रस्ट एक ‘पब्लिक अथॉरिटी’ है या एक ‘स्वायत्त निकाय’.
  • गृह मंत्रालय के जवाब आधार पर आयोग ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संगठन है जिसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बनाया गया है. इसे राज्य या केंद्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता या प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त नहीं है.
  • यह फैसला सुनाते हुए कि राम मंदिर ट्रस्ट एक पब्लिक अथॉरिटी नहीं है केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि इसका कामकाज RTI एक्ट के दायरे में नहीं आएगा.

About the Author

authorimg

Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *