12th फेल युवक 7 बार हुआ सिविल सर्विसेज में फेल, दोस्त ने बोले 4 ऐसे शब्द, बन गया PCS अफसर
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Inspiring Motivational Story : ‘जिंदगी में कभी-कभी ऐसा होता है कि जब हमें लगता है कि हमसे अब नहीं होगा, हम यह नहीं कर सकते, तो समझ लीजिए वही वो प्वॉइंट है, जब सफलता आपके पास में खड़ी होती है. तब अगला प्रयास सफलता दिला देता है’ ये शब्द उस पीसीएस अफसर के हैं जो 7 बार सिविल सर्विसेज में फेल हुआ. फेल शब्द सही मायने में इन्हीं के लिए बना था. 12वीं में भी फेल हुए. 10वीं थर्ड डिवीजन से पास की थी. जैसे-तैसे ग्रेजुएशन किया. फिर सात बार असलता का मुंह सिविल सर्विसेज में देखा. फिर कैसे बने पीसीएस अफसर, आइये जानते हैं………..
यह कहानी है लखनऊ के सुजीत कुमार बाजपेयी की जिन्होंने 2018 में यूपीपीएससी की परीक्षा पास की. सुजीत बाजपेयी की कहानी उन लाखों स्टूडेंट्स को प्रेरित करती है जो पढ़ाई में औसत हैं. जो 10वीं या 12वीं में फेल हो चुके हैं. सुजीत तो 12वीं में फेल हो गए थे. जैसे-तैसे ग्रेजुएशन किया, फिर सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगे. 27 साल की उम्र में सिविल सर्विसेज का ख्याल आया. फिर एक दो बार नहीं, पूरे सात बार सिविल सर्विसेज में भी फेल हुए.
सुजीत के पिता सब इंस्पेक्टर थे. बचपन से ही पढ़ाई में मन नहीं लगता था. पढ़ाई के अलावा सभी कामों में उनका मन लगता था. दसवीं थर्ड डिवीजन से पास की. फिर 12वीं में फेल हो गए. 12वीं में कोई भी स्कूल अपने यहां एडमिशन नहीं दे रहा था. उनके पिता दर-दर भटकते थे. जिस भी स्कूल में जाते, वहां अपमान का घूंट पीते. फिर एक स्कूल ने टॉप आने की शर्त पर एडमिशन दिया. सुजीत बताते हैं कि यह काम उनके लिए असंभव था, फिर भी हामी भर दी. सेकंड डिवीजन से 12वीं की परीक्षा पास की.
12वीं पास करने के बाद सुजीत ने अपने पिता से कोई बिजनेस करवाने की बात कही. यह भी कहा कि उनका मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता. पिता ने ग्रेजुएशन करने की सलाह दी. सुजीत बताते हैं, ‘मैंने किसी तरह से ग्रेजुएशन कर लिया. ग्रेजुएशन के बाद ज्यादातर दोस्त एमबीए करने जा रहे थे. मेरा कोई लक्ष्य नहीं था. रात में सोने से पहले सोच लेता था कि एक दिन सिविल सर्वेंट बनूंगा. सुबह उठते ही सपना भूल जाते थे. सभी दोस्त एमबीए कर रहे थे, ऐसे में मैंने भी एमबीए करने की ठानी. 2009 में एमबीए किया.’ उसी साल मंदी आ गई तो एमबीए का लाभ नहीं मिला.
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उसी साल सब इंस्पेक्टर-पुलिस की भर्ती आई. सुजीत को यह जॉब अच्छी लगी. रिटन क्लियर कर लिया लेकिन फिजिकल नहीं निकाल पाए. इसी बीच एक दिन सुजीत के पिता उन्हें एक रिटायर्ड आर्मी कर्नल से मिलवाने ले गए. कैजुअल मीटिंग थी. वहां पर सुजीत ने सिविल सर्विसेज की तैयारी की बात कर्नल से की. उस समय उम्र 27 साल थी. आर्मी कर्नल की बातें सुनकर सुजीत को पहली बार अहसास हुआ कि उनकी वजह से उनके पिता का हर जगह अपमान होता है. सुजीत बताते हैं कि उन दिन उन्हें बहुत बुरा लगा.
यही वो मोमेंट था जब सुजीत की जिंदगी में बदलाव आया. अपमान ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया. उन्होंने पढ़ाई करने की ठानी. इमोशन में आए लेकिन भावुक होने से भी जिंदगी नहीं चलती. बेस बहुत कमजोर था. हवा में देखे जाने वाले सपने अक्सर टूट जाते हैं. यूपीएससी की तैयारी शुरू की. पहला एग्जाम समझ में ही नहीं आया. दूसरा बार परीक्षा दी, प्री भी नहीं निकला, सुजीत फेल हो गए. तीसरी बार भी प्री नहीं निकला. चौथी बार भी असलता का मुंह देखना पड़ा. अब 2015 आ चुका था. उसी समय यूपीपीसीएस का फॉर्म आया. यूपीपीसीएस में भी सुजीत फेल हो गए. फिर से हिम्मत जुटाई. 2016 में पहली बार यूपीपीसीएस का प्री निकाल लिया. इससे थोड़ा आत्मविश्वास बढ़ा. मेंस की तैयारी के दौरान बीमार पड़ गए. ऐसे में मेंस में फेल हो गए.
फिर से खुद को संभाला. सुजीत बताते हैं, ‘मैं जानता था कि मैं फेलियर हूं. मैं अपने पिता के लिए खुद को साबित करना चाहता था.’ ऐसे में 2017 में फिर से सुजीत ने यूपीपीसीएस की परीक्षा दी. प्री तो निकाल लिया लेकिन मेंस में फेल हो गए. लगातार मिल रही असलता से सुजीत डिप्रेशन में चले गए. फिर से 2018 में यूपीपीसीएस का फॉर्म भरा. इसी दौरान एक दोस्त से बात की. दोस्त ने कहा कि कई बार जिंदगी में ऐसा होता है कि जब हमको लगता है कि हमसे नहीं होगा, हम यह नहीं कर पाएंगे, यह वही मोमेंट होता है जब सफलता पास खड़ी होती है.
यूपीपीसीएस 2018 का मेंस दिया. सुजीत बताते हैं, ‘सफलता के लिए जुनून के साथ थोड़ा पागलपन भी चाहिए. मैं पूरी दुनिया से रिश्ता तोड़ लिया. सोशल मीडिया से दो साल तक दूर रहा.’ इंटरव्यू तक पहुंचे. इंटरव्यू में चार-पांच सवालों के जवाब भी नहीं दे पाए. आत्मविश्वास नहीं खोया. एक सवाल यह भी पूछा गया कि कितने साल से तैयारी कर रहे हैं. सुजीत बताते हैं कि उन्होंने ईमानदारी से जवाब दिया. बताया कि वो सात बार फेल हुए हैं. इस बार किस्मत ने साथ दिया. वो यूपीपीसीएस में सफल हो गए. सुजीत बताते हैं कि जब उन्होंने रिजल्ट देखा तो पूरा रात सो नहीं सके. पहली बार लगा कि अपने पिता के लिए कुछ कर पाए हैं. उनका नाम ऊंचा किया है.