टिकट नहीं बगावत तय करेगी 2027 विधानसभा चुनाव? किस पार्टी की हालत होगी खराब
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UP Chunav 2027 Election Analysis: राजनीति में चुनाव जीतने का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं होता. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भले 2027 में होना है, लेकिन उसकी आहट अभी से सुनाई देने लगी है. राजनीति को करीब से समझने वाले जानते हैं कि चुनाव सिर्फ जनता के वोट से नहीं जीते जाते. इसमें उम्मीदवारों का चयन, टिकट बंटवारा, नेताओं की नाराजगी और संगठन की एकजुटता भी जीत-हार में बड़ी भूमिका निभाती है. कई बार बागी उम्मीदवार और अंदरूनी खींचतान मजबूत से मजबूत पार्टी का चुनावी गणित बिगाड़ देते हैं. ‘UP 2027: का कहत बा यूपी?’ के 11वें पार्ट में समझिए कि बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस में टिकट की जंग और अंदरूनी नाराजगी 2027 के विधानसभा चुनाव को किस हद तक प्रभावित कर सकती है.
UP 2027: का कहत बा यूपी? BJP-SP-BSP-कांग्रेस में कौन संभालेगा बगावत?
UP 2027: का कहत बा यूपी? | Part 11
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव सिर्फ जनता के बीच नहीं लड़ा जाता, बल्कि उसकी एक बड़ी लड़ाई राजनीतिक दलों के भीतर भी होती है. जैसे-जैसे चुनाव करीब आता है. टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ने लगती है. कोई अपने पांच साल का काम गिनाता है. तो कोई संगठन में अपनी पकड़ दिखाता है. जब इन सबसे बात नहीं बनती तो कोई जातीय और क्षेत्रीय समीकरण का भी हवाला देने में पीछे नहीं रहता. लेकिन टिकट तो किसी एक को ही मिलता है. यहीं से शुरू होती है नाराजगी, गुटबाजी और कई बार खुली बगावत.
यूपी की राजनीति का इतिहास बताता है कि टिकट बंटवारे से पैदा हुई नाराजगी कई बार चुनावी नतीजों पर भी असर डाल चुकी है. कुछ नेता निर्दलीय मैदान में उतर जाते हैं, कुछ दूसरी पार्टी का दामन थाम लेते हैं और कुछ भीतर रहकर ही पार्टी का नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं. यही वजह है कि चुनावी रणनीति में टिकट वितरण को सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है.
‘UP 2027: का कहत बा यूपी?’ के 11वें भाग में समझिए कि बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस के सामने टिकट बंटवारे की सबसे बड़ी चुनौतियां क्या होंगी, किस दल में सबसे ज्यादा दावेदार हैं और क्यों कई बार चुनाव की आधी लड़ाई मतदान से पहले, पार्टी के भीतर ही शुरू हो जाती है.