खेती में क्रांति लाने को तैयार गलगोटिया के छात्र, तैयार किया AI ‘नव्या’
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Agriculture Unique AI Drone Application: खेती को आगे बढ़ाने और फसलों की सटीक जानकारी तक खाद डालने के लिए गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के बीएससी ऑनर्स एग्रीकल्चर तृतीय वर्ष के छात्रों ने एक एआई प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो खेतों की तस्वीरों से फसल पर पड़ रहे तनाव क्रॉप स्ट्रेस की पहचान करता है.
ग्रेटर नोएडा: खेती में आधुनिक तकनीक का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब किसानों और ड्रोन सेवा कंपनियों के लिए एक ऐसी तकनीक विकसित की गई है, जो साधारण ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरों के आधार पर फसल की स्थिति का विश्लेषण कर सकती है. ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के बीएससी ऑनर्स एग्रीकल्चर तृतीय वर्ष के छात्रों ने ‘नव्या’ नाम का एक एआई आधारित प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो खेतों की तस्वीरों से फसल पर पड़ रहे तनाव क्रॉप स्ट्रेस की पहचान करता है.
छात्र आनंद ने बताया कि इस एप्लिकेशन में ड्रोन से ली गई तस्वीर या सामान्य मोबाइल कैमरे से खींची गई फोटो अपलोड की जा सकती है. इसके बाद एआई तकनीक तस्वीर का विश्लेषण कर यह बताती है कि खेत के कौन-से हिस्से में फसल स्वस्थ है और कहां पौधे तनाव की स्थिति में हैं. इससे ड्रोन ऑपरेटर पूरे खेत में एक समान मात्रा में कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव करने के बजाय केवल जरूरत वाले हिस्सों में ही स्प्रे कर सकते हैं.
पूरे खेत में समान मात्रा में करता स्प्रे
आनंद ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर टीम ने कॉलेज के फैकल्टी मेंटर के मार्गदर्शन में लंबे समय तक काम किया. सबसे पहले इसे एक हैकाथॉन में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे काफी सराहना मिली. बाद में इसमें लगातार सुधार कर इसे व्यावहारिक उपयोग के लिए तैयार किया गया. टीम के अनुसार, वर्तमान में अधिकांश ड्रोन ऑपरेटर पूरे खेत में समान मात्रा में स्प्रे करते हैं, क्योंकि फसल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उपयोग होने वाले मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरों की कीमत करीब 9.5 लाख से 12 लाख रुपये तक होती है. इतनी महंगी तकनीक छोटे ड्रोन ऑपरेटरों के लिए खरीदना आसान नहीं है. ऐसे में ‘नव्या’ साधारण कैमरे से ही लगभग वही उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करता है, जिससे महंगे हार्डवेयर की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकती है.
पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव
आनंद ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म बीमारी की पहचान, मिट्टी की जांच या उत्पादन का अनुमान नहीं लगाता, बल्कि केवल फसल में तनाव वाले क्षेत्रों का नक्शा तैयार करता है. इससे उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है, जिससे लागत कम होने के साथ पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. यह स्टार्टअप मुख्य रूप से ड्रोन सेवा कंपनियों और एग्री-टेक प्लेटफॉर्म को एपीआई के माध्यम से अपनी सेवा उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है.
प्रोजेक्ट में इतने लोग शामिल
टीम को AgriTech Yuva Competition 2026 और IEEE Hackathon 2026 में प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है. इस प्रोजेक्ट को बीएससी ऑनर्स एग्रीकल्चर के छात्र आनंद, हिमांशी, वर्षिता पंडिरी और रंजन गुप्ता ने फैकल्टी मेंटरशिप के साथ विकसित किया है. भविष्य में टीम ड्रोन निर्माताओं के साथ साझेदारी कर इस तकनीक को सीधे ड्रोन सिस्टम में शामिल करने और देशभर में इसके उपयोग का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
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