‘भ्रष्टाचारियों को मिले मौत की सजा’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर हाईकोर्ट सख्त

0
‘भ्रष्टाचारियों को मिले मौत की सजा’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर हाईकोर्ट सख्त


Last Updated:

High Court on Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे भारतीय समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा बताया. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में कानून और सख्त होना चाहिए.

Zoom

इलाहाूबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी.

अयोध्या : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस अतुल श्रीधरन ने राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले पर बेहद सख्त टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि अगर भगवान के मंदिर में चढ़ाए गए दान की चोरी भी लोगों को गलत नहीं लगती, तो यह हमारे समाज के नैतिक पतन की सबसे बड़ी मिसाल है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को कानून में बदलाव कर भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में मौत की सजा जैसी कड़ी सजा पर विचार करना चाहिए.

यह टिप्पणी किस दौरान की गई?
जज यह बात हमीरपुर के एक बुलडोजर कार्रवाई मामले की सुनवाई के दौरान कह रहे थे. मामला एक ऐसे परिवार का था, जिसने आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रशासन उनकी संपत्ति को निशाना बना रहा है. इस मामले में बेंच के दूसरे जज जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की राय अलग थी. इसलिए इस केस को अब तीसरे जज के पास सुनवाई के लिए भेज दिया गया है. यहां पढ़ें पूरी खबर

ट्रांसपेरेसी की लिस्ट में भारत 91वें नंबर
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा कि राममंदिर चढ़ावा चोरी से भी अगर किसी को फर्क नहीं पड़ता तो उसे किसी भी बात से शर्म नहीं आ सकती है. यह घटना हमारे समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा को दिखाती है. आम भारतीय ने करप्शन को सामान्य मान लिया है. वजह तब तक इसे गलत नहीं मानता, जब तक कोई पकड़ा न जाए. ट्रांसपेरेसी की लिस्ट में भारत दुनिया के 182 देशों में 91वें नंबर पर है, इससे भी हमें शर्म नहीं आती.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?

  • 7 जून को चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का दावा किया गया था.
  • इसके बाद जांच शुरू हुई और 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई.
  • पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया, जो फिलहाल जेल में हैं.
  • उन पर चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और गहने चोरी करने का आरोप है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की नई एसआईटी (SIT) बनाने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि जांच सीनियर आईपीएस अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष और पूरी ईमानदारी से होनी चाहिए और इसे किसी भी तरह की राजनीति से दूर रखा जाए.

ट्रस्ट पर क्या कार्रवाई हुई?
जांच के दौरान ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा पर चढ़ावे की गिनती में लापरवाही के आरोप लगे. इसके बाद महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया.

About the Author

authorimg

काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *