पैकेज के पीछे भागने से पहले करें ये काम, एक्सपर्ट ने बताया नौकरी पाने का मंत्र

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पैकेज के पीछे भागने से पहले करें ये काम, एक्सपर्ट ने बताया नौकरी पाने का मंत्र


ग्रेटर नोएडा: आज के दौर में कॉलेज पहुंचते ही छात्रों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा प्लेसमेंट पैकेज को लेकर होती है. कौन सी कंपनी कितने लाख का पैकेज देगी, किस कॉलेज में सबसे ज्यादा प्लेसमेंट हुआ और किस छात्र को सबसे बड़ा ऑफर मिला, इन सवालों के बीच कई बार छात्र यह भूल जाते हैं कि अच्छे पैकेज की असली नींव मजबूत स्किल्स होती हैं. खासकर कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए बदलती टेक्नोलॉजी के बीच खुद को अपडेट रखना बेहद जरूरी हो गया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर साइबर सिक्योरिटी तक कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें आने वाले समय में युवाओं के लिए बड़े अवसर बन सकते हैं.

शारदा यूनिवर्सिटी के हेड ऑफ डिपार्टमेंट, कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन एवं एक्सपर्ट रजनीश सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में Gen Z के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह किन विषयों और तकनीकों पर फोकस करे, जिससे उसका आने वाला भविष्य बेहतर हो सके. उन्होंने कहा कि छात्रों को सिर्फ प्लेसमेंट पैकेज देखने के बजाय इंडस्ट्री की जरूरत को समझना चाहिए. कंपनियां अब सिर्फ डिग्री रखने वाले छात्रों की जगह ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं, जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ उसे वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने की क्षमता भी हो.
AI सबसे अहम, नई तकनीकों पर भी रखें नजर

रजनीश सिंह के मुताबिक इस समय छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है. इसके साथ रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी और आधुनिक AI एप्लीकेशन भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. छात्रों को इन तकनीकों की बुनियादी समझ विकसित करने के साथ-साथ इनके प्रैक्टिकल इस्तेमाल पर भी काम करना चाहिए.

उन्होंने बताया कि AI के क्षेत्र में अब सिर्फ सामान्य AI की जानकारी पर्याप्त नहीं है. छात्रों को एजेंटिक AI, एक्सप्लेनेबल AI और रिस्पॉन्सिबल AI जैसी नई अवधारणाओं को भी समझना होगा. खासकर रिस्पॉन्सिबल AI इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को समझना भी जरूरी हो गया है.

इंटरनेशनल कांफ्रेंस में भी हुई तकनीक पर चर्चा

रजनीश सिंह ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले यूनिवर्सिटी में इसी विषय से जुड़ी इंटरनेशनल कांफ्रेंस आयोजित की गई थी. इसमें करीब 10 अलग-अलग देशों से डेलीगेट्स पहुंचे. विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने भी इसमें हिस्सा लिया. कांफ्रेंस में AI, रोबोटिक्स, IoT, साइबर सिक्योरिटी और अन्य तकनीकी विषयों पर चर्चा की गई.
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के साथ पैनल डिस्कशन भी आयोजित किया गया. इसमें तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बदलाव और छात्रों को भविष्य की नौकरियों के लिए किस तरह तैयार किया जाए, इस पर चर्चा हुई.

थ्योरी से ज्यादा प्रोजेक्ट पर करें फोकस

रजनीश सिंह ने छात्रों को सलाह दी कि सिर्फ किताबों और थ्योरी तक सीमित न रहें. जिस तकनीक को पढ़ रहे हैं, उसका प्रोजेक्ट बनाकर इस्तेमाल भी करें. रियल टाइम एप्लीकेशन तैयार करने से छात्रों की सीखने की क्षमता मजबूत होती है. साथ ही कंपनी के इंटरव्यू के दौरान वे अपनी स्किल को प्रैक्टिकल तरीके से साबित कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि जब कोई कंपनी कॉलेज में प्लेसमेंट के लिए आती है तो केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि छात्र ने कोई विषय पढ़ा है. यदि छात्र यह दिखा सके कि उसने उस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए कोई प्रोजेक्ट बनाया है और वास्तविक समस्या का समाधान किया है, तो उसका प्रभाव कहीं ज्यादा होता है.

Python, DSA और DBMS पर मजबूत पकड़ जरूरी

कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए रजनीश सिंह ने प्रोग्रामिंग की मजबूत नींव को बेहद जरूरी बताया. उनके अनुसार छात्रों को दो से तीन प्रोग्रामिंग विषयों में इतनी मजबूत पकड़ बनानी चाहिए कि वे खुद को 10 में से आठ या नौ अंक देने का आत्मविश्वास रख सकें.
उन्होंने कहा कि Python के बेसिक फंडामेंटल मजबूत होने चाहिए. इसके अलावा Data Structure and Algorithms यानी DSA और Database Management System यानी DBMS पर भी अच्छी पकड़ जरूरी है. यदि छात्र इन विषयों को केवल पढ़ने के बजाय प्रोजेक्ट में लागू करते हैं तो उनकी स्किल और मजबूत हो सकती है.

12वीं के बाद से ही विकसित करें समस्या हल करने की क्षमता

रजनीश सिंह ने 12वीं पास करने वाले छात्रों को भी शुरुआत से ही तैयारी करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि छात्रों को एप्टीट्यूड के साथ सबसे ज्यादा Problem Solving Skill पर काम करना चाहिए. कंप्यूटर साइंस में किसी एक समस्या को हल करने के कई तरीके हो सकते हैं. जरूरी यह है कि छात्र अलग-अलग विकल्पों के बारे में सोचें और उनमें से सबसे बेहतर और ऑप्टिमाइज समाधान निकालना सीखें.

उन्होंने कहा कि छात्रों का थॉट प्रोसेस जितना बेहतर होगा, वे तकनीकी समस्याओं को उतनी ही आसानी से समझ और हल कर पाएंगे. इसलिए युवाओं को केवल बड़े प्लेसमेंट पैकेज का सपना देखने के बजाय अपनी स्किल्स मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. मजबूत प्रोग्रामिंग, AI और नई तकनीकों की समझ, प्रोजेक्ट अनुभव और बेहतर प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता ही आने वाले समय में उनके लिए अच्छे करियर और बेहतर प्लेसमेंट का रास्ता खोल सकती है.



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