आपको भी चाहिए केयरिंग हसबैंड? 15 अगस्त को दुर्लभ संयोग, जलाना होगा सिर्फ घी का चिराग
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Hariyali Teej Remedy : हरियाली तीज का व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने में मदद करता है. लोकल 18 से अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं इस बार हरियाली तीज पर सिद्ध योग, शिव योग और शनिवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है. ऐसे शुभ संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख बढ़ता है. अविवाहित कन्याएं हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष घी का दीपक जलाएं.
अयोध्या. सनातन धर्म में हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त दिन शनिवार को मनाई जाएगी. इस बार का पर्व कई शुभ संयोगों के कारण और भी विशेष माना जा रहा है. लोकल 18 से अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि इस दिन सिद्ध योग, शिव योग और शनिवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो व्रत, पूजा और विशेष उपायों के लिए अत्यंत फलदायी रहेगा.
अखंड सौभाग्य की कामना
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि हरियाली तीज का व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं की ओर से अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है. अविवाहित कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का आशीर्वाद मांगती हैं. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने में सहायक है. पंडित कल्कि के अनुसार, इस वर्ष बनने वाला सिद्ध योग और शिव योग पूजा के फल को कई गुना बढ़ाने वाला माना गया है. ऐसे शुभ संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख की वृद्धि होती है. जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो, वे भी इस दिन पूरे मन से शिव-पार्वती का पूजन करें और उत्तम वर की कामना करें.
चारों पहर करें पूजा
पंडित कल्कि राम के अनुसार हरियाली तीज के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद महिलाएं हरे रंग के वस्त्र धारण करें. यदि हरे वस्त्र उपलब्ध न हों तो हरी चूड़ियां पहनना भी शुभ माना जाता है. इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन करें. परंपरा के अनुसार प्रातःकाल, मध्याह्न, सायंकाल और मध्यरात्रि यानी चारों पहर पूजा करने का विशेष महत्व है. इस दौरान माता गौरी को श्रृंगार सामग्री, हरी चूड़ियां, सिंदूर, चुनरी, फल-फूल और मिठाई अर्पित करें.
मनचाहा वर पाने के लिए करें ये काम
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि अविवाहित कन्याएं हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष घी का दीपक जलाकर सच्चे मन से विवाह की प्रार्थना करें. माता गौरी को लाल चुनरी, सुपारी और एक सिक्का अर्पित करें. “ॐ गौरी शंकराय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें. मान्यता है कि इस उपाय को करने से योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं. पंडित कल्कि राम कहते हैं कि भारतीय संस्कृति के अधिकांश पर्व प्रकृति से जुड़े हुए हैं. श्रावण मास में चारों ओर हरियाली छा जाती है और प्रकृति नवजीवन का संदेश देती है. हरियाली तीज भी इसी प्राकृतिक सौंदर्य और नव ऊर्जा का उत्सव है.
यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, परिवार की खुशहाली और सामाजिक परंपराओं को सहेजने का भी संदेश देता है.
पंडित कल्कि राम कहते हैं कि जो महिलाएं श्रद्धा, संयम और पूर्ण आस्था के साथ यह व्रत रखती हैं, उनके दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. अविवाहित कन्याओं के लिए यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के आदर्श वैवाहिक जीवन से प्रेरणा लेकर मनचाहे जीवनसाथी की कामना करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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