P CM के गजब किस्से: जब यूपी के CM ने चुनाव जीतने के लिए बदल दिए मतपेटी बॉक्स

0
P CM के गजब किस्से: जब यूपी के CM ने चुनाव जीतने के लिए बदल दिए मतपेटी बॉक्स


Last Updated:

Hemwati Nandan Bahuguna Chandra Bhanu Gupta Story: UP CM के गजब किस्से के आज के भाग में कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो ऐसे नेताओं की, जो कभी कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे माने जाते थे. दोनों मुख्यमंत्री बने, दोनों का अपना दबदबा था, लेकिन दोनों के रिश्तों में ऐसी खटास आई कि राजनीति की सबसे चौंकाने वाली कहानियों में से एक जन्म ले गई. एक किताब में दावा है कि सालों बाद एक मुख्यमंत्री ने खुद अपने प्रतिद्वंद्वी नेता से ऐसा राज शेयर किया, जिसे सुनकर कोई भी हैरान हो सकता है. आखिर क्या था वह किस्सा? आइए जानते हैं.

ख़बरें फटाफट

Zoom

सत्ता का ऐसा नशा कि बदल दिए बैलेट बॉक्स! यूपी के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक खुलासा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसी कई पुरानी दुश्मनियां हैं, जिनके बारे में लोग जानते हैं. लेकिन कुछ कहानियां इतनी हैरान करने वाली हैं कि किसी को भी यकीन करना मुश्किल हो सकता है. खासकर तब तो और भी जब अगर कोई कहे कि किसी मुख्यमंत्री ने अपने विरोधी को हराने के लिए ‘बैलेट बॉक्स’ (मतपेटी) ही बदलवा दिए थे. तो कोई भी चौंक जाएगा. पर यह सच है. ऐसा दावा एक किताब में किया गया है. तो ‘यूपी सीएम के गजब किस्से’ की इस पार्ट में हम आपको यही कहानी बताएंगे.

बात है यूपी की राजनीति के दो दिग्गजों की!’

जब भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगर पुराने दौर के बड़े नेताओं की बात होगी तो दो नाम जरूर सामने आएंगे. जिसमें एक चंद्रभानु गुप्त और दूसरे हैं हेमवती नंदन बहुगुणा. वैसे तो दोनों कांग्रेस के बड़े चेहरे थे. दोनों ही मुख्यमंत्री बने. दोनों की अपनी-अपनी टीम थी और दोनों का अपना-अपना राजनीतिक कद था. दोनों के पास इतनी ताकत थी कि दिल्ली तक उनकी बात सुनी जाती थी. जैसा कि अक्सर राजनीति में होता है कि पार्टी में बड़े नेताओं की सबसे बड़ी लड़ाई विपक्ष से नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर के नेताओं से होती है. कही कोई उनसे आगे न निकल जाए. कुछ ऐसा ही इन दोनों नेताओं के बीच हुआ. आगे की कहानी जानने से पहले जान लेते हैं कि कौन थे चंद्रभानु गुप्त और हेमवती नंदन बहुगुणा.

कौन थे चंद्रभानु गुप्त

चंद्रभानु गुप्त उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं. वह चार बार मुख्यमंत्री बने और करीब दो दशक तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे. कांग्रेस संगठन में उनकी मजबूत पकड़ थी और उन्हें रणनीतिकार नेता माना जाता था. बाद में वह जनता पार्टी से भी जुड़े.

दूसरी तरफ थे हेमवती नंदन बहुगुणा

हेमवती नंदन बहुगुणा भी कांग्रेस के बड़े जनाधार वाले नेताओं में थे. 1973 में वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. उनकी पहचान तेज-तर्रार प्रशासक और मजबूत संगठनकर्ता की थी. आगे चलकर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

किस्सा 1974 चुनाव का

1974 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद अहम था. उस समय मुख्यमंत्री बहुगुणा थे और चंद्रभानु गुप्त लखनऊ (पूर्व) सीट से चुनाव लड़ रहे थे. चुनाव खत्म हुआ और गुप्त बेहद कम अंतर से हार गए. उस समय यह हार सिर्फ एक चुनावी नतीजा मानी गई. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इस चुनाव से जुड़ा एक किस्सा बहुत सालों बाद किताब में छपकर लोगों के सामने आएगा.

श्यामलाल यादव ने अपनी किताब में किया सबसे बड़ा खुलासा 

सीनियर जर्नलिस्ट श्यामलाल यादव ने अपनी किताब “At the Heart of Power: The Chief Ministers of Uttar Pradesh” में इस मामले पर एक प्रसंग लिखा है. किताब के मुताबिक, इमरजेंसी के बाद जब दोनों नेता जनता पार्टी में थे, तब एक मुलाकात के दौरान हेमवती नंदन बहुगुणा ने कथित तौर पर चंद्रभानु गुप्त से कहा कि 1974 के चुनाव में लखनऊ (पूर्व) सीट पर कई बैलेट बॉक्स बदलवाए गए थे. जिसकी वजह से गुप्त बेहद कम अंतर से चुनाव हार गए. लेकिन हम आपको पहले ही यह बात बता देते हैं कि यह प्रसंग श्यामलाल यादव की किताब में दर्ज एक दावा है. इसकी पुष्टि चुनाव आयोग अदालत या किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट से नहीं मिली है. इसलिए इसे एक रिकॉर्डेड राजनीतिक संस्मरण (anecdote) के तौर पर ही पढ़ा जाना चाहिए. न कि स्थापित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में. लेकिन जब इस बात की पुष्टि के लिए हमने किताब के लेखक से बात की तो उन्होंने इस प्रसंग पर लिखी बातों पर सहमति जताई.

आखिर क्यों है यह किस्सा इतना चर्चित?

इस किस्से की चर्चा इसलिए होती है क्योंकि इसमें उत्तर प्रदेश के दो बड़े नेताओं का नाम जुड़ा है. अगर किताब में दर्ज दावा सही माना जाए, तो यह उस दौर की राजनीति की तीखी प्रतिद्वंद्विता को दिखाता है. वहीं, इतिहासकार इस तरह के प्रसंगों को सावधानी से पढ़ने और उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ देखने की सलाह देते हैं.

दोनों नेता बाद में एक मंच पर भी आए

राजनीति की यही दिलचस्प बात है. जो नेता कभी एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी थे, वही बाद में जनता पार्टी में साथ दिखाई दिए. इमरजेंसी के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने कई पुराने विरोधियों को एक मंच पर ला दिया. यानी ‘UP CM के गजब किस्से’ का यह पार्ट सिर्फ एक चुनावी कहानी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के उन अनसुने प्रसंगों में से एक है. जिन पर आज भी चर्चा होती है. उनके मायने आज भी अपने राजनीति में जिंदा हैं. कैसे लगा ये किस्सा?



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *