खेती की बढ़ानी है कमाई तो विदेश भेजें अपना सामान, यहां जानिए पूरा तरीका

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खेती की बढ़ानी है कमाई तो विदेश भेजें अपना सामान, यहां जानिए पूरा तरीका


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खेती की बढ़ानी है कमाई तो विदेश भेजें अपना सामान, यहां जानिए पूरा तरीका

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मिर्जापुर के किसानों के लिए कृषि उत्पादों को विदेश में बेचने का रास्ता आसान होने जा रहा है. चुनार में APEDA का कार्यालय खोला गया है, जहां किसानों को निर्यात से जुड़ी जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन मिलेगा. APEDA अधिकारी के अनुसार FPO बनाकर किसान Import-Export Code, APEDA RCMC और उत्पाद के अनुसार जरूरी प्रमाणपत्र लेकर अपनी उपज को वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकते हैं. वहीं जैविक उत्पादों के निर्यात के लिए NPOP सर्टिफिकेशन जरूरी है.

मिर्जापुर: अगर आप भी किसान है और अपना उत्पाद विदेश में निर्यात करना चाहते हैं तो यह ख़बर आपके लिए हैं. मिर्जापुर जिले में किसानों के उत्पाद को विदेश में निर्यात करने के लिए चुनार में एपीडा का कार्यालय खोला गया है. हालांकि, जानकारी के अभाव में किसान अभी भी उत्पाद को विदेश नहीं भेज पा रहे हैं. एपीडा के देव आनंद त्रिपाठी ने किसानों को विदेश निर्यात करने को लेकर जरुरी दस्तावेज, सर्टिफिकेट और आवश्यक जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि किसान एफ़पीओ के माध्यम से सरल और आसान तरीके से उत्पाद निर्यात कर सकते हैं. इसके साथ ही एफपीओपी व अन्य सर्टिफिकेट लेकर भी इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कर सकते हैं.

एपीडा के देव आनंद त्रिपाठी ने बताया कि एपीडा जो कि भारत सरकार का अधिनियम है. एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी. इसका एक नया प्रोजेक्ट चुनार में खुला है. कुछ ही समय बाद उसका इनोग्रेशन होगा. ​यह जो सेंटर खोला गया है, इससे मिर्ज़ापुर के किसानों को लाभ होगा. यहाँ के जो किसान हैं, उनको किस तरह से आत्मनिर्भर बनाया जाए और आजीविका बढ़ाई जाए, इसको लेकर ध्यान दिया जाएगा.

किसानों की जो सब्जियां हैं, वैश्विक बाजार में भेजी जाएँ. इसके लिए बनाया गया है. निर्यात से जुड़े कई ऑफिसिस हैं, जो मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स के अंदर आते हैं. जैसे कि इन्स्टिट्यूट ऑफ पैकेजिंग, एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल के साथ में एमपीडा और स्पाइस बोर्ड. इनके भी अधिकारी कुछ ही समय में एपीडा के कार्यालय में बैठेंगे तो जो भी लोग इच्छुक हैं निर्यात करने के लिए, वे निश्चित ही हम लोगों से संपर्क कर सकते हैं.

एफपीओ सबसे बेस्ट माध्यम

​देव आनंद त्रिपाठी ने बताया कि प्रोडक्ट के निर्यात के लिए सबसे जरूरी यह है कि किसान सबसे पहले कंपनी खोले. इसके लिए जो एफपीओ है. भारत सरकार द्वारा जो 10 हजार एफपीओ बनाए गए हैं, उससे अच्छा कोई और विकल्प नहीं हो सकता है. एफ़पीओ के माध्यम से वे लोग निर्यात कर सकते हैं. बनारस से बहुत सारे एफ़पीओ हैं जो कि निर्यात कर रहे हैं. हमारा वहाँ से पर प्रतिदिन सब्जियां गल्फ के मार्केट में एक्सपोर्ट होती हैं. किसानों को कहीं ना कहीं एफ़पीओ बना करके इम्पोर्ट -एक्सपोर्ट कोड लेना होगा. साथ में एपीडा का आरसीएमसी सर्टिफिकेट लेकर अगर वो स्पाइस का कर रहे हैं तो स्पाइस का आरसीएमसी लेकर के जो भी उनके विकल्प हैं. जो प्रोडक्ट हैं उनके हिसाब से पंजीकरण करा करके आगे एक्सपोर्ट कर सकते हैं, निर्यात कर सकते हैं.

ये सर्टिफिकेट जरूरी

​देव आनंद त्रिपाठी ने बताया कि जैविक में जितना भी खाद्य पदार्थ भारत से निर्यात के लिए जाते हैं, सब के लिए बहुत जरूरी है कि एनपीओपी का सर्टिफिकेशन बहुत जरूरी रहता है. उसके बिना निर्यात नहीं कर सकते हैं. वो भारत का प्रमाणीकरण है, उसके द्वारा ही एक्सपोर्ट होगा. एपीओपी के लिए निश्चित ही एपीडा उसका मुख्यालय है. उसके द्वारा बहुत सी सर्टिफिकेशन बॉडीज हैं, जो यूपी में काम कर रही हैं. उसके लिए यूपी-सोका भी है. उत्तर प्रदेश सर्टिफिकेशन बॉडी है. उससे भी कांटेक्ट किया जा सकता है. ​उनका एक टैरिफ स्ट्रक्चर होता है, उसके माध्यम से इंडिविजुअल फार्मर (व्यक्तिगत किसान), एक ग्रोवर ग्रुप (किसान समूह), चाहे एक प्रोसेसर हो, ट्रेडर हो, वे लोग भी इसमें सर्टिफाई कर सकते हैं. अगर किसान को करना है तो ऐज एन इंडिविजुअल फार्मर व्यक्तिगत किसान के रूप में कर सकता है या फिर ऐज अ ग्रुप समूह के रूप में कर सकता है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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