Farming Tips: सब्जी नहीं, मुनाफे की मशीन है कुंदरू! एक बार लगाओ 4 साल कमाओ
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लखीमपुर खीरी के किसान कुंदरू की मचान विधि से खेती कर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. यह फसल बार-बार फल देती है और बाजार में इसकी मांग व कीमत स्थिर रहती है, जिससे निरंतर आमदनी संभव होती है.
हाइलाइट्स
- कुंदरू की खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा.
- कुंदरू की बेलें हर 10 दिन में नई फलियां देती हैं.
- मचान विधि से कुंदरू की खेती में उत्पादन बढ़ता है.
लखीमपुर खीरी- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के किसान अब परंपरागत खेती से हटकर सब्जियों की ओर रुख कर रहे हैं, खासतौर पर कुंदरू जैसी सब्जी की खेती से उन्हें बेहतर आमदनी हो रही है. कुंदरू की खेती खास इसलिए है क्योंकि यह एक बार लगाने के बाद सालों तक उत्पादन देती है और बाजार में इसकी कीमत हमेशा 30-40 रुपये प्रति किलो रहती है.
बांकेगंज ब्लॉक के प्रगतिशील किसान गौतम चंद्र वाइन बीते 15 वर्षों से कुंदरू की खेती कर रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस खेती में लागत कम है और मुनाफा अधिक. उन्होंने कहा कि कुंदरू एक ऐसी सब्जी है जिसकी बेलों पर हर 10 दिन में नई फलियां तैयार हो जाती हैं. यही वजह है कि इस फसल से लगातार आमदनी होती रहती है.
कम लागत, अधिक उत्पादन की गारंटी
कुंदरू की खेती में मचान तकनीक को सबसे असरदार तरीका माना जाता है. इस विधि में लोहे की जाली, नेट और बांस की मदद से एक मजबूत मचान तैयार किया जाता है, जिस पर बेलों को फैलाया जाता है. इससे फसल को नमी, कीचड़ और बारिश के असर से बचाया जा सकता है.
बीज बोने से पहले जानिए ये जरूरी बात
यदि आप कुंदरू की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले नर्सरी में इसके बीजों की बुआई करनी होगी. शुरुआती देखरेख के बाद जब बेल तैयार हो जाती हैं, तो इन्हें मचान पर चढ़ाया जाता है. एक बार बेल फल देना शुरू कर दें, तो फिर हर कुछ दिनों में तुड़ाई कर बाजार में बेच सकते हैं.
कुंदरू की बढ़ती मांग और भविष्य की संभावनाएं
कुंदरू की मांग केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में बनी रहती है. इसकी स्थिर कीमत और लगातार उत्पादन इसे दूसरी सब्जियों की तुलना में अधिक लाभकारी बनाते हैं. ऐसे में अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें, तो यह एक स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकती है.