नोएडा में चीनी गैंग का भंडाफोड़, फर्जी कंपनी के जरिए होता था करोड़ों का हवाला
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Noida News: उत्तर प्रदेश एसटीएफ (UP STF) ने नोएडा में एक बड़े इंटरनेशनल हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. शेल (फर्जी) कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन करने वाले एक चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई (Liao Longhui) समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी का वीजा 2020 में ही खत्म हो चुका था. वह नागालैंड के पते वाले फर्जी पहचान पत्र के सहारे भारत में छिपकर रह रहा था.
चीनी नागरिक फर्जी कंपनी के जरिए करता था हवाला.
नोएडा: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने नोएडा में इंटरनेशनल हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग गैंग का भंडाफोड़ किया है. ये गैंग फर्जी शेल कंपनियों के जरिए फाइनेंशियल क्राइम को अंजाम देता था. एसटीएफ की गिरफ्त में आने वालों में एक चीनी समेत दो भारतीय नागरिक हैं.
गिरफ्तार किए गए चीनी नागरिक की पहचान लियाओ लोंगहुई (Liao Longhui) के रूप में हुई है. इसके दो भारतीय गुर्गों की पहचान संजीव कुमार (गाजियाबाद) और कौशलेन्द्र (औरैया) के तौर पर हुई है. एसटीएफ ने इन्हें 22 जुलाई की रात सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिल्वर सिटी से दबोचा. चौंकाने वाली बात यह है कि लियाओ लोंगहुई का भारतीय वीजा 2020 में ही समाप्त हो चुका था. इसके बावजूद, वह भारत में रह रहा था.
फर्जी पहचान और मोबाइल कवर का काला कारोबार
जांच में सामने आया कि यह चीनी नागरिक फर्जी सैमुअल लोथा के नाम से रह रहा था. इसके पते पर नागालैंड के कोहिमा का पता दर्ज था. आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह वर्ष 2018 में भारत आया था. सेक्टर-83 में YTL Manufacturing Pvt. Ltd. के नाम से मोबाइल कवर बनाने का काम करता था. इस सिंडिकेट का काम करने का तरीका बेहद शातिर था. ये चीन से कच्चा माल महंगे दामों पर आयात करते थे और तैयार माल को दिल्ली के करोल बाग व नेहरू प्लेस जैसे बाजारों में कम कीमत दिखाकर बेचते थे. एसटीएफ का मानना है कि अंडर इनवॉयसिंग से बचाई गई करोड़ों की रकम हवाला के जरिए ठिकाने लगाई जाती थी.
ड्राइवर-कर्मचारियों के नाम पर खुलीं शेल कंपनियां
एसटीएफ के मुताबिक, इस चीनी नागरिक ने अपने ही ड्राइवर और कर्मचारियों के नाम पर कई फर्जी (Shell) कंपनियां खोल रखी थीं. इनमें JNS Infra Heights Pvt. Ltd., Refan Enterprises India Pvt. Ltd., Z One Enterprises जैसी कई कंपनियों के नाम शामिल हैं. गिरफ्तार आरोपियों में से एक संजीव कुमार पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) है. एसटीएफ अब शेल कंपनियां बनाने, उनके बैंक खाते खुलवाने और इस पूरे वित्तीय नेटवर्क को संचालित करने में इस सीए (CA) की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है.
क्या-क्या हुआ बरामद?
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री मिली है:
- 4.72 करोड़ रुपये के विभिन्न बैंकों के चेक और 15,400 रुपये नकद
- 5 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन और 1 टैबलेट
- 10 अलग-अलग कंपनियों की मोहरें और 11 बैंक चेकबुक
2 चीनी पासपोर्ट और 1 चीनी पहचान पत्र
इस पूरे मामले में नोएडा के फेस-2 थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. एसटीएफ के एसपी राजकुमार मिश्रा के मुताबिक, बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की सघन जांच की जा रही है, जिससे इस इंटरनेशनल सिंडिकेट से जुड़े कई और सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है.
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