राम मंदिर दान-पेटी की चाबी रखने वाले टिन्नू संग 14 घंटे रिमांड में क्या होगा?
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Ram Mandir Chanda Chori: अयोध्या पुलिस बुधवार सुबह 6 बजे से 14 घंटे के लिए रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी. इस दौरान दान-पेटी की चाबी से जुड़े गहरे राज उगलवाए जाएंगे. पुलिस इसके बाद मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष की कस्टडी मांगेगी. मामले में एसबीआई कर्मियों और अनिल मिश्रा के बयान भी जल्द दर्ज किए जाएंगे.
पुलिस मामले की जांच कर रही है.
अयोध्या में राम मंदिर दान-पेटी विवाद की परतें खुलते ही अब वो खौफनाक वक्त आ गया है जब सलाखों के पीछे बंद चेहरों से सच उगलवाया जाएगा. आस्था के सबसे बड़े केंद्र में सेंधमारी के इस सनसनीखेज मामले में अयोध्या पुलिस को कोर्ट से रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव की 14 घंटे की पुलिस कस्टडी मिल गई है. बुधवार की सुबह ठीक 6 बजते ही जब दोनों को कारावास से बाहर निकाला जाएगा तो पुलिसिया पूछताछ का वो दौर शुरू होगा जिससे आरोपियों की रूह कांप उठेगी. सबकी निगाहें टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव पर टिकी हैं क्योंकि इन दोनों की 14 घंटे की रिमांड में वो राज बाहर आने वाले हैं जो अब तक दफन थे. क्या इन 14 घंटों में पुलिस की थर्ड डिग्री काम आएगी, क्या चाबी का असली सच निकल पाएगा? अविनाश, अनुकल्प और लवकुश के बाद अब इन धुरंधरों की बारी है जबकि एसबीआई कर्मियों और अनिल मिश्रा के बयानों का सस्पेंस अभी भी बरकरार है.
बंद कमरे में उगलवाए जाएंगे राज
अयोध्या के राम मंदिर की दान-पेटी विवाद मामले में अब पुलिस की कार्रवाई बेहद आक्रामक हो चुकी है। बुधवार सुबह ठीक 6 बजे से 14 घंटे का वो काउंटडाउन शुरू होने जा रहा है जिसमें पुलिस रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव को अपनी कस्टडी में लेकर आमने-सामने बिठाएगी। इस 14 घंटे की कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस का पूरा फोकस उस चाबी के रहस्य को खोजना है जिसने राम मंदिर के सुरक्षा चक्र और दान-पेटी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपियों को उन जगहों पर भी ले जाया जा सकता है जहां से इस साजिश के तार जुड़े हैं।
टिन्नू यादव की कस्टडी पर टिकी निगाहें
रमाशंकर और सुभाष से पूछताछ पूरी होते ही अयोध्या पुलिस अगला शिकंजा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव पर कसने की तैयारी में है। पुलिस कोर्ट से टिन्नू यादव और मनीष की भी कस्टडी रिमांड मांगेगी क्योंकि दान-पेटी की चाबी से जुड़े कई अहम सुराग इन दोनों के पास होने का शक है। गौरतलब है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने महज 19-20 साल के आरोपी रमाशंकर मिश्रा के घर पर भी ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। पुलिस ने घर की अलमारियों और ट्रंक (संदूक) की गहन तलाशी ली थी जिससे साफ है कि पुलिस के हाथ कुछ बड़े इनपुट लगे हैं।
थर्ड डिग्री का भ्रम और हकीकत
अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है कि पुलिस कस्टडी मिलते ही आरोपियों पर लाठियां बरसाने लगती है लेकिन असल कानूनी प्रक्रिया इससे बिल्कुल उलट है. भारतीय कानून और मानवाधिकार आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों के मुताबिक कस्टडी के दौरान आरोपी के साथ किसी भी तरह की शारीरिक प्रताड़ना या मारपीट करना पूरी तरह गैर-कानूनी है. रिमांड पर लेने से पहले और रिमांड खत्म होने के बाद आरोपियों का अनिवार्य रूप से मेडिकल चेकअप कराया जाता है. यदि कोर्ट में पेशी के वक्त आरोपी के शरीर पर चोट के कोई नए निशान मिलते हैं तो संबंधित जांच अधिकारी पर गाज गिर सकती है. इसलिए पुलिस थर्ड डिग्री जैसे हिंसक रास्तों के बजाय मनोवैज्ञानिक दबाव और रणनीतिक पूछताछ का सहारा लेती है. हालांकि एक सत्य ये भी है कि पुलिस आरोपी की पिटाई इस तरह करती है जिससे शरीर पर चोट के निशान ना आएं और वो बुरी तरह दर्द से तंग आकर सच उगल दे.
14 घंटे का पुलिसिया चक्रव्यूह
14 घंटे की यह अवधि दिखने में छोटी लग सकती है लेकिन पुलिस के लिए यह बेहद सुनियोजित और व्यस्त समय होता है. इस दौरान तफ्तीश मुख्य रूप से तीन बड़े चरणों में आगे बढ़ती है:
• आमने-सामने की पूछताछ: पुलिस सबसे पहले रमाशंकर और सुभाष को एक साथ बिठाकर सवाल-जवाब करेगी. इससे पहले इस मामले में रिमांड पर लिए जा चुके आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश पांडे के बयानों की एक फाइल तैयार की जा चुकी है. पुलिस रमाशंकर और सुभाष के बयानों का मिलान पुराने बयानों से करेगी. जहां भी दोनों के बयानों में विरोधाभास दिखेगा, वहां पुलिस तीखे सवालों का मनोवैज्ञानिक जाल बुनेगी ताकि वे टूट जाएं और सच उगल दें.
• क्राइम सीन रिक्रिएशन और साक्ष्यों की बरामदगी: कस्टडी रिमांड का सबसे कानूनी महत्व साक्ष्यों की बरामदगी में होता है. पुलिस आरोपियों को राम मंदिर परिसर या उस चिन्हित स्थान पर ले जा सकती है जहां से इस पूरी हेरफेर को अंजाम दिया गया था. रमाशंकर मिश्रा के घर पर हुई छापेमारी में जो अलमारी और ट्रंक खंगाले गए थे, उनसे मिले इनपुट के आधार पर कड़ाई से पूछताछ होगी. मुख्य मकसद उस रहस्यमयी चाबी के सफरनामे को ढूंढना है कि वह किस रास्ते से होते हुए टिन्नू यादव तक पहुंची.
• मास्टरमाइंड की कड़ियों को जोड़ना: इन 14 घंटों की पूछताछ से जो कड़ियां जुड़ेंगी, वही इस केस की दिशा तय करेंगी. रमाशंकर और सुभाष से मिलने वाली जानकारियों के आधार पर ही पुलिस कोर्ट में मुख्य संदिग्ध रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए मजबूत आधार तैयार कर अर्जी दाखिल करेगी.
एसबीआई और ट्रस्ट के बयानों का सस्पेंस
इस पूरी विवेचना का आखिरी और सबसे मजबूत सिरा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कर्मचारियों और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा के बयानों पर टिका है. दान-पेटी से निकली रकम के ऑडिट और बैंक में जमा हुए पैसों के मिलान के लिए एसबीआई कर्मियों के बयान बेहद अहम हैं. पुलिस जल्द ही इन दोनों पक्षों के बयान दर्ज करेगी. इन बयानों के बाद जब बैंक के आंकड़े और ट्रस्ट की शिकायत को आरोपियों के बयानों के साथ क्रॉस-वेरिफाई किया जाएगा, तब जाकर इस हाई-प्रोफाइल दान-पेटी विवाद की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…और पढ़ें