चित्रकूट के पाठा में उंची पहाड़ी पर मां आनंदी के मंदिर पर आषाढ़ में लगता है मेला

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चित्रकूट के पाठा में उंची पहाड़ी पर मां आनंदी के मंदिर पर आषाढ़ में लगता है मेला


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चित्रकूट के पाठा के जंगलों की ऊंची पहाड़ी में मौजूद एक ऐसा मंदिर, जहां हर साल आषाढ़ माह के महीने में भक्तों का जन शैलाब उमड़ता है. भक्त यहां मौजूद लगभग 511 सीढ़ियां चढ़कर आनंदी माता के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. मां आनंदी इन सभी की मनोकामनाओं की पूर्ति करती है. पाठा के लोग इस माता को अपनी कुल देवी के रूप में भी पूजते है. बता दे कि यह मंदिर मानिकपुर पाठा क्षेत्र में ऊंची पहाड़ियों में बना हुआ है.

चित्रकूटः चित्रकूट के पाठा के जंगलों की ऊंची पहाड़ी में मौजूद एक ऐसा मंदिर, जहां हर साल आषाढ़ माह के महीने में भक्तों का जन शैलाब उमड़ता है. भक्त यहां मौजूद लगभग 511 सीढ़ियां चढ़कर आनंदी माता के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. मां आनंदी इन सभी की मनोकामनाओं की पूर्ति करती है. पाठा के लोग इस माता को अपनी कुल देवी के रूप में भी पूजते है.

बता दे कि यह मंदिर मानिकपुर पाठा क्षेत्र में ऊंची पहाड़ियों में बना हुआ है. मान्यता है कि इस महीने माता के दर्शन मात्र से भक्तों की सारी मनोकामनाएं और जीवन की बाधाएं दूर हो जाती हैं. मान्यता के अनुसार यह मंदिर हजारों साल पुराना है. कहा जाता है कि जब भगवान शंकर मां सती का शरीर लेकर भ्रमण कर रहे थे, तभी विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके अंगों को विभाजित किया था. इसी दौरान सती जी की साड़ी का एक हिस्सा यहां गिरा था. उसी स्थान पर माता आनंदी की साड़ी की छाप स्थापित हुई है.

सारी मनोकामनाएं होती है पूरी

वही मां आनंदी माता के दर्शन करने पहुंचे भक्त ललित पांडे सहित अन्य भक्तों ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि यह स्थान आज से लगभग हजारों साल पुराना है, और यहां आषाढ़ के लगभग 1 महीने मेला लगता है. जिसमें दूर-दूर से भक्त जाकर महानदी माता की पूजा अर्चना करते हैं और उनसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति करवाते हैं. हम लोगों के द्वारा भी कई बार मनोकामनाएं मांगी गई और वह मनोकामनाएं पूरी भी हुई है इसलिए हम लोग पूरी श्रद्धा के साथ यहां पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं.

वही इस संबंध में मंदिर के पुजारी चंद्रमा कांत ने लोकल 18 से बताया कि यहां मां आनंदी सुनी मां की गोद, कामकाज में बड़ा इसके साथ जो भी भक्त सच्ची मनोकामनाओं से उनकी पूजा अर्चना करता है उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. आज भी आषाढ़ की चल रहे मेले में हजारों की संख्या में भक्तों की दर्शन मात्र के लिए आए हैं और उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि आषाढ़ के महीने पर सोमवार और गुरुवार को खास कर भक्तों का ताता इस मंदिर में लगता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …

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