छोटा कस्बा, बड़ा सवाल: हमीरपुर से गाजा को ऐसा क्या भेजा गया, जो लखनऊ से स्पेशली भेजनी पड़ी पुलिस, ATS किसे खोज रही?
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Hamirpur News: हमीरपुर जिले से फिलिस्तीन में युद्ध से प्रभावित लोगों को आर्थिक मदद भेजने का मामला सामने आया है. इसकी जांच के लिए लखनऊ से पुलिस की स्पेशल टीम को भेजा गया है.
हमीरपुर से फलस्तीन को आर्थिक मदद.
हाइलाइट्स
- हमीरपुर से गाजा को आर्थिक मदद भेजी गई.
- ATS और लखनऊ की टीम मामले की जांच में जुटी.
हमीरपुर: यहूदी देश इजरायल और गाजा के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है. इजरायल लगातार गाजा पट्टी पर हमले कर रहा है. वहीं, इन दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए दुनिया के कई देशों के साथ संयुक्त राष्ट्र भी कोशिशों में जुटा है. मगर, कोई हल नहीं निकल पा रहा है. इन सबके बीच भारत के यूपी राज्य से एक बड़ी सनसनीखेज खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से फिलिस्तीन समेत कई ऐसे देशों को फंडिग की जा रही है, जहां पर युद्ध चल रहे हैं या हाल ही में हुए हैं. ये फंडिंग एक एनजीओ के जरिए की गई हैं. इसकी जानकारी लगते ही खुफिया एजेंसी अलर्ट हो गई हैं. इस पूरे मामले की जांच में एटीएस सहित लखनऊ की विशेष टीम जुटी हुई है. आइए जानते हैं सबकुछ…
निजी संस्था के जरिए भेजा गया था फंड
जानकारी के अनुसार, मौदहा कस्बे के कुछ मुस्लिम नागरिकों ने गाजा में पीड़ित लोगों की सहायता के लिए एक निजी संस्था के माध्यम से फंड भेजा था. यह मदद इंसानियत के नाम पर भेजी गई थी, लेकिन मामला तब विवादों में आया जब मौदहा निवासी अब्दुल शहीद नामक युवक ने इंस्टाग्राम पर इसका एक वीडियो अपलोड कर दिया.
इस घटना के बाद लखनऊ से पहुंची एक विशेष टीम ने मौदहा में रह रहे सात मुस्लिम नागरिकों से पूछताछ की. इन सभी के दस्तावेज खंगाले गए और फंड भेजने के स्रोत व माध्यमों की भी जांच की गई. पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया, लेकिन अब भी जांच जारी है.
एटीएस कर रही गहराई से जांच
प्रदेश की एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वाड) और खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच में जुटी हैं कि यह मदद किसी संदिग्ध संगठन के संपर्क में तो नहीं भेजी गई. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि धन का स्रोत वैध था या नहीं. मौदहा कस्बे के कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आर्थिक सहायता केवल मानवता के आधार पर दी गई थी और इसका कोई राजनीतिक या आपत्तिजनक उद्देश्य नहीं था. हालांकि, जांच पूरी होने तक कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता.