छोटे से गांव से बड़ा मुनाफा! मिट्टी के कुल्हड़ से लाखों कमाने वाले इस युवक की

0
छोटे से गांव से बड़ा मुनाफा! मिट्टी के कुल्हड़ से लाखों कमाने वाले इस युवक की


Last Updated:

मिट्टी के कुल्हड़ का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है. सोनू प्रजापति ने कम संसाधनों में यह उद्योग शुरू कर हर महीने ₹60,000 की बचत कर रहे हैं. बिजली समस्या के समाधान के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया गया है, जिससे उत्पाद…और पढ़ें

X

News 18 

नीरज राज/बस्ती- पहले जब धातु के बर्तन नहीं होते थे, तब लोग मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कर खाना पकाते थे. मिट्टी के इन बर्तनों में बना खाना न सिर्फ सेहतमंद होता था, बल्कि स्वादिष्ट भी लगता था. समय के साथ लोग स्टील और लोहे के बर्तनों की ओर बढ़ गए, लेकिन आज भी मिट्टी के बर्तनों की मांग बनी हुई है. खासकर कुल्हड़ में चाय पीने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कुल्हड़ का बाजार भी फल-फूल रहा है। यदि आप लाभदायक व्यवसाय की तलाश में हैं, तो मिट्टी के कुल्हड़ का उद्योग एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है.

सोनू प्रजापति की सफलता की कहानी
सोनू प्रजापति (गया प्रसाद) ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि उन्होंने तीन महीने पहले इस उद्योग की शुरुआत की. उनका निवास स्थान बासापार है, लेकिन उन्होंने अपने उद्योग को शिवगढ़ में स्थापित किया है. बहुत ही कम संसाधनों और सिर्फ दो मशीनों के साथ उन्होंने यह व्यवसाय शुरू किया और अब हर महीने लगभग 60,000 रुपये की बचत कर रहे हैं.

कैसे बनाए जाते हैं मिट्टी के कुल्हड़?
सोनू प्रजापति बताते हैं कि वे वर्षों से माटी कला योजना से जुड़े हैं और मिट्टी के साथ-साथ सीमेंट की मूर्तियां भी बनाते हैं, तो आइए आपको बताते हैं कि कुल्हड़ कैसे बनाते हैं ?

  • तालाब से विशेष प्रकार की मिट्टी लाना, क्योंकि खेत की मिट्टी कुल्हड़ के लिए उपयुक्त नहीं होती.
  • मिट्टी को अच्छी तरह मिक्स करना और फिर सांचे में डालकर कुल्हड़ का आकार देना.
  • आकार देने के बाद कुल्हड़ को धूप में सुखाना.
  • सुखने के बाद, अतिरिक्त किनारों को साफ करना.
  • कुल्हड़ को भट्टी में पकाना और फिर बाजार में भेजना.

सौर ऊर्जा से बिजली की समस्या का समाधान
कुल्हड़ बनाने की मशीन के लिए लगातार विद्युत सप्लाई की आवश्यकता होती है. ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या को देखते हुए सोनू प्रजापति ने सौर ऊर्जा प्लेट लगवाई, जिससे उन्हें अब 24 घंटे बिजली मिल रही है और उनका उत्पादन बाधित नहीं होता.

एक दिन में कितना उत्पादन होता है?
यदि कोई कुशल कारीगर हो, तो वह एक दिन में 1800 कुल्हड़ तैयार कर सकता है. वहीं, जो इस काम को सीख रहे हैं, वे प्रतिदिन 1000 से 1400 कुल्हड़ बना लेते हैं. वर्तमान में बाजार में प्रति कुल्हड़ की कीमत ₹1.30 मिल रही है. मांग इतनी अधिक है कि वे पूरी सप्लाई नहीं कर पाते. उनके उत्पाद जिले के कई स्थानों तक पहुंच रहे हैं, जिससे उन्हें हर महीने लगभग 60,000 रुपये की बचत हो रही है.

अन्य लोगों को भी दे रहे हैं रोजगार
सोनू प्रजापति न केवल खुद का व्यवसाय चला रहे हैं, बल्कि उन्होंने कई अन्य लोगों को भी रोजगार दिया है. वर्तमान में उनके पास सात स्थायी मजदूर काम कर रहे हैं, जिनमें तीन महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं. वे इस उद्योग को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं, जिससे भविष्य में लगभग 40 लोगों को रोजगार मिल सकेगा.

homeuttar-pradesh

छोटे से गांव से बड़ा मुनाफा! मिट्टी के कुल्हड़ से लाखों कमाने वाले इस युवक की



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *