जौनपुर के राकेश सिंह ने 50 हजार से शुरू किया टेंट का कारोबार, आज दो मैरेज हॉल के मालिक
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Rakesh Singh Jaunpur Success Story: राकेश सिंह ने बताया कि उनका सपना बास्केटबॉल खिलाड़ी बनने का था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों ने उन्हें रोजगार की राह चुनने के लिए मजबूर कर दिया. उन्होंने करीब 50 हजार की पूंजी जुटाकर टेंट-कनात का व्यवसाय शुरू किया. शुरुआत में वे खुद ही दरवाजे-दरवाजे जाकर टेंट लगाते थे. समाज के कुछ लोगों ने ताने भी दिए और कहा कि ठाकुर होकर टेंट लगाने का काम करते हो. लेकिन उन्होंने किसी की बात पर ध्यान देने के बजाय अपने काम को पूरी ईमानदारी और लगन से आगे बढ़ाया. धीरे-धीरे कारोबार बढ़ने लगा और उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई के साथ दोस्तों के सहयोग से पीली कोठी स्थित टीडी कॉलेज परिसर की एक पुरानी और बंद पड़ी इमारत को लीज पर लेकर आधुनिक मैरेज हॉल का रूप दिया.
जौनपुर: सफलता केवल बड़े निवेश या ऊंची पहुंच से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत, धैर्य और सही सोच से हासिल होती है. जौनपुर के भूपतिपट्टी निवासी राकेश सिंह ‘सुक्खू’ ने इसे अपनी जिंदगी से साबित कर दिखाया है. करीब 50 हजार की पूंजी से टेंट-कनात का छोटा कारोबार शुरू करने वाले राकेश सिंह आज हर महीने लाखों रुपये का कारोबार कर रहे हैं. उनके पास शहर के चर्चित तिलक प्लेस (टीडी कॉलेज परिसर) और तिलक महल मैरेज हॉल, नेवादा जैसे प्रतिष्ठान हैं. उनकी सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं.
बास्केटबॉल खिलाड़ी बनने का था सपना
राकेश सिंह ने बताया कि उनका सपना बास्केटबॉल खिलाड़ी बनने का था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों ने उन्हें रोजगार की राह चुनने के लिए मजबूर कर दिया. उन्होंने करीब 50 हजार की पूंजी जुटाकर टेंट-कनात का व्यवसाय शुरू किया. शुरुआत में वे खुद ही दरवाजे-दरवाजे जाकर टेंट लगाते थे. समाज के कुछ लोगों ने ताने भी दिए और कहा कि ठाकुर होकर टेंट लगाने का काम करते हो. लेकिन उन्होंने किसी की बात पर ध्यान देने के बजाय अपने काम को पूरी ईमानदारी और लगन से आगे बढ़ाया.
धीरे-धीरे कारोबार बढ़ने लगा और उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई के साथ दोस्तों के सहयोग से पीली कोठी स्थित टीडी कॉलेज परिसर की एक पुरानी और बंद पड़ी इमारत को लीज पर लेकर आधुनिक मैरेज हॉल का रूप दिया. कारोबार अच्छी गति से चल ही रहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों मैरेज हॉल पर ताला लग गया. अचानक कारोबार बंद होने से आर्थिक संकट गहरा गया। परिवार की जिम्मेदारियां, बच्चों की पढ़ाई और कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता गया.
तिलक महल मैरिज हॉल का कराया निर्माण
हालांकि राकेश सिंह ने हार नहीं मानी. उन्होंने फिर से नई शुरुआत करने का फैसला किया. वाराणसी-लखनऊ हाईवे स्थित नेवादा में जमीन लीज पर लेकर तिलक महल मैरेज हॉल का निर्माण कराया. उनकी मेहनत रंग लाई और कुछ ही समय में यह मैरेज हॉल लोगों की पसंद बन गया. बाद में न्यायालय से राहत मिलने के बाद तिलक प्लेस का संचालन भी दोबारा शुरू हो गया. आज दोनों प्रतिष्ठान सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं और उन्हें हर महीने लाखों रुपये की आय हो रही है. राकेश सिंह का कहना है कि उन्होंने कारोबार में चाहे जितनी कठिनाइयां देखीं, लेकिन बच्चों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया. उनकी मेहनत का सबसे बड़ा फल तब मिला, जब उनकी बेटी ने नीट परीक्षा में सफलता हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाया. इसे वह अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं.
राकेश सिंह युवाओं को संदेश देते हैं कि स्वरोजगार ही आत्मनिर्भर बनने का सबसे अच्छा रास्ता है. उनका कहना है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता. यदि मेहनत, ईमानदारी और धैर्य के साथ काम किया जाए तो छोटी शुरुआत भी एक दिन बड़ी सफलता में बदल सकती है. उनकी कहानी यह साबित करती है कि ₹50 हजार से शुरू हुआ एक छोटा कारोबार भी मेहनत के दम पर लाखों की कमाई और समाज में सम्मान दिला सकता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …
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