Dharohar : ‘यूपी का हड़प्पा’ साबित हो सकता है पीलीभीत का ये टीला…अलेक्जेंडर कनिंघम ने किया था जिक्र
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Dharohar : पीलीभीत का बिलई खेड़ा टीला ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका उल्लेख अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1862-63 में किया था. यह टीला कई राज छुपाए हुए है, लेकिन व्यावसायिक खनन से नुकसान हो रहा है. हालांकि पीलीभीत के डीएम ने …और पढ़ें
बिली खेला टीला. (फाइल फोटो)
हाइलाइट्स
- पीलीभीत का बिलई खेड़ा टीला ऐतिहासिक धरोहर है.
- अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1862-63 में इसका उल्लेख किया था.
- पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जल्द ही टीले के रहस्यों का खुलासा करेगा.
पीलीभीत. यूपी का पीलीभीत जिला प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों के मामले में काफी समृद्ध है. शहर की कई ऐतिहासिक धरोहरें महत्वपूर्ण हैं, उनमें से एक है पीलीभीत शहर से कुछ दूरी पर स्थित “बिलई खेड़ा”. यह टीला अपने अंदर कई राज छुपाए हुए है, लेकिन अंधाधुंध विकास के इस दौर में इसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
पीलीभीत के पास स्थित बिलई खेड़ा नामक टीला इतिहास के कई गहरे राज समेटे हुए है. जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर जहानाबाद कस्बे के पास स्थित बिलईखेड़ा/पसियापुर इलाके में लगभग 15-20 फीट ऊंचे कई एकड़ भूमि में फैले टीले हैं. भारत की पहली पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट, जिसे अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1862-63 में लिखा था, उसमें भी इस जगह का उल्लेख है. उस समय इस टीले की ऊंचाई लगभग 20 फीट थी. गौरतलब है कि अलेक्जेंडर कनिंघम ब्रिटिश सेना में एक इंजीनियर थे जो बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संस्थापक प्रमुख बने. उन्होंने 1853 में हड़प्पा का दौरा किया और एक हड़प्पा मुहर पाई, जिससे हड़प्पा को विश्व पुरातात्विक मानचित्र पर लाने में मदद मिली।
संरक्षण की आस में ये धरोहर
सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सड़क बनाने के लिए मिट्टी की जरूरत को पूरा करने के लिए इस टीले पर व्यावसायिक खनन किया जा रहा था. इसको लेकर बीते दिनों पीलीभीत जिलाधिकारी से इस धरोहर के संरक्षण का अनुरोध किया गया था. जिलाधिकारी ने खुदाई पर रोक लगाते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से इस टीले की जांच के लिए पत्राचार किया था.
जल्द होगा रहस्यों का खुलासा
शिवम बताते हैं कि उनकी ओर से भी यहां का स्थलीय निरीक्षण कर इस धरोहर को संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से इस टीले के रहस्यों का खुलासा किया जाएगा, जिससे पीलीभीत में ईको टूरिज्म और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.