कृत्रिम गर्भाधान और सेक्स सीमन में कौन ज्यादा अच्छा? पशु चिकित्सक ने बताया सच
Last Updated:
Animal Husbandry : गोरखपुर के कई किसान अब पारंपरिक पशुपालन से आगे बढ़कर वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग अपना रहे हैं. किसान सेक्स सीमन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. गोरखपुर के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शिवकुमार वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि डेयरी फार्मिंग में सबसे अधिक आवश्यकता मादा बच्चे की होती है, क्योंकि वही आगे चलकर दूध देने वाली गाय या भैंस बनती है. सेक्स सीमन के जरिए 85 से 90 प्रतिशत तक मादा पैदा होने की संभावना रहती है. इससे नस्ल की शुद्धता भी बनी रहती है और अगली पीढ़ी में दूध उत्पादन की क्षमता बेहतर होती है.
गोरखपुर. यूपी के गोरखपुर समेत पूर्वांचल के कई किसान अब पारंपरिक पशुपालन से आगे बढ़कर वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग अपना रहे हैं. दूध उत्पादन बढ़ाने और बेहतर नस्ल की गाय-भैंस तैयार करने के लिए किसान आधुनिक सेक्स सीमन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे डेयरी व्यवसाय को नई दिशा मिल रही है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है. गोरखपुर के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शिवकुमार वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि डेयरी फार्मिंग में सबसे अधिक आवश्यकता मादा की होती है, क्योंकि वही आगे चलकर दूध देने वाली गाय या भैंस बनती है. सामान्य कृत्रिम गर्भाधान में नर या मादा, दोनों में से किसी का भी जन्म हो सकता है, लेकिन सेक्स सीमन के जरिए लगभग 85 से 90 प्रतिशत तक मादा प्राप्त होने की संभावना रहती है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में डेयरी किसान अब इस तकनीक को अपना रहे हैं.
इन खास ब्रिड का अलग इस्तेमाल
डॉ. शिवकुमार वर्मा बताते हैं कि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में सबसे अधिक साहीवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा, जर्सी और होल्स्टीन फ्रिजियन (HF) नस्ल की गायों का पालन किया जाता है. इनमें साहीवाल और गिर अपनी अच्छी दूध क्षमता और गर्म मौसम सहने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं, जबकि जर्सी और एचएफ नस्ल अधिक दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. भैंसों में मुर्रा, भदावरी और जाफराबादी नस्ल किसानों की पहली पसंद हैं.
बनी रहती है नस्ल की शुद्धता
डॉ. शिवकुमार वर्मा के अनुसार, हर नस्ल के लिए उसकी जेनेटिक लाइन के अनुसार सीमन उपलब्ध कराया जाता है. उदाहरण के लिए यदि किसान बेहतर दूध उत्पादन वाली ‘एचएफ’ गाय तैयार करना चाहते हैं, तो उसी नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले सांड का सेक्स सीमन इस्तेमाल किया जाता है. इसी तरह साहीवाल, गिर या मुर्रा भैंस के लिए भी उनकी नस्ल के अनुरूप अलग-अलग सीमन स्ट्रॉ उपलब्ध होते हैं. इससे नस्ल की शुद्धता बनी रहती है और अगली पीढ़ी में दूध उत्पादन की क्षमता बेहतर होती है.
सही समय पर इस्तेमाल
डॉ. शिवकुमार वर्मा बताते हैं कि सेक्स सीमन का उपयोग केवल स्वस्थ और सही समय पर हीट में आई गाय या भैंस में प्रशिक्षित पशु चिकित्सक या पैरावेट की निगरानी में कराया जाना चाहिए. समय पर गर्भाधान, संतुलित पोषण, नियमित टीकाकरण और साफ-सफाई का ध्यान रखने से गर्भधारण की सफलता और अधिक बढ़ जाती है. अगर किसान आधुनिक प्रजनन तकनीकों के साथ बेहतर प्रबंधन अपनाएं तो कम पशुओं से भी अधिक दूध उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. यही वजह है कि गोरखपुर के कई डेयरी संचालक अब वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लेकर अपने व्यवसाय को अधिक लाभदायक बना रहे हैं.
About the Author
प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें