करोड़पति बुजुर्ग का भरा-पूरा परिवार, फिर भी दूसरों ने किया अंतिम संस्कार
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Etawah News: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहां एक करोड़पति बुजुर्ग के अंतिम संस्कार उसके परिवार के लोग शामिल नहीं हुआ. यहां तक कि जब अस्पताल प्रशासन ने बेटों से संपर्क किया, तो उन्होंने पहचानने से मना कर दिया.
परिवार ने बुजुर्ग का नहीं किया अंतिम संस्कार.
इटावा: कभी बड़े कारोबारी रहे बुजुर्ग राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद तीन बेटों, बेटी ओर पत्नी ने ऐसा मुंह मोड़ा कि पांचों में से कोई बुर्जुग का अंतिम संस्कार को तैयार नहीं हुआ, जिसके बाद अनजान शवों का अंतिम संस्कार करने वाली संस्था ने हिन्दू रीत रिवाज से अंतिम संस्कार करना मुनासिब समझा. 70 साल के बुजर्ग राजकुमार सक्सैना की पहचान होने के बावजूद अनजान की शक्ल में अंतिम संस्कार किया गया है. राजकुमार सक्सेना बड़े करोड़ पति कारोबारी हुआ करते थे. लेकिन वक्त की मार ने आज राजकुमार के हालात ऐसे बना दिए कि राजकुमार के शव का अंतिम संस्कार करने को कोई तैयार नहीं हुआ.
पुलिस की देखरेख में हुआ अंतिम संस्कार
पिता-पुत्र, पति-पत्नी, पिता-बेटी के रिश्तों की डोर को झकझोर देने वाली मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हुई यह दर्दनाक कहानी उत्तर प्रदेश के इटावा से जुड़ी हुई है. बुजुर्ग शख्स का अंतिम संस्कार इटावा में यमुना नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट पर रक्तदाता समूह और पुलिस की देखरेख में किया गया है. बुजुर्ग की पहचान होने के बाद भी ना तो तीनों बेटों, बेटी ओर पत्नी ने शव को स्वीकार किया और ना ही अंतिम संस्कार में शामिल होना जरुरी समझा. जिसको लेकर के अब हर कोई हैरत में पड़ा हुआ है।
12 अगस्त को हुई थी मौत
अधिक लोगों का ऐसा मानना है कि उनकी समझ में यह पहला मामला है जिसमें किसी परिवार ने अपने परिवार के मुखिया को अनाथ की शक्ल में छोड़ दिया है. इटावा जिले में सैफई मैडिकल युनिवर्सिटी में 70 साल के राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद जो हुआ, वह रिश्तों की संवेदना पर सवाल खड़ा करता है. एटा के मारहरा निवासी राजकुमार ने अस्पताल में इलाज के दौरान 12 अगस्त को दम तोड़ दिया, लेकिन उनकी मौत के बाद शव लेने के लिए अब तक कोई अपना नहीं पहुंचा.
16 जुलाई को अस्पताल में कराया गया भर्ती
पुलिस ने शव को 72 घंटे के लिए शवगृह में रखवाया. 15 अगस्त को यह अवधि पूरी होने के बाद शाम पांच बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया. जिस पिता ने कभी परिवार के साथ जीवन बिताया, उनकी आखिरी विदाई के समय भी उनके पास अपना कोई नहीं आया. बीते 16 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती गई और 12 अगस्त को उनकी मौत हो गई. मौत के बाद जब अस्पताल में कोई रिश्तेदार नहीं मिला तो इसकी जानकारी रक्तदाता समूह के पदाधिकारियों को दी गई.
बेटे ने पहचानने से किया इंकार
इसके बाद समूह के संस्थापक शरद तिवारी और उनके साथियों ने राजकुमार के परिवार को खोजने की कोशिश शुरू की. उनके पास मिले दस्तावेजों से बेटे कुबेर सक्सेना का नाम और गाजियाबाद का पता मिला. मोबाइल से संपर्क किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बातचीत के दौरान बेटे ने राजकुमार को पहचानने से इनकार किया और बाद में फोन भी नहीं उठाया. अस्पताल के काउंसलर डॉ. मनोज मौर्य ने भी फोन पर बेटे से बात कर उन्हें पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.
वृद्ध की पत्नी के अलावा उनके तीन बेटे और एक बेटी भी हैं
परिवार की तलाश में जुटे लोगों को राजकुमार के भतीजे पंकज सक्सेना से भी संपर्क हुआ. उन्होंने बताया कि राजकुमार के तीन बेटे कुबेर, भारत और धादू गाजियाबाद में रहते हैं. उनकी एक बेटी भी है और पत्नी भी जीवित हैं. रक्तदाता समूह के सदस्य जब दस्तावेजों में दर्ज गाजियाबाद के नंदग्राम, दीनदयालपुर स्थित पते पर पहुंचे तो घर पर ताला लगा मिला.
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Prashant Rai is a digital journalist with over 9 years of experience in Hindi journalism, specializing in politics, crime, hyper-local reporting, and viral news. He currently serves as Chief Sub Editor at News1…
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