राम मंदिर ट्रस्ट के CEO का इंटरव्यू देने वाले पूर्व IPS राजेश पांडेय कौन हैं?

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राम मंदिर ट्रस्ट के CEO का इंटरव्यू देने वाले पूर्व IPS राजेश पांडेय कौन हैं?


Ex IPS Rajesh Pandey: अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के लिए इंटरव्यू का दौर शुरू हो चुका है. इस इंटरव्यू में पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्र के साथ पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार पांडेय भी पहुंचे. राजेश पांडेय का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों में लिया जाता है जिन्होंने अपने लंबे करियर में संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ कई महत्वपूर्ण अभियानों में काम किया. श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई से लेकर यूपी STF और ATS से जुड़ी उनकी भूमिका तक उनका पुलिस करियर काफी चर्चित रहा है. राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए इंटरव्यू देने के बाद एक बार फ‍िर पूर्व IPS राजेश पांडेय चर्चा में हैं.आइए जानते हैं कि राजेश पांडेय कौन हैं, कहां के रहने वाले हैं, उन्होंने पढ़ाई कहां से की, पुलिस सेवा में कैसे पहुंचे?

CEO पद के लिए इंटरव्यू देने पहुंचे राजेश पांडेय

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO पद के लिए अंतिम चरण के इंटरव्यू शुरू हो गए हैं.मंगलवार को कुल नौ आवेदकों ने इंटरव्यू दिया. इनमें अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी और मंडलायुक्त रहे पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र के अलावा पूर्व IPS राजेश कुमार पांडेय भी शामिल थे.कुल 18 आवेदक अंतिम चरण के इंटरव्यू में शामिल हो रहे हैं. ऐसे में राजेश पांडेय का नाम सामने आने के बाद उनकी पुलिस सेवा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.

कौन हैं पूर्व IPS राजेश कुमार पांडेय?

राजेश कुमार पांडेय उत्तर प्रदेश कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं. उनका मूल संबंध प्रयागराज जिले से है जिसे पहले इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था.उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1982 में बॉटनी में M.Sc.की पढ़ाई पूरी की.राजेश पांडेय के परिवार की पृष्ठभूमि भी प्रशासनिक या पुलिस सेवा की नहीं थी.एक इंटरव्यू में उन्‍होंन बताया था कि उनका परिवार किसान पृष्ठभूमि से जुड़ा था और वह अपने परिवार के पहले पुलिस अधिकारी बने.उनके पिता चंद्र प्रकाश पांडेय हाईकोर्ट में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर थे.

पहले विज्ञान की पढ़ाई, फिर NET और रिसर्च की राह

राजेश पांडेय की शुरुआती पढ़ाई और करियर का रास्ता सीधे पुलिस सेवा की ओर नहीं गया था. उन्होंने विज्ञान विषय से पढ़ाई की और 1982 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बॉटनी में M.Sc.की.इसके बाद उन्होंने 1984 में UGC-NET/JRF परीक्षा पास की और IARI यानी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा में रिसर्च से जुड़े.

1986 में UPPSC पास कर बने डिप्टी SP

राजेश पांडेय ने इसके बाद सिविल सेवा में जाने का फैसला किया. उन्होंने 1986 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की परीक्षा पास की और डिप्टी SP बने.पुलिस सेवा में आने के बाद उनकी शुरुआती पोस्टिंग सोनभद्र, जौनपुर, आजमगढ़ और लखनऊ जैसे स्थानों पर CO के तौर पर हुई.इन पोस्टिंग के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था और अपराध से जुड़े मामलों में काम करने का मौका मिला.आगे चलकर उनकी पहचान एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में बनी जो गंभीर अपराधों और संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जाने गए.

यूपी STF के संस्थापक सदस्यों में रहे

राजेश कुमार पांडेय के करियर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश की स्‍पेशल टास्‍क फोर्स (Special Task Force यानी STF)से जुड़ा रहा.वह यूपी STF और एंटी टेररोरिज्‍म स्‍क्‍वाड (Anti-Terrorism Squad यानी ATS)के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे. STF का गठन ही प्रदेश में बड़े अपराधी गिरोहों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने के उद्देश्य से किया गया था.राजेश पांडेय ने STF और ATS में रहते हुए कई महत्वपूर्ण अभियानों में भूमिका निभाई.उन्‍होंने अपराधियों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ों के साथ-साथ आतंकवादी घटनाओं की जांच में भी अहम भूमिका निभाई.

