किसानों के लिए सुनहरा मौका! बेबी कॉर्न की खेती से लाखों कमाएं, जानिए तरीका
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बहराइच में बेबी कॉर्न की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलने वाला है. कृषि विज्ञान केंद्र के सफल ट्रायल के बाद अब किसानों को बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे. बेबी कॉर्न की बढ़ती डिमांड और उच्च कीमत से यह खेती फायदे…और पढ़ें
बहराइच के किसान अब कर सकेंगे बेबी कॉर्न की खेती!
हाइलाइट्स
- बहराइच में बेबी कॉर्न की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलने वाला है.
- कृषि विज्ञान केंद्र के सफल ट्रायल के बाद किसानों को बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
- बेबी कॉर्न की बढ़ती डिमांड और उच्च कीमत से यह खेती फायदे मंद साबित हो रही है.
बहराइच: बहराइच के किसानों के लिए खुशखबरी है. अब वे बेबी कॉर्न की खेती कर अच्छे खासे मुनाफे की उम्मीद कर सकते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र में पहली बार सफल ट्रायल के बाद किसानों को इसकी जानकारी और बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
बेबी कॉर्न की खेती से बढ़ेगा मुनाफा
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि बेबी कॉर्न की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होगा. आजकल बड़े बड़े रेस्टोरेंट और महानगरों में बेबी कॉर्न की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. बेबी कॉर्न की कीमत 200 से 300 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिकती है, जो किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी. ट्रायल में BCH 1613 प्रजाति पूरी तरह सफल रही है, जिससे किसानों को आशा जगी है.
बेबी कॉर्न से बनने वाली लोकप्रिय डिशें
बेबी कॉर्न से कई स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं. यूपी में बेबी कॉर्न सूप, बेबी कॉर्न क्रिस्पी और सब्जी लोकप्रिय हैं. बच्चों को विटामिन और प्रोटीन देने के लिए दलिया और मैगी में भी बेबी कॉर्न डालकर खिलाया जाता है. रेस्टोरेंट में पिज्जा और रॉयल पकवानों में भी इसका खूब इस्तेमाल होता है.
ऐसे करें बेबी कॉर्न की खेती
बेबी कॉर्न की खेती के लिए जमीन की अच्छी तैयारी जरूरी है. खेत को गहरी जुताई, कल्टीवेटर से आड़ी-तिरछी जुताई, पानी देकर मिट्टी भुरभुरा करना, गोबर की खाद और उर्वरकों का सही उपयोग करना आवश्यक है. पौधों के बीच 15-20 सेमी और मेड़ों के बीच 60 सेमी दूरी रखनी चाहिए. बीज बोने से पहले खेत में पानी देना जरूरी है ताकि अंकुरण सही हो. 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए.
किसानों के लिए सुविधा
बेबी कॉर्न की खेती को लेकर किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से सहायता और बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. किसान इसे अपनाकर अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं और स्थानीय बाजार के साथ-साथ बड़े बाजारों में भी सप्लाई कर लाभ उठा सकते हैं.