अलीगढ़ मे ऐसी सुरंग जो 1942 के बमकांड की है गवाह, ये सुरंग आजादी के….
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अलीगढ़ के हकीम की सराय में 200-250 साल पुरानी सुरंग है, जिसका उपयोग स्वतंत्रता सेनानी मदनलाल हितेषी और अन्य क्रांतिकारी अंग्रेजों से लड़ने के लिए करते थे.
aligarh tunnel
हाइलाइट्स
- अलीगढ़ में 200-250 साल पुरानी सुरंग है.
- सुरंग का उपयोग स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किया गया था.
- सुरंग की देखभाल मदनलाल हितेषी के परिवार द्वारा की जाती है.
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश सिर्फ़ तालों और मशहूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां कई पुरानी इमारतें भी हैं जो हमें इतिहास की याद दिलाती हैं. ऐसी ही एक खास जगह है हकीम की सराय इलाके में बनी एक सुरंग. यह सुरंग अंग्रेज़ों के ज़माने की है. बताया जाता है कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारी अंग्रेज़ों से बचने के लिए इसी सुरंग का इस्तेमाल करते थे. इस सुरंग को अलीगढ़ के ही स्वतंत्रता सेनानी मदनलाल हितेषी ने चुना था.
लगभग 200-250 साल पुरानी
प्रशांत हितेषी जी बताते हैं कि अलीगढ़ के हकीम की सराय इलाके में उनके मकान के नीचे एक सुरंग है जो लगभग 200-250 साल पुरानी है. 35 फीट लंबी और 7 फीट चौड़ी इस सुरंग को उनके दादा जी मदनलाल हितेषी ने अंग्रेजों के समय ढूंढा था. मदनलाल जी उस समय के क्रांतिकारी थे. यह सुरंग अब जर्जर हालत में है और इसकी देखभाल प्रशांत जी का परिवार कर रहा है. उन्होंने सुरंग की मरम्मत भी करवाई है. प्रशांत जी बताते हैं कि उनके दादा जी स्वतंत्रता सेनानी थे और यह सुरंग उस समय के क्रांतिकारियों के छिपने की जगह हुआ करती थी.
अलीगढ़ में क्रांतिकारियों ने एक बम धमाका किया
यह सुरंग 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ इस्तेमाल की गई थी. उस समय अलीगढ़ में क्रांतिकारियों ने एक बम धमाका किया था जिसमें कई अंग्रेजी सैनिक मारे गए थे. बाद में, सभी क्रांतिकारी बचने के लिए इसी सुरंग में छिप गए थे. लाल मदनलाल अलीगढ़ के ही थे और क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा थे, उनका नारा बहुत प्रसिद्ध था. उस समय क्रांतिकारी एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए इन सुरंगों का इस्तेमाल करते थे.
Aligarh,Uttar Pradesh
March 16, 2025, 17:48 IST