अयोध्या पुलिस का क्रूरतम चेहरा, अतिक्रमण हटाने के नाम पर ठेले वाले की ली जान
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Ayodhya News: अयोध्या में अतिक्रमण हटाने के नाम पर पुलिस और नगर निगम का क्रूरतम चेहरा सामने आया है. इनके असंवेदनशील एक्शन ने गरीब परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है. सरयू के कच्ची घाट पर पानी का ठेला लगाने वाले दीपक कुमार सिंह की पुलिस की लापरवाही से मौत हो गई. दीपक की मौत के बाद उनकी पत्नी, तीन बेटियों और एक मासूम बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है.
अयोध्या पुलिस का अमानवीय चेहरा.
अयोध्या: धर्मनगरी अयोध्या में पुलिस की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में मानवता भी शर्मसार हो गई. शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के नाम पर अयोध्या पुलिस और नगर निगम के प्रवर्तन दल ने ऐसा क्रूर और अमानवीय चेहरा दिखाया है, जिसने एक झटके में चार मासूम बच्चों के सिर से उनके पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया. सरयू घाट जिस कच्ची घाट भी कहा जाता है, पर अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान पुलिस के खदेड़ने से एक पानी का ठेला लगाने वाले गरीब व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई.
मृतक की पहचान बिहार के गया जिले के रहने वाले दीपक कुमार सिंह के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार, दीपक अपने परिवार का पेट पालने के लिए सरयू नदी के कच्ची घाट पर पानी और अन्य सामग्री की एक छोटी सी दुकान (ठेला) लगाते थे. घटना के वक्त पुलिस और नगर निगम का प्रवर्तन दल अचानक वहां अतिक्रमण हटाने पहुंच गया.
दौड़ा-दौड़ा कर मार रही थी पुलिस
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पुलिस वालों ने वहां ठेला लगाने वाले गरीबों को बुरी तरह दौड़ाया और भगाना शुरू कर दिया. इसी खदेड़-पकड़ और पुलिस की दहशत के कारण मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. इसी दौरान भागते हुए दीपक जमीन पर गिर पड़े और उनकी मौत हो गई.
‘पापा उठो न…’ चीखते मासूम और बिलखती पत्नी
दीपक की मौत के बाद जो मंजर सामने आया, उसने वहां मौजूद हर इंसान की आंखें नम कर दीं. एक गाड़ी में रखे दीपक के शव से लिपटकर उनके मासूम बच्चे लगातार रो रहे हैं. बच्चों की चीखें – ‘पापा उठो न, पापा क्या हो गया…’ किसी का भी कलेजा चीर देने के लिए काफी हैं. मृतक दीपक की पत्नी मनीषा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है. दीपक के परिवार में अब उनकी पत्नी के अलावा तीन छोटी बेटियां और एक छोटा बेटा है.
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
रोती-बिलखती पत्नी मनीषा देवी ने पुलिस और प्रशासन पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मनीषा ने बिलखते हुए मीडिया को बताया, ‘हम बिहार के गया जिले के रहने वाले हैं और यहां कच्ची घाट पर दुकान लगाते थे. पुलिस वालों ने आकर हमें ऐसी तरह भगाया कि मौके पर भगदड़ मच गई. उन्होंने मेरे पति को इतना दौड़ाया कि वह गिर पड़े और उनकी डेथ हो गई. पुलिस प्रशासन की लापरवाही की वजह से हमारे पति की जान गई है.’ अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबों को इस तरह खदेड़ कर उनकी जान लेना ही अब प्रशासन का काम रह गया है?
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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