खेती में क्रांति! गेहूं- धान छोड़ उगाया करेला, हर फसल में 1 लाख की कमाई, बाराबंकी का ये किसान बना मिसाल
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Barabanki News Today: बाराबंकी के सहेलियां गांव के युवा किसान शेखर ने पारंपरिक फसल छोड़कर करेले की खेती शुरू की. अब हर फसल पर लगभग एक लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं.
हाइलाइट्स
- बाराबंकी के किसान ने करेले की खेती अपनाई.
- दो बीघे में हर फसल पर करीब 1 लाख रुपये कमा रहे हैं.
- सालभर बाजार में करेले की मांग रहती है.
बाराबंकी: किसान पारंपरिक फसल जैसे धान और गेहूं की खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे से काफी परेशान हैं. बाराबंकी के सहेलियां गांव के किसान शेखर ने करेले की खेती को अपनाकर मिसाल पेश की है. कम जगह और कम लागत में की जाने वाली करेले की खेती से शेखर अब हर फसल पर करीब 1 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं.
शेखर बताते हैं कि करेले की खेती की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसकी मांग बाजार में सालभर रहती है. इसके चलते इसकी कीमत भी अच्छी बनी रहती है. एक बार पौधे तैयार हो जाने पर 2 से 3 महीने तक लगातार फसल मिलती है, जिससे कम मेहनत में अच्छा लाभ मिलता है.
2 बीघा में 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई
लोकल18 से बात करते हुए शेखर ने बताया कि वे पहले धान और गेहूं की खेती करते थे, लेकिन मुनाफा नाममात्र होता था. फिर उन्होंने करेले की खेती का रास्ता चुना. अब वे लगभग दो बीघे में इसकी खेती कर रहे हैं. एक बीघा की खेती पर करीब 15 से 20 हजार रुपए की लागत आती है. हर फसल पर कुल 1 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा हो जाता है.
करेले की खेती की शुरुआत खेत की 2-3 बार गहरी जुताई से होती है. इसके बाद मेड़ बनाकर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बीज बोए जाते हैं. 10-12 दिन बाद पौधे निकलते हैं, तो खेत में बांस और डोरी से स्टेचर तैयार किया जाता है. इस पर करेले की बेल फैलती है. इससे पौधों को बरसात में सड़न से बचाव होता है और पैदावार भी बढ़िया मिलती है.
दो महीने में तैयार हो जाती है फसल
करेले की फसल लगभग दो महीने में तैयार हो जाती है और तब से अगले कई हफ्तों तक तुड़ाई होती रहती है. इस दौरान बाजार में करेले की डिमांड बनी रहती है और किसान को नियमित आय होती रहती है. शेखर की तरह अन्य किसान भी अब इस सब्जी की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.