5 सोमवार चढ़ाएं अड़हुल का फूल, गोंडा के सम्मय माता मंदिर में टलेंगे सारे दुख
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Jahjawa Sammay Mata Temple Gonda: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक ऐसा प्राचीन और सिद्ध शक्तिपीठ स्थित है, जहां श्रद्धा से चढ़ाया गया सिर्फ एक अड़हुल का फूल भक्तों की किस्मत बदल देता है. विकासखंड झंझरी के इमिलिया गुरुदयाल गांव में स्थित ‘जहजवा सम्मय माता मंदिर’ सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से लगातार पांच सोमवार तक मां सम्मय के चरणों में गुड़हल का फूल अर्पित करता है, देवी माता उसकी हर खाली झोली को खुशियों से भर देती हैं.
Jahjawa Sammay Mata Temple Gonda: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी के ग्राम सभा इमिलिया गुरुदयाल में स्थित प्राचीन जहजवा सम्मय माता मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. दूर-दूर से लोग यहां माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भक्त लगातार पांच सोमवार तक मां सम्मय को अड़हुल (गुड़हल) का फूल श्रद्धापूर्वक अर्पित करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है.
सोमवार को उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के पुजारी किशोरी लाल वर्मा ने बताया कि मंदिर की पहचान केवल धार्मिक महत्व के कारण ही नहीं, बल्कि इसकी प्राचीन मान्यताओं के कारण भी है. यहां हर दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सोमवार के दिन विशेष भीड़ देखने को मिलती है. सुबह से ही भक्त पूजा की थाली और अड़हुल के फूल लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मनचाही इच्छा पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.
कितना पुराना है यह मंदिर?
स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर लगभग ढाई सौ से 300 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है, और इसकी महिमा पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है. लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती. इसी वजह से आसपास के गांवों के अलावा दूसरे जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं.
भक्तिमय और शांत वातावरण
मंदिर परिसर का वातावरण शांत और भक्तिमय रहता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन करने के बाद प्रसाद चढ़ाते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है. इन दिनों यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं और पूरा मंदिर भक्तिमय माहौल से भर जाता है.
क्या है 5 सोमवार की मान्यता?
किशोरी लाल वर्मा का कहना है कि माता सम्मय अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होती हैं. इसलिए लोग पांच सोमवार का व्रत रखकर अड़हुल का फूल अर्पित करते हैं. यही कारण है कि जहजवा सम्मय माता मंदिर आज भी लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां आने वाले श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…
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