अद्भुत है यह पेड़! रोज गिरते हैं सैकड़ों फल, बुजुर्ग रहते थे फिट, बनता है लाजवाब मालपुआ
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बलिया में महुआ बीनने की परंपरा आज भी जीवित है. महुआ औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसका पुआ बेहद स्वादिष्ट होता है. बुजुर्ग मधुसूदन सिंह इसे प्राकृतिक तोहफा मानते हैं.
महुआ का पेड़
हाइलाइट्स
- बलिया में महुआ बीनने की परंपरा आज भी जीवित है.
- महुआ औषधीय गुणों से भरपूर होता है.
- महुआ का पुआ बेहद स्वादिष्ट होता है.
बलिया: एक समय था जब गांवों में सुबह-सुबह यानी भोर होते ही बच्चे और महिलाएं टोकरा-झोला लेकर महुआ बीनने निकल जाते थे. आज भी कुछ गांवों में यह खूबसूरत नजारा देखने को मिल जाता है. महुआ न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसका इस्तेमाल दादी-नानी पुराने घरेलू नुस्खों में भी करती थीं. खास बात ये कि महुआ का बना पुआ इतना लाजवाब होता है कि आटे और मैदे से बना पुआ भी उसके सामने फीका लगने लगता है.
बलिया के बुजुर्ग मधुसूदन सिंह बताते हैं कि महुआ एक बेहतरीन प्राकृतिक तोहफा है. उन्होंने बताया कि पहले गांव में जब महुआ का मौसम आता था, तो बच्चे और महिलाएं खुशी-खुशी उसे बीनने जाते थे. आंधी या बारिश के बाद तो बच्चों की खुशी और भी बढ़ जाती थी, क्योंकि ज्यादा महुआ गिरता था. मजदूर और गरीब परिवारों की महिलाएं भी इसे बड़े मन से बटोरती थीं.
महुआ के फायदे भी कम नहीं
महुआ औषधीय गुणों से भरपूर होता है. बुजुर्गों के मुताबिक ये पेट के रोग, खून की खराबी, चर्म रोग, बवासीर, गैस, अपच और हड्डियों की तकलीफ में फायदा पहुंचाता है. दादी-नानी महुआ को रात में पानी में भिगोकर रखती थीं और सुबह उसका पानी छानकर खाली पेट पीने के लिए देती थीं. उनका मानना था कि इससे शरीर मजबूत रहता है और बीमारियां दूर रहती हैं.
महुआ का पुआ: स्वाद की मिसाल
महुआ से बना पुआ यानी मीठी मोटी पूड़ी बेहद स्वादिष्ट होती है. बुजुर्ग कहते हैं कि जिसने महुआ का पुआ नहीं खाया, उसने असली देसी स्वाद मिस कर दिया. इसके अलावा महुआ की दातून दांतों के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती है.
जरूरी चेतावनी
अगर आप महुआ का इस्तेमाल इलाज के लिए करना चाहते हैं, तो किसी आयुर्वेद एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर लें. हर शरीर, उम्र और बीमारी के हिसाब से इसकी मात्रा तय होती है.