बोन मैरो ट्रांसप्लांट इनके लिए नई जिंदगी, जानिए क्यों जरूरी है HLA टेस्ट?
ग्रेटर नोएडा. रक्त संबंधी कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. इसे लेकर लोगों में दहशत देखने को मिल रही है. ग्रेटर नोएडा के शारदा केयर एथलेटिक कैंप में इससे जुड़ा थैलेसीमिया स्क्रीनिंग और बोन मैरो डोनर रजिस्ट्रेशन अभियान शुरू किया गया है. इस दौरान हेमेटोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि रक्त संबंधी कई गंभीर बीमारियों का स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट से संभव है. इस प्रक्रिया की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी उपयुक्त बोन मैरो डोनर का मिलना है. इसी उद्देश्य से ऐसे जागरूकता और डोनर रिक्रूटमेंट कैंप आयोजित किए जाते हैं, ताकि भविष्य में जरूरतमंद मरीजों को समय पर पूर्ण रूप से मैच करने वाला दाता मिल सके.
नियमित खून चढ़ाने से मुक्ति
डॉ. सिंह ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट केवल थैलेसीमिया ही नहीं, बल्कि कई आनुवंशिक (जेनेटिक) रक्त रोगों, ब्लड कैंसर और कुछ गैर-कैंसर रक्त संबंधी बीमारियों, जैसे पीएनएच (PNH), के उपचार में भी प्रभावी साबित होता है. हालांकि, जेनेटिक बीमारियों में थैलेसीमिया सबसे सामान्य बीमारी है, जिसमें मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है. थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें जन्म के लगभग छह महीने बाद से ही बच्चे को नियमित रूप से खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ने लगती है. यदि समय रहते बोन मैरो डोनर मिल जाए और ट्रांसप्लांट सफल हो जाए, तो मरीज को स्थायी राहत मिल सकती है.
डॉ. सिंह के कहा कि थैलेसीमिया जैसी बीमारियों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम है. यदि माता और पिता दोनों थैलेसीमिया के कैरियर हैं, तो गर्भावस्था के दौरान जांच कर यह पता लगाया जा सकता है कि गर्भस्थ शिशु इस बीमारी से प्रभावित है या नहीं. समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय सलाह के माध्यम से इस बीमारी की रोकथाम संभव है. इसलिए युवाओं और नवविवाहित दंपतियों को अपना कैरियर स्टेटस अवश्य जानना चाहिए.
भाई-बहनों का HLA टेस्ट
डॉ. सिंह के मुताबिक, जिन मरीजों का इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट से किया जाना है, उनके लिए सबसे पहले परिवार में भाई-बहनों का HLA टेस्ट किया जाता है. HLA टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि कौन-सा भाई या बहन मरीज के लिए पूर्ण रूप से मैच करता है. यदि परिवार में उपयुक्त डोनर नहीं मिलता, तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डोनर रजिस्ट्रियों में पंजीकृत स्वयंसेवी दाताओं के माध्यम से मैचिंग डोनर की तलाश की जाती है. इसी उद्देश्य से डोनर रजिस्ट्रेशन अभियान चलाए जाते हैं, जिनमें स्वस्थ युवा स्वेच्छा से अपना पंजीकरण कराते हैं. जब किसी मरीज के साथ उनका HLA मैच होता है, तभी उनसे संपर्क कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है. डॉ. सिंह कहते हैं कि अधिक से अधिक लोगों के रजिस्ट्रेशन से जरूरतमंद मरीजों को जीवन बचाने वाला डोनर मिलने की संभावना बढ़ जाती है
कई मरीजों को नया जीवन
डॉ. सिंह के मुताबिक, कैंप के माध्यम से तीन प्रमुख उद्देश्यों पर काम किया जा रहा है. पहला, थैलेसीमिया स्क्रीनिंग के जरिए युवाओं को अपना कैरियर स्टेटस जानने के लिए प्रेरित करना. दूसरा, जिन परिवारों में पहले से कोई बच्चा रक्त संबंधी बीमारी से पीड़ित है, उन्हें HLA टेस्ट के माध्यम से संभावित डोनर की पहचान कराने में सहायता देना. तीसरा, ऐसे स्वस्थ स्वयंसेवकों का रजिस्ट्रेशन करना, जो भविष्य में किसी मरीज के लिए बोन मैरो डोनर बन सकें. ग्रेटर नोएडा एक बड़ा औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में युवा कार्यरत हैं और पढ़ाई कर रहे है. इसलिए इस क्षेत्र में थैलेसीमिया जागरूकता और बोन मैरो डोनर रजिस्ट्रेशन अभियान का विशेष महत्व है. यदि अधिक से अधिक युवा अपना कैरियर स्टेटस जानें और स्वेच्छा से डोनर रजिस्ट्रेशन कराएं, तो भविष्य में कई मरीजों को नया जीवन मिल सकता है.