श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ ऑपरेशन में भी रहे शामिल

राजेश पांडेय के पुलिस करियर की सबसे ज्यादा चर्चा गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई को लेकर होती है.श्रीप्रकाश शुक्ला 1990 के दशक में उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित अपराधियों में गिना जाता था. उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले थे. वह बिहार के मंत्री ब्रज बिहारी प्रसाद की हत्या और पूर्वांचल के माफिया वीरेंद्र कुमार शाही की हत्या में भी शामिल था. उसके खिलाफ तत्कालीन उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की कथित सुपारी लेने की बात भी सामने आई थी. श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाई गई STF की शुरुआती टीम में राजेश पांडेय भी शामिल थे. STF टीम ने पहले उसके सहयोगी आनंद पांडेय को दिल्ली में मार गिराया और बाद में गाजियाबाद सीमा के पास मुठभेड़ में श्रीप्रकाश शुक्ला को ढेर किया. यही वह कार्रवाई थी जिसने राजेश पांडेय को यूपी पुलिस के चर्चित अधिकारियों में शामिल कर दिया.राजेश पांडेय के बारे में बताया जाता है कि वह 70 एनकाउंटर में शामिल रहे.

किन-किन जिलों में पुलिस अधिकारी रहे?

डिप्टी SP के रूप में राजेश पांडेय ने सोनभद्र, जौनपुर, आजमगढ़ और लखनऊ में काम किया. बाद में उन्हें लखनऊ, गाजियाबाद और मेरठ में एसपी सिटी जैसे पदों पर भी जिम्मेदारी मिली.IPS में शामिल होने के बाद उन्होंने रायबरेली और गोंडा में SP तथा सहारनपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में SSP के रूप में काम किया. इसके बाद वह उत्तर प्रदेश में डीआईजी सिक्‍योरिटी (DIG Security)के पद पर भी रहे.लखनऊ से उनका पुराना जुड़ाव भी रहा. वह लखनऊ में CO महानगर, CO हजरतगंज, CO कैसरबाग, एडिशनल SP ईस्ट और एडिशनल SP क्राइम जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं.राजेश पांडेय ने शुरुआत PPS यानी प्रांतीय पुलिस सेवा से की थी. वह 2005 में IPS में कैडर में शामिल हुए और इसके बाद उन्होंने SP और SSP स्तर की कई जिम्मेदारियां संभालीं.उन्हें 2005 में IPS के रूप में प्रमोट किया गया.

आतंकवादी घटनाओं की जांच में भी निभाई भूमिका

राजेश पांडेय का करियर सिर्फ एनकाउंटर तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई बड़े आतंकी मामलों की जांच में भी भूमिका निभाई.इनमें 2005 का अयोध्या हमला, 2006 में वाराणसी के दशाश्वमेध मंदिर से जुड़ी आतंकी घटना और फैजाबाद व लखनऊ के जिला अदालतों में हुए ब्लास्ट जैसी घटनाएं शामिल हैं.उन्होंने 2010 में लंदन के रॉयल इंस्‍टीटयूट ऑफ पब्लिक एडमिस्‍ट्रेशन यानी RIPA के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था.

वीरता के लिए मिले कई सम्मान

लंबे पुलिस करियर के दौरान राजेश पांडेय को कई पुरस्कार भी मिले. उनके आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक उन्हें राष्ट्रपति की ओर से चार बार 1999, 2000, 2007 और 2016 में इंडियन पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री मिला.इसके अलावा उन्हें 2005 में पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस भी मिला.

पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद क्या किया?

राजेश पांडेय पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद भी सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर नहीं हुए. उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें UPEIDA और पूर्वांचल एक्‍सप्रेस के नोएडा सेक्‍योरिटी ऑफ‍िसर की जिम्मेदारी दी थी.यह जिम्मेदारी एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी थी.उन्होंने अपने पुलिस अनुभवों पर आधारित ऑपरेशन बाजुका (Operation Bazooka)नाम की किताब पर भी काम किया है.

अब राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद की दौड़ में

अब राजेश पांडेय एक बिल्कुल अलग तरह की जिम्मेदारी के लिए चर्चा में हैं.श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के लिए उन्होंने इंटरव्यू दिया है.CEO की जिम्मेदारी राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज, व्यवस्थाओं और विभिन्न समन्वय से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिहाज से काफी अहम मानी जाती है. ऐसे में लंबे प्रशासनिक और सुरक्षा अनुभव वाले अधिकारियों का इस पद के लिए सामने आना महत्वपूर्ण है.इसके लिए पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्र और पूर्व IPS राजेश कुमार पांडेय समेत नौ आवेदकों ने इंटरव्यू दिया. कुल 18 आवेदक अंतिम चरण में हैं.



